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स्वर्ग के सुख (2 का भाग 1)

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विवरण: इस दुनिया के जीवन और स्वर्ग के बीच मूलभूत अंतरों को परिभाषित करने वाले दो लेख में से पहला। भाग 1: स्वर्ग में वो चीज़ें नहीं है जो इस जीवन में दुख, दर्द और पीड़ा देती हैं।

  • द्वारा M. Abdulsalam (© 2006 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 456 (दैनिक औसत: 5)
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स्वर्ग की सच्चाई कुछ ऐसी है जिसे लोग तब तक नहीं जान पाएंगे जब तक कि वे वास्तव में स्वर्ग में न चले जाएं, लेकिन ईश्वर ने हमें क़ुरआन में इसकी कुछ झलक दिखाई है। उन्होंने स्वर्ग को इस दुनिया के जीवन, प्रकृतिक और जीवन के उद्देश्य, के साथ-साथ यहां के आनंद से अलग बताया है। ईश्वर ने जो स्वर्ग देने को कहा है क़ुरआन उसके बारे में लोगों को बताता है, इसके सुख का उल्लेख करता है, और सभी को इसकी सुंदरता बताता है। यह लोगों को बताता है कि स्वर्ग इस दुनिया के बाद जीवन जीने के दो तरीकों में से एक है, और यह कि स्वर्ग में हर अच्छी चीज उस हद तक उनकी होगी जो वो अभी कल्पना भी नहीं कर सकते। यह ये भी दर्शाता है कि स्वर्ग एक ऐसी जगह है जहां सभी सुख हैं और जहां लोगों को उनकी आत्मा और दिल की इच्छा की हर चीज दी जाएगी, और लोगों को जरुरत, चिंता या उदासी, दुख और अफसोस से दूर कर दिया जाएगा। स्वर्ग में हर तरह की सुंदरता और सुख मौजूद है और इसे इस तरह दिया जाएगा जैसा पहले न कभी देखा होगा और न सोचा होगा। ईश्वर ने वहां इन सुखों को उपहार के रूप में तैयार किया है, और ये केवल उन्हीं लोगों को दिया जायेगा जिन से वह प्रसन्न होगा।

लेकिन स्वर्ग में इन सुखों का स्वरूप क्या है, और यह इस दुनिया के सुखों से कैसे अलग होगा? हम इनमें से कुछ अंतरों को बताने का प्रयास करेंगे।

शुद्ध आनंद - न दर्द, न पीड़ा

यहाँ इस दुनिया में लोगों को कुछ सुख मिलता है तो वहीं उन्हें बहुत अधिक परिश्रम और पीड़ा का भी सामना करना पड़ता है। यदि कोई अपने जीवन की जांच-पड़ताल करे तो वो देखेगा कि वो जिस कठिनाई का सामना कर रहा है वो आराम और सुख से कहीं अधिक है। स्वर्ग में न तो कोई कठिनाई होगी और न ही कष्ट, और लोग उसमें पुरे आनंद और सुख से रहेंगे। इस जीवन में लोगों को जिस दुख, दर्द और पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है, स्वर्ग में ये सब नहीं होगा। आइए इनमें से कुछ कारणों पर एक नजर डालते हैं।

धन संपत्ति

जब कोई इस जीवन में सफलता के बारे में सोचता है, तो वे आमतौर पर बड़े घरों, बढ़िया गहनों और कपड़ों और महंगी कारों के बारे में सोचता हैं; वित्तीय स्थिरता को सुखी जीवन की कुंजी माना जाता है। अधिकांश लोगों के लिए सफलता का मतलब धन है, भले ही यह सच न हो। कितनी बार हमने धनी लोगों को ऐसा कठिनाई भरा जीवन जीते देखा है कि कभी-कभी वह आत्महत्या कर लेते हैं! धन एक ऐसी चीज है जिसे मनुष्य किसी भी कीमत पर चाहता है, और यह इच्छा एक बड़े उद्देश्य और ज्ञान के लिए बनाई गई है। जब यह इच्छा पूरी नहीं होती, तो व्यक्ति कुछ हद तक दुखी होता है। इसलिए ईश्वर ने स्वर्ग के निवासियों से वादा किया है कि उनके पास धन और संपत्ति के संबंध में वह सब कुछ होगा जिसकी उन्होंने कल्पना की थी, दोनों के लिए जो बेहद गरीब थे और यहां तक कि भूखे और प्यासे रहते थे, और अमीर लोगों के लिए जो और अधिक चाहते थे। ईश्वर हमें इसकी एक झलक देते हैं जब वो कहते हैं:

"...वहां सब कुछ होगा, जिसे उनका मन चाहेगा और जिसे उनकी आंखें देखकर आनन्द लेगी..." (क़ुरआन 43:71)

"आनन्द से खाओ और पियो उसके बदले में जो तुमने किया है पिछले दिनों (संसार) में!" (क़ुरआन 69:24)

"...उसमें उन्हें सोने के कंगन पहनाये जायेंगे, और वो महीन और गाढ़े रेशम के हरे वस्त्र पहनेंगे। वो सिंहासनों के ऊपर आसीन होंगे। ये प्रतिफल कितना अच्छा है! ये कितना अच्छा विश्राम स्थान है।" (क़ुरआन 18:31)

रोग और मृत्यु

इस जीवन में दर्द और पीड़ा का एक अन्य कारण किसी प्रियजन की मृत्यु या बीमारी है, स्वर्ग में ये दनो चीज़ें नही है। स्वर्ग में किसी को कोई बीमारी या दर्द नहीं होगा। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) ने स्वर्ग के लोगों के बारे में कहा:

"वे कभी बीमार नहीं होंगे, और न ही अपनी नाक साफ़ करेंगे और थूकेंगे।" (सहीह अल बुखारी)

स्वर्ग में किसी की मृत्यु नही होगी। सभी उसमें अनंत काल तक सुख का आनंद लेते रहेंगे। पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि जब लोग इसमें प्रवेश करेंगे तो एक पुकारने वाला स्वर्ग में पुकारेगा:

"वास्तव में आप स्वस्थ रहें और फिर कभी बीमार न हों, आप जीवित रहें और फिर कभी न मरें, आप जवान रहें और फिर कभी कमजोर न हों, आप आनंद लें, और फिर कभी दुख और पछतावा न करें।" (सहीह मुस्लिम)

सामाजिक रिश्ते

जहां तक व्यक्तिगत संबंधों में मनमुटाव के कारण होने वाले पछतावे का सवाल है, लोगों को स्वर्ग में कभी भी कोई बुराई या दुख पहुंचाने वाली बात नहीं सुनाई देगी। वो केवल अच्छी और शांति की बाते ही सुनेंगे। ईश्वर कहता है:

"नहीं सुनेंगे इसमें व्यर्थ और पाप की बात। केवल शांति! शांति!" की आवाज सुनेंगे।" (क़ुरआन 56:25-26)

लोगों के बीच न दुश्मनी होगी और न ही द्वेष:

"और उनके दिलों में जो द्वेष (अगर इस दुनिया में ऐसा है तो) होगा उसे हम निकाल देंगे..." (क़ुरआन 7:43)

पैगंबर ने कहा:

"वहां न घृणा होगी, न द्वेष होगा, उनके दिल एक जैसे होंगे और वे सुबह और शाम ईश्वर की बड़ाई करेंगे।" (सहीह अल बुखारी)

वहां लोगों के पास सबसे अच्छे साथी होंगे, जो दुनिया में भी सबसे अच्छे लोग थे:

"और जो ईश्वर और पैगंबर की आज्ञा का पालन करेंगे, वह स्वर्ग में उनके साथ होंगे जिनपर ईश्वर ने कृपा की है, अर्थात पैगंबरों, सत्य बोलने वालों, शहीदों और सदाचारियों के साथ और वे कितने अच्छे साथी होंगे!" (क़ुरआन 4:69)

स्वर्ग वालों के दिल पवित्र होंगे, उनकी वाणी अच्छी होगी, उनके काम अच्छे होंगे। वहां कोई आहत करने वाली, परेशान करने वाली, आपत्तिजनक या उत्तेजक बात नहीं होगी, क्योंकि स्वर्ग सभी बेकार बातों और कामो से मुक्त है। यदि हम इस जीवन में पीड़ा के सभी कारणों की बात करें, तो हम निश्चित रूप से स्वर्ग मे इन चीजों को नही पाएंगे।

 

 

स्वर्ग के सुख (2 का भाग 2)

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विवरण: स्वर्ग और इस दुनिया के जीवन के बीच मूलभूत अंतरों को परिभाषित करने वाले दो लेखों का दूसरा भाग। भाग 2: इस दुनिया के जीवन की तुलना में स्वर्ग के सुख और आनंद की श्रेष्ठता।

  • द्वारा M. Abdulsalam (© 2006 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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परलोक के जीवन की अनंतता

इस संसार के सुख कुछ समय के लिए हैं जबकि परलोक के सुख हमेशा रहेंगे। इस जीवन में जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ का आनंद लेता है, तो ये आनंद कुछ समय का ही होता है और या तो वो जल्दी ही इससे ऊब जाता हैं या उसे इसकी आवश्यकता नहीं होती, और किसी ऐसी चीज़ की तलाश करने लगता है जो उन्हें बेहतर लगता है। वहीं स्वर्ग के सुख की बात करें तो व्यक्ति कभी भी किसी चीज से ऊब नहीं सकता, बल्कि वो जितनी बार भी उस सुख का आनंद लेगा, उसका आनंद बढ़ता ही जायेगा।

इसके आलावा इस संसार का जीवन भी बहुत कम है। मनुष्य इस पृथ्वी पर थोड़े समय के लिए ही रहता है, और बहुत ही कम लोग है जो सत्तर वर्ष की आयु तक जीवित रहते हैं।

"...आप कह दें कि सांसारिक सुख बहुत थोड़े समय का है और परलोक उसके लिए बहुत अच्छा है जो ईश्वर से डरता है..." (क़ुरआन 4:77)

स्वर्ग का जीवन कभी समाप्त नहीं होगा। ईश्वर कहता है:

"...इसकी व्यवस्था हमेशा के लिए है और इसकी छाया भी..." (क़ुरआन 13:35)

"जो तुम्हारे पास है वह मिट जाएगा, और जो ईश्वर के पास है वह हमेशा रहेगा..." (क़ुरआन 16:96)

"(उनसे कहा जाएगा): यह हमारी व्यवस्था है, जो कभी खत्म नहीं होगी" (क़ुरआन 38:54)

बेहतर सुख

स्वर्ग के लोगों के सुख जैसे कि उनके कपड़े, भोजन, पानी, गहने और महल इस दुनिया की तुलना में कहीं बेहतर होंगे। वास्तव में स्वर्ग के किसी चीज़ की तुलना नहीं कर सकते क्योंकि स्वर्ग का छोटे से छोटा स्थान भी इस दुनिया और इसकी चीज़ों से बेहतर है। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) कहते हैं:

"स्वर्ग में आप में से किसी एक के धनुष का स्थान उस सब से बेहतर है जिस पर सूरज की रौशनी पड़ती है" (मिश्कात अल-मसाबीह 3/85, नंबर 5615)

सभी दोष से मुक्त

स्वर्ग इस दुनिया के सभी दोषों से मुक्त है। इस जीवन में खाने-पीने के कारण मलत्याग की आवश्यकता होती है और इससे अप्रिय गंध आती है। अगर इस दुनिया में कोई व्यक्ति शराब पीता है तो उसके सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है। इस संसार में औरतों को माहवारी होती है और बच्चो को जन्म देते है, इन सबसे दर्द और कष्ट होता है। स्वर्ग इन सभी असुविधाओं से मुक्त है: स्वर्ग में रहने वाले लोग पेशाब नहीं करेंगे, शौच नहीं करेंगे, थूकेंगे नहीं और सर्दी-जुकाम नहीं होगा। स्वर्ग के निर्माता के अनुसार वहां की शराब:

"पीने वालों के लिए क्रिस्टल-सफ़ेद, नशे से मुक्त होगी, और न ही वे इससे बहकेंगे" (कुरान 37:46-47)

स्वर्ग का पानी खारा नहीं होता और वहां के दूध का स्वाद कभी नहीं बदलता।

"...नदियां है जल की जिसका पानी ख़राब नहीं होता; दूध की नदियां हैं जिसका स्वाद कभी नहीं बदलता..." (क़ुरआन 47:15)

स्वर्ग की स्त्रियां पवित्र हैं और माहवारी, प्रसवोत्तर रक्तस्राव और इस दुनिया में महिलाओं को होने वाले हर कष्ट से मुक्त हैं, और सभी मलत्याग करने से मुक्त हैं। ईश्वर कहता है:

"...और वहां उनके लिए पवित्र साथी होंगे..." (क़ुरआन 2:25)

जब किसी व्यक्ति ने पैगंबर से पूछा कि स्वर्ग के लोग राहत कैसे करेंगे तो उन्होनें कहा:

"वे अपनी त्वचा से पसीना बहाकर अपने आप को राहत देंगे, और इसकी सुगंध कस्तूरी होगी, और सभी के पेट पतले हो जाएंगे।" (इब्न हिब्बान)

हमने जो उल्लेख किया है वह स्वर्ग की प्रकृति को समझने के लिए सिर्फ एक तुलना है, लेकिन जैसा कि ईश्वर ने कहा है, इसके सुख छुपे हुए है:

"कोई भी व्यक्ति नहीं जानता कि जो वे करते थे उसके इनाम के रूप में उनके लिए क्या सुख छुपाया गया है।" (क़ुरआन 32:17)

स्वर्ग: इसके जैसा कुछ भी नहीं

स्वर्ग के सुख कल्पना और व्यख्या से परे हैं। दुनिया के लोगों को इसके बारे में कुछ भी नही पता; चाहे हम कितने ही उन्नत क्यों न हो जाएं, हमारे पास जो कुछ भी होगा वह स्वर्ग के सुखों की तुलना में कुछ भी नहीं है। जैसा कि कई जगह उल्लेख किया गया है, स्वर्ग जैसा कुछ भी नहीं है:

"यह एक जगमगाती रोशनी, सुगंधित पौधे, एक ऊंचा महल, एक बहती नदी, पके फल, एक सुंदर पत्नी और कभी न खत्म होने वाले वस्त्र, कभी न खत्म होने वाला आनंद, सुंदर ऊंचा घर है।" (इब्न माजह, इब्न हिब्बान)

पैगंबर के साथियो ने उनसे स्वर्ग की इमारतों के बारे में पूछा और उन्होंने इसका एक अद्भुत विवरण दिया:

“सोने-चांदी की ईंटें, सुगन्धित कस्तूरी का गारा, मोती और नीलम के कंकड़, और केसर की जमीन। जो भी यहां जायेगा वह आनंद से भर जायेगा और कभी दुखी नहीं होगा; वह वहां सदा जीवित रहेगा और कभी नहीं मरेगा; उनके कपड़े कभी खराब नहीं होंगे और उनकी जवानी कभी खतम नहीं होगी।” (अहमद, अल-तिर्मिज़ी, अद-दारीमी)

ईश्वर कहता है:

"और जब आप वहां (स्वर्ग में) देखोगे तो आपको बड़ी खुशी (जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती) और एक महान प्रभुत्व दिखाई देगा।" (क़ुरआन 76:20)

स्वर्ग के जिन सुखों को ईश्वर ने हमसे छिपा रखा है वो हमारी सोंच से परे है। पैगंबर ने कहा कि ईश्वर कहता है:

"मैंने अपने दासो के लिए वह रखा है जो किसी आंख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और कोई मनुष्य उसकी कल्पना नहीं कर सकता।" आप चाहें तो पढ़ सकते हैं:

"कोई भी व्यक्ति नहीं जानता कि जो वे करते थे उसके इनाम के रूप में उनके लिए क्या सुख छुपाया गया है।" (क़ुरआन 32:17)

एक अन्य रिपोर्ट में:

“उसकी चिंता मत करो जो ईश्वर ने बताया है; जो नहीं बताया है वो और भी बड़ा है।” (सहीह मुस्लिम)

अन्य लेखों में हम स्वर्ग के कुछ विशिष्ट विवरणों और उसके सुख का उल्लेख करने का प्रयास करेंगे जो हमें ईश्वर और उनके अंतिम पैगंबर ने बताया है।

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