कैट स्टीवंस, पूर्व पॉप स्टार, यूनाइटेड किंगडम (2 का भाग 2)

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विवरण: 70 के दशक के सबसे प्रमुख संगीत हस्तियों में से एक और सत्य की उनकी खोज। भाग 2: क़ुरआन तथा इस्लाम स्वीकार करना।

  • द्वारा Cat Stevens
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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क़ुरआन

जब वे लंदन वापस आए तो क़ुरआन का एक अनुवाद साथ में ले आए, जो उन्होंने मुझे दिया। वह मुसलमान नहीं बने, लेकिन उसने इस धर्म में कुछ महसूस किया और सोचा कि मुझे भी इसमें कुछ मिल सकता है।

और जब मुझे किताब मिली, तो मार्गदर्शन जो मुझे सब कुछ समझा देगा - मैं कौन हूं; जीवन का उद्देश्य क्या है; हकीकत क्या है और हकीकत क्या होगी; और मैं कहाँ से आया हूँ - मुझे एहसास हुआ कि यही सच्चा धर्म है; धर्म इस अर्थ में नहीं कि पश्चिम इसे समझता है, न कि केवल आपके बुढ़ापे के लिए। पश्चिम में, जो कोई किसी धर्म को अपनाकर उसे अपना जीवन जीने का एकमात्र तरीका बनाना चाहता है, उसे कट्टर माना जाता है। मैं कट्टर नहीं था; मैं पहले शरीर और आत्मा के बीच भ्रमित था। तब मुझे एहसास हुआ कि शरीर और आत्मा अलग नहीं हैं और आपको धार्मिक होने के लिए पहाड़ पर जाने की जरूरत नहीं है। हमें बस ईश्वर की इच्छा का पालन करना चाहिए। तब हमारा पद स्वर्गदूतों से भी ऊँचा हो सकता है। अब मैं सबसे पहले मुसलमान बनना चाहता था।

मुझे एहसास हुआ कि सब कुछ ईश्वर का है, जिसे नींद नहीं आती। उसने सब कुछ बनाया है। उस समय, मैं अपना गर्व खोने लगा, क्योंकि मैंने सोचा था कि मैं यहां अपनी महानता के कारण हूं। लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मैंने खुद को नहीं बनाया है, और मेरे यहाँ होने का पूरा उद्देश्य उस शिक्षा के प्रति समर्पण करना है जिसे उस धर्म द्वारा सिद्ध किया गया है जिसे हम अल-इस्लाम के नाम से जानते हैं। उस समय, मैंने अपने विश्वास की खोज शुरू कर दी। मुझे लगा कि मैं मुसलमान हूं। क़ुरआन को पढ़कर मुझे अब एहसास हुआ कि ईश्वर द्वारा भेजे गए सभी पैगंबर एक ही संदेश लेकर आए थे। तब यहूदी और ईसाई अलग क्यों हैं? मैं अब जानता हूँ कि कैसे यहूदियों ने यीशु को मसीहा के रूप में स्वीकार नहीं किया और उन्होंने उसके वचन को बदल दिया। ईसाई भी ईश्वर के वचन को गलत समझते हैं और यीशु को ईश्वर का पुत्र कहते हैं। मुझे सब कुछ समझ में आ गया। यह क़ुरआन की सुंदरता है; यह आपको सोचने और तर्क करने के लिए कहती है, न कि सूर्य या चंद्रमा की पूजा करने के लिए बल्कि जिसने सब कुछ बनाया है उसकी पूजा करने के लिए। क़ुरआन मनुष्य को सूर्य और चंद्रमा और सामान्य रूप से ईश्वर की रचना पर विचार करने के लिए कहता है। क्या आप जानते हैं कि सूर्य चंद्रमा से कितना भिन्न है? वे पृथ्वी से अलग-अलग दूरी पर हैं, फिर भी हमें एक ही आकार के दिखाई देते हैं; कभी-कभी, एक दूसरे को ढकते भी हैं।

यहां तक कि जब कई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाते हैं, तो वे पृथ्वी के नगण्य आकार और अंतरिक्ष की विशालता को देखते हैं। वे बहुत धार्मिक हो जाते हैं, क्योंकि वो ईश्वर की निशानियों को देखते हैं।

जब मैंने क़ुरआन को आगे पढ़ा, तो इसमें प्रार्थना, दया और दान के बारे में लिखा था। मैं अभी तक मुसलमान नहीं बना था, लेकिन मुझे लगा कि मेरे लिए एकमात्र उत्तर क़ुरआन है, और ईश्वर ने इसे मेरे पास भेजा है, और मैंने इसे गुप्त रखा। लेकिन क़ुरआन भी अलग-अलग स्तरों पर बात करता है। मैं इसे दूसरे स्तर पर समझने लगा, जहां क़ुरआन कहता है, “विश्वास करने वाले अविश्वासियों को दोस्त नहीं समझते और विश्वास करने वाले आपस मे भाई हैं।” अब इस समय मैं अपने मुस्लिम भाइयों से मिलना चाहता था।

धर्म-परिवर्तन

तब मैंने यरूशलेम जाने का निश्चय किया (जैसा मेरे भाई ने किया था)। यरूशलेम में, मैं मस्जिद गया और वहां बैठ गया। एक आदमी ने मुझसे पूछा कि मुझे क्या चाहिए। मैंने उससे कहा कि मैं मुसलमान हूं। उसने पूछा मेरा नाम क्या है। मैंने उससे कहा, "स्टीवंस।" वह भ्रमित हो गया। मैं तब प्रार्थना में शामिल हुआ, हालांकि मै सही से प्रार्थना नहीं कर सका। वापस आने पर लंदन में, मेरी मुलाकात नफीसा नाम की एक बहन से हुई। मैंने उससे कहा कि मैं इस्लाम को अपनाना चाहता हूं, और उसने मुझे न्यू रीजेंट मस्जिद जाने को कहा। यह 1977 की बात है, मुझे क़ुरआन मिलने के क़रीब डेढ़ साल बाद। अब मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने अभिमान से छुटकारा पाना चाहिए, शैतान से छुटकारा पाना चाहिए और एक दिशा में जाना चाहिए। इसलिए शुक्रवार की सामूहिक प्रार्थना सभा के बाद, मै इमाम (प्रार्थना नेता) के पास गया और उनके हाथ पर अपने विश्वास (शहादह) की घोषणा की। आपके सामने कोई है जो प्रसिद्धि और भाग्यशाली था। लेकिन मार्गदर्शन कुछ ऐसा था जो मुझे नहीं मिला, चाहे मैंने कितनी भी कोशिश की हो, जब तक मुझे क़ुरआन नहीं मिला। अब मुझे एहसास हुआ कि मैं ईसाई धर्म या किसी अन्य धर्म के विपरीत, ईश्वर से सीधे संपर्क कर सकता हूं। जैसा कि एक हिंदू महिला ने मुझसे कहा, "आप हिंदुओं को नहीं समझते हैं। हम एक ईश्वर में विश्वास करते हैं; हम इन वस्तुओं (मूर्तियों) का उपयोग केवल ध्यान केंद्रित करने के लिए करते हैं।" वह जो कह रही थी वह यह था कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए, सहयोगियों की आवश्यकता होती है, और इसके लिए मूर्तियाँ हैं। लेकिन इस्लाम इन सभी बाधाओं को दूर करता है। केवल एक चीज है जो विश्वासियों को अविश्वासियों से अलग करती है, वह है नमाज़ (प्रार्थना)। यह शुद्धिकरण की प्रक्रिया है

अंत में, मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं जो कुछ भी करता हूं वह ईश्वर की खुशी के लिए होता है और प्रार्थना करता हूं कि आपको मेरे अनुभवों से कुछ प्रेरणा मिले। इसके अलावा, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि इस्लाम अपनाने से पहले मैं किसी मुसलमान के संपर्क में नहीं आया। मैंने पहले क़ुरआन पढ़ी और महसूस किया कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं है। इस्लाम सिद्ध है, और अगर हम पैगंबर के आचरण का अनुकरण करते हैं तो हम सफल होंगे

ईश्वर हमें मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) के राष्ट्र के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन दें। अमीन!

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