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आदम की कहानी (5 का भाग 4): पृथ्वी पर उनका जीवन

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विवरण: आदम, उसके बच्चे, पहली हत्या और आदम की मौत।

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2008 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1496 (दैनिक औसत: 8)
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आदम और हव्वा ने स्वर्ग छोड़ दिया और पृथ्वी पर अपना जीवन शुरू किया। ईश्वर ने उन्हें कई तरह से तैयार किया था। ईश्वर उन्हें शैतान की फुसफुसाहटों और षडयंत्रों के विरुद्ध संघर्ष करने का अनुभव दिया। उसने आदम को हर चीज़ के नाम सिखाए और उसके गुणों और उपयोगिता के बारे में बताया। आदम ने पृथ्वी के कार्यवाहक और ईश्वर के पैगंबर के रूप में अपना पद ग्रहण किया।

ईश्वर के पहले पैगंबर आदम अपनी पत्नी और संतानों को यह सिखाने के लिए उत्तरदायी थे कि कैसे ईश्वर की आराधना करें और उनसे क्षमा मांगें। आदम ने ईश्वर के नियमों को स्थापित किया और अपने परिवार का सहारा बने और पृथ्वी की देखभाल करने की कोशिश करने लगे। उनका काम था खेती करना, निर्माण करना और आबाद करना; उन्हें ऐसे बच्चों की परवरिश करनी थी जो ईश्वर के निर्देशों के अनुसार जियें और पृथ्वी की देखभाल और सुधार करें।

आदम के पहले चार बच्चे

आदम और हव्वा की पहली संतान, कैन और उसकी जुड़वा बहन थे; उन्हें एक बार फिर जुड़वा बच्चे हुए, हाबिल और उसकी जुड़वा बहन। आदम और उसका परिवार शांति और सद्भाव से रहते थे। कैन ने जमीन को जोता, जबकि हाबिल ने पशुओं को पाला। समय बीतता गया और आदम के पुत्रों के विवाह का अवसर आया। इब्न अब्बास और इब्न मसूद सहित पैगंबर मुहम्मद के साथियों के एक समूह ने कहा कि आदम के बच्चों के बीच एक गर्भावस्था के पुरुष का दूसरे गर्भावस्था की महिला के साथ अंतर-विवाह की प्रथा थी। इसलिए हम जानते हैं कि पृथ्वी को आबाद करने की ईश्वर की योजना में आदम के प्रत्येक पुत्र का दूसरे गर्भावस्था की जुड़वां बहन से विवाह करना शामिल था।

ऐसा लगता है कि सुंदरता ने शुरू से ही पुरुषों और महिलाओं के आकर्षण में एक भूमिका निभाई है। कैन अपने लिए चुने गए साथी से खुश नहीं था। कैन अपने भाई से ईर्ष्या करने लगा और उसने अपने पिता की आज्ञा का पालन करने से इनकार कर दिया और ऐसा करते हुए उसने ईश्वर की अवज्ञा की। ईश्वर ने मनुष्य को अच्छी और बुरी दोनों प्रवृत्तियों के साथ बनाया है, और हमारी मूल प्रवृत्ति पर काबू पाने का संघर्ष हमारे लिए उसकी परीक्षा का हिस्सा है।

ईश्वर ने आज्ञा दी कि प्रत्येक पुत्र को त्याग करना होगा। उसका फैसला उस बेटे के पक्ष में होगा जिसका प्रस्ताव सबसे स्वीकार्य होगा। कैन ने अपना सबसे खराब अनाज दिया, लेकिन हाबिल ने अपने सबसे अच्छे पशु की पेशकश की। ईश्वर ने हाबिल के त्याग को स्वीकार किया, इसलिए कैन क्रोधित हो गया, उसने अपने भाई को मारने की धमकी दी।

"तथा उनेहें आदम के दो पुत्रों का सही समाचार सुना दो, जब दोनों ने एक उपायन (क़ुर्बानी) प्रस्तुत की, तो एक से स्वीकार की गई तथा दूसरे से स्वीकार नहीं की गई। दूसरे ने कहाः मैं अवश्य तेरी हत्या कर दूंगा।"(क़ुरआन 5:27)

हाबिल ने अपने भाई को सलाह दी कि जो लोग डरते हैं और उनकी सेवा करते हैं, उनके अच्छे कामों को ईश्वर स्वीकार करेंगे, लेकिन जो लोग अहंकारी, स्वार्थी और ईश्वर के प्रति अवज्ञाकारी हैं, उनके अच्छे कामों को भी ईश्वर अस्वीकार कर देंगे।

"हाबिल ने कहाः ईश्वर आज्ञाकारों ही से स्वीकार करता है। यदि तुम मेरी हत्या करने के लिए मेरी ओर हाथ बढ़ाओगे, तो भी मैं तुम्हारी ओर तुम्हारी हत्या करने के लिए हाथ बढ़ाने वाला नहीं हूँ। मैं विश्व के ईश्वर से डरता हूं जो मानवजाति, जिन्न, और जो कुछ भी मौजूद है सबका पालनहार है।" (क़ुरआन 5:27-28)

पहली हत्या

"अंततः, उसने स्वयं को अपने भाई की हत्या पर तैयार कर लिया और विनाशों में हो गया। (क़ुरआन  5:30)

पैगंबर मुहम्मद ने हमें बताया कि कैन क्रोधित हो गया और उसने अपने भाई के सिर पर लोहे के टुकड़े से प्रहार किया। एक अन्य कथन में यह भी कहा गया कि कैन ने हाबिल के सिर पर उस समय प्रहार किया जब वह सो रहा था।

“ फिर ईश्वर ने एक कौआ भेजा, जो भूमि कुरेद रहा था, ताकि उसे दिखाये कि अपने भाई के शव को कैसे छुपाये, उसने कहाः मुझपर खेद है!

क्या मैं इस कौआ जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छुपा सकूँ, फिर बड़ा लज्जित हूआ। (क़ुरआन 5:31)

आदम बहुत दुखी हुए; उन्होंने अपने पहले और दूसरे दोनों बेटों को खो दिया था। एक की हत्या कर दी गई थी; दूसरे को मानवजाति के सबसे बड़े शत्रु - शैतान ने वश में कर लिया था। आदम ने धैर्यपूर्वक अपने बेटे के लिए प्रार्थना की, और पृथ्वी की देखभाल करना जारी रखा। उन्होंने अपने कई बच्चों और पोते-पोतियों को ईश्वर के बारे में बताया। उन्होंने उन्हें शैतान के साथ अपनी भिड़ंत के बारे में भी बताया और उन्हें शैतान की चालों और योजनाओं से सावधान रहने की सलाह दी। साल दर साल बीत गए, और आदम बूढ़ा हो गए और उसके बच्चे पृथ्वी पर फैल गए।

आदम की मौत

सारी मानवजाति आदम की सन्तान हैं। एक कथन में, पैगंबर मुहम्मद ने हमें बताया कि ईश्वर ने आदम को उनके वंशज दिखाए। आदम ने पैगंबर दाऊद की आंखों में एक सुंदर प्रकाश देखा और उनसे प्यार किया, इसलिए उन्होंने ईश्वर की तरफ रुख किया और कहा: "हे ईश्वर, उसे मेरे जीवन से चालीस वर्ष दो।” ईश्वर ने आदम के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया, और उसे लिख कर मुहरबंद कर दिया गया।

आदम का जीवन काल 1000 वर्ष माना जाता था लेकिन 960 वर्षों के बाद मृत्यु का दूत आदम के पास आया। आदम को आश्चर्य हुआ और उसने कहा "लेकिन मेरे पास अभी भी जीने के लिए 40 साल हैं"। मृत्यु के दूत ने उसे अपने प्रिय वंशज पैगंबर दाऊद को 40 साल के उपहार की याद दिला दी, लेकिन आदम ने इनकार कर दिया। कई वर्षों बाद, अंतिम पैगंबर मुहम्मद ने कहा: “आदम ने इनकार किया इसलिए आदम के बच्चे इनकार करते हैं, आदम भूल गया और उसके बच्चे भूल जाते हैं; आदम ने गलतियां कीं और उसके बच्चे गलतियां करते हैं।” (अत -तिर्मिज़ी)

अरबी में मानवजाति के लिए शब्द इंसान है और यह मूल शब्द निसयान से आया है जिसका अर्थ है भूलना। यह मानव स्वभाव का हिस्सा है, मानव जाति भूल जाती है, और जब हम भूल जाते हैं तो हम इनकार करते हैं और अस्वीकार करते हैं। आदम भूल गया (वह झूठ नहीं बोल रहा था), और ईश्वर ने उसे क्षमा कर दिया। आदम तब ईश्वर की इच्छा के अधीन हुए और मर गए। स्वर्गदूतों ने पैगंबर आदम के शरीर को उतारा और नहलाया; उन्होंने कब्र खोदी और मानव जाति के पिता आदम के शरीर को दफनाया।

आदम का उत्तराधिकारी

अपनी मृत्यु से पहले आदम ने अपने बच्चों को याद दिलाया कि ईश्वर उन्हें कभी भी अकेला या मार्गदर्शन के बिना नहीं छोड़ेगा। उसने उनसे कहा कि ईश्वर अन्य पैगंबरो को अद्वितीय नामों, लक्षणों और चमत्कारों के साथ भेजेगा, लेकिन वे सभी एक ही बात कहेंगे - एक सच्चे ईश्वर की पूजा करो। आदम ने अपने पुत्र सेथ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

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