Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

あなたが要求した記事/ビデオはまだ存在していません。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

क्या हम अकेले हैं? (3 का भाग 2): शैतान कौन है?

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: सबसे पहला पाप शैतान ने किया था और तब से लेकर आज तक वो लोगों को अविश्वास, अत्याचार और पाप करने के लिए बहका रहा है।

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2011 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 802 (दैनिक औसत: 3)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

क्या शैतान जिन्नों में से एक है? [1] शैतान को असुर, दुष्ट, इब्लीस, बुराई का अवतार, कई नामों से जाना जाता है। ईसाई आमतौर पर उसे शैतान कहते हैं; मुसलमानों मे भी उन्हें शैतान के नाम से जाना जाता है। हमें सबसे पहले आदम और हव्वा की कहानी में इसके बारे में पता चला और हालांकि ईसाई और इस्लामी परंपराओं में बहुत कुछ समान है, लेकिन कुछ स्पष्ट अंतर हैं।

आदम और हव्वा की कहानी के बारे में लगभग सभी को पता है और इसका इस्लामी संस्करण इस वेबसाइट पर उपलब्ध है। [2] क़ुरआन और पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) की परंपराएं किसी भी तरह यह नही बताती कि शैतान सांप के रूप में आदम और हव्वा के पास आया था। न ही वे यह बताती है कि उन दो में से कमजोर हव्वा थी जिसने आदम को ईश्वर की आज्ञा न मानने के लिए प्रलोभित किया। वास्तविकता यह थी कि आदम और हव्वा को शैतान की फुसफुसाहट और चालों के बारे मे पता नही था और उसके साथ उनका व्यवहार पूरी मानवजाति के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है।

शैतान आदम से ईर्ष्या करने लगा और उसने उसके सामने झुक कर प्रणाम करने की ईश्वर की आज्ञा का पालन करने से मना कर दिया। ईश्वर हमें क़ुरआन में इसके बारे में बताता है:

"अतः उनसब स्वर्गदूतों ने झुक कर प्रणाम किया इब्लीस के सिवा, उसने झुक कर प्रणाम करने से मना कर दिया। ईश्वर ने पूछाः 'हे इब्लीस! तुझे क्या हुआ कि तूने झुक कर प्रणाम करने से मना कर दिया?' उसने कहाः 'मैं ऐसा नहीं हूं कि एक मनुष्य को झुक कर प्रणाम करूँ, जिसे तूने सड़े हुए कीचड़ के सूखे गारे से पैदा किया है।' ईश्वर ने कहाः यहां से निकल जा, वास्तव में तू धिक्कारा हुआ है। और तुझपर धिक्कार है, प्रलय के दिन तक।'" (क़ुरआन 15:30-35)

शैतान तब भी घमंडी था और अब भी घमंडी है। उसने उसी क्षण शपथ ली कि वो आदम, हव्वा और उनके वंशजों को गुमराह करेगा और धोखा देगा। जब उसे स्वर्ग से निकाला गया, तो शैतान ने ईश्वर से वादा किया कि यदि वो न्याय के दिन तक जीवित रहा तो वह मानवजाति को गुमराह करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेगा। शैतान चालाक और धूर्त है, लेकिन अंततः मनुष्य की कमजोरियों को समझता है; वह उनके प्यार और इच्छाओं को पहचानता है और उन्हें धार्मिकता के मार्ग से दूर करने के लिए हर तरह की चाल और धोखे का इस्तेमाल करता है। उसने मानवजाति के लिए पाप को आकर्षक बनाना शुरू कर दिया और उन्हें बुरी चीजों और अनैतिक कार्यों से लुभाने लगा।  

"अब, वास्तव में, इब्लीस (शैतान) ने साबित कर दिया था कि उनके बारे में उसकी राय सही थी: क्योंकि उन्होंने अनुसरण किया उसका - कुछ विश्वासियों को छोड़कर।" (क़ुरआन 34:20)

अरबी में शैतान शब्द का किसी भी घमंडी या ढीठ प्राणी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और यह इस विशेष प्राणी पर लागू होता है, क्योंकि वो ईश्वर के प्रति जिद्दी और विद्रोही है। शैतान एक जिन्न है, एक ऐसा प्राणी जो सोच सकता है, तर्क कर सकता है और स्वतंत्र इच्छा रखता है। वह निराशा से भरा हुआ है क्योंकि उसे ईश्वर की दया से वंचित होने का महत्व पता है। शैतान ने अपने साथ अधिक से अधिक मनुष्यों को नर्क की गहराइयों में ले जाने की कसम खाई है। 

"शैतान ने कहा: तू बता, क्या यही है, जिसे तूने मुझपर प्रधानता दी है? यदि तूने मुझे प्रलय के दिन तक अवसर दिया, तो मै इसके वंशजों को अपने नियंत्रण में कर लूंगा कुछ को छोड़कर।" (क़ुरआन 17:62)

ईश्वर हमें पूरे क़ुरआन में शैतान की दुश्मनी के खिलाफ चेतावनी देता है। वह आसानी से लोगों को धोखा देने, गुमराह करने और बरगलाने में सक्षम है। वह पाप को स्वर्ग का रास्ता बना के दिखाने में सक्षम है और जब तक व्यक्ति पूरी तरह सावधान न हो, उसे आसानी से गुमराह किया जा सकता है। सर्वशक्तिमान ईश्वर कहता है:

“ऐ आदम की सन्तान। ऐसा न हो कि शैतान तुम्हें बहका दे।" (क़ुरआन 7:27)

"वास्तव में, शैतान तुम्हारा शत्रु है। अतः तुम उसे अपना शत्रु ही समझो।" (क़ुरआन 35:6)

"जो शैतान को ईश्वर के सिवा सहायक बनायेगा, वह खुली क्षति में पड़ जायेगा।" (क़ुरआन 4:119)

जैसा कि बताया गया है, शैतान का अंतिम उद्देश्य लोगों को स्वर्ग से दूर ले जाना है, लेकिन उसके छोटे-छोटे लक्ष्य भी हैं। वह लोगों को मूर्तिपूजा और बहुदेववाद की ओर ले जाने की कोशिश करता है। वह उन्हें पाप करने और अवज्ञा करने के लिए लुभाता है। यह कहना सही है कि अवज्ञा का हर वो कार्य जिससे ईश्वर घृणा करता है शैतान को प्रिय है, शैतान अनैतिकता और पाप से प्रेम करता है। वह विश्वासियों के कानों में फुसफुसाता है, वह ईश्वर की प्रार्थना और स्मरण को बाधित करता है और हमारे मन को महत्वहीन बातों से भर देता है। इब्न उल कय्यम ने कहा, "उसकी एक साजिश यह है कि वह हमेशा लोगों के दिमाग को तब तक बहकाता है जब तक कि वो धोखा न खा जाए, वह नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को हमें आकर्षक बना के दिखाता है।" 

वो कहते हैं कि यदि तुम धन का दान करोगे तो तुम गरीब हो जाओगे, वे फुसफुसाते हैं कि अगर तुम ईश्वर के लिए बाहर निकलोगे तो अकेले पड़ जाओगे। शैतान लोगों के बीच दुश्मनी करवाता है, लोगों के मन में संदेह पैदा करता है और पति-पत्नी के बीच दरार पैदा करता है। उसे धोखा देने का बहुत अनुभव है। उसके पास चालें और प्रलोभन हैं, उसके शब्द चिकने और मोहक होते हैं और उसके पास मदद के लिए मानवजाति और जिन्न की फौज है। हालांकि, जैसा कि हमने पिछले लेख में बताया है कि जिन्नों में विश्वास करने वाले भी हैं, लेकिन अधिक संख्या शरारत करने वालों या बुरे काम करने वालों की है। वे ईश्वर के सच्चे विश्वासियों को डराने, छल करने और अंततः नष्ट करने के कार्य मे स्वेच्छा से और खुशी से शैतान का साथ देते हैं।

अगले लेख में हम चर्चा करेंगे कि जिन्न कहां इकट्ठा होते हैं, उनके संकेतों को कैसे पहचानें और अपने और अपने परिवार को उनकी शरारतों से कैसे बचाएं। 



फुटनोट:

[1] अल अश्कर, उ. (2003)। दी वर्ल्ड ऑफ़ जिन्न एंड डेविल्स। इस्लामी पंथ श्रृंखला। इंटरनेशनल इस्लामिक पब्लिशिंग हाउस: रियाद। और इघातत अल लहफ़ान में शेख इब्न अल क़य्यम।

[2] http://www.islamreligion.com/articles/1190/

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

इसी श्रेणी के अन्य लेख

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version