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मैल्कम एक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका (2 का भाग 2)

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विवरण: सबसे प्रमुख अफ्रीकी-अमेरिकी क्रांतिकारी शख्सियतों में से एक की सच्ची इस्लाम की खोज की कहानी, और यह कैसे नस्लवाद की समस्या को हल करता है: भाग 2: एक नया व्यक्ति एक नए संदेश के साथ।

  • द्वारा Yusuf Siddiqui
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 444 (दैनिक औसत: 2)
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एक ईश्वर के अधीन मनुष्य की एकता

उन्होंने अपनी तीर्थयात्रा के दौरान हार्लेम में नवगठित मुस्लिम मस्जिद में अपने वफादार सहायकों को कुछ पत्र लिखना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनके पत्र की नकल की जाए और प्रेस को वितरित किया जाए:

“मैंने इस प्राचीन पवित्र भूमि और इब्राहीम, मुहम्मद तथा पवित्र शास्त्र के अन्य सभी पैगंबरो के घर में सभी रंगों और नस्लों के लोगों द्वारा किये जाने वाले सच्चे आतिथ्य और सच्चे भाईचारे की जबरदस्त भावना को कभी नहीं देखा है। पिछले एक हफ्ते से, सभी रंगों के लोगों द्वारा अपने चारों ओर प्रदर्शित किए गए अनुग्रह से मैं पूरी तरह से अवाक और मंत्रमुग्ध हो गया हूं…”

“मेरे द्वारा कहे गए इन शब्दों से आप चौंक सकते हैं। लेकिन इस तीर्थयात्रा पर, जो मैंने देखा है और अनुभव किया है, उसने मुझे अपने पहले के विचारों को पुनर्व्यवस्थित करने और अपने पिछले कुछ निष्कर्षों को खत्म करने के लिए मजबूर कर दिया है। ये मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था। अपने दृढ़ विश्वासों के बावजूद, मैं हमेशा एक ऐसा व्यक्ति रहा हूं जो तथ्यों का सामना करने और जीवन की वास्तविकता को नए अनुभव और नए ज्ञान के रूप में स्वीकार करने की कोशिश करता है। मैंने हमेशा एक खुला दिमाग रखा है, जो लचीलेपन के लिए आवश्यक है जो सत्य के लिए हर प्रकार की बुद्धिमान खोज के साथ-साथ चलना चाहिए।”

“यहाँ मुस्लिम जगत में, मैंने पिछले ग्यारह दिनों से एक ही थाली में खाया है, एक ही गिलास में पिया है, और एक ही बिस्तर पर (या एक ही गलीचे पर) सोया हूं - उसी ईश्वर से प्रार्थना करते हुए, साथी मुसलमानों के साथ, जिनकी आँखें सबसे नीली थीं, जिनके बाल सबसे भूरे थे, और जिनकी त्वचा सबसे सफेद थी। और "श्वेत" मुसलमानों के शब्दों और कार्यों और कामों में, मैंने नाइजीरिया, सूडान और घाना के वही काले अफ्रीकी मुसलमानों के बीच वही ईमानदारी महसूस की।”

“हम सब सच में एक जैसे हैं -- क्योंकि एक ईश्वर में उनके विश्वास ने उनके मन से "श्वेत", उनके व्यवहार से 'श्वेत' और उनके दृष्टिकोण से 'श्वेत' को हटा दिया है।”

“मैं इससे देख सकता था कि शायद अगर गोरे अमेरिकी ईश्वर के एक होने को स्वीकार कर लें, तो शायद वे भी वास्तव में मनुष्य के एक जैसा होने को स्वीकार कर लेंगे - और लोगों को रंगो के आधार पर मापना, और बाधा डालना, और दूसरों को नुकसान पहुंचाना बंद कर देंगे।”

“असाध्य कैंसर की तरह अमेरिका में नस्लवाद की फैलती तबाही के साथ, तथाकथित "ईसाई" सफेद अमेरिकी लोगों को इस तरह की विनाशकारी समस्या के एक सिद्ध समाधान के लिए अधिक ग्रहणशील होना चाहिए। शायद यह अमेरिका को आसन्न आपदा से बचाने का समय हो सकता है -- इसी नस्लवाद की वजह से जर्मनी पर विनाश आया जिसने अंततः स्वयं जर्मनों को नष्ट कर दिया।”

“उन्होंने मुझसे पूछा कि हज के बारे में मुझे सबसे ज्यादा क्या प्रभावित करता है. . . . मैंने कहा, “भाईचारा! दुनिया भर से सभी जातियों, रंगों के लोगो का एक साथ आना! इसने मुझे एक ईश्वर की शक्ति साबित कर दी है। . . . सभी ने एक जैसा खाया और एक ही तरह से सोये। तीर्थयात्रा का हर माहौल एक ईश्वर के तहत मनुष्य की एकता पर जोर देता है।”

मैल्कम तीर्थयात्रा से अल-हज मलिक अल-शबज़ बन के लौटे। वह नई आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के साथ एक आग की तरह थे। उनके लिए यह संघर्ष एक राष्ट्रवादी के नागरिक अधिकारों के संघर्ष से लेकर एक अंतर्राष्ट्रीयवादी और मानवतावादी के मानवाधिकार संघर्ष तक विकसित हुआ था।

तीर्थयात्रा के बाद

श्वेत पत्रकार और अन्य लोग अपने बारे में अल-हज मलिक की नवगठित राय के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे। उन्हें शायद ही इस बात का विश्वास था कि जिस आदमी ने इतने सालों तक उनके खिलाफ प्रचार किया था, वह अचानक पलटकर उन्हें भाई कह सकता है। इन लोगों के लिए अल-हज्ज मलिक का यह कहना था:

“आप मुझसे पूछ रहे हैं कि 'क्या आपने यह नहीं कहा कि अब आप गोरे लोगों को भाई के रूप में स्वीकार करते हैं?' खैर, मेरा जवाब यह है कि मुस्लिम दुनिया में मैंने देखा, महसूस किया और घर पर लिखा कि मेरी सोच कैसे व्यापक हुई! जैसा कि मैंने लिखा था, मैंने कई गोरे-रंग वाले मुसलमानों के साथ सच्चा भाईचारा और प्यार साझा किया, जिन्होंने कभी किसी अन्य मुस्लिम के नस्ल या रंग के बारे में कभी कुछ भी नहीं सोंचा।”

“मेरी तीर्थयात्रा ने मेरा दायरा बढ़ाया। इसने मुझे एक नई अंतर्दृष्टि का आशीर्वाद दिया। पवित्र भूमि में दो सप्ताह में, मैंने वह देखा जो मैंने यहां उनतालीस वर्षों में अमेरिका में कभी नहीं देखा था। मैंने सभी जातियों, सभी रंगों को देखा - नीली आंखों वाले गोरे से लेकर काली चमड़ी वाले अफ्रीकियों तक - सच्चे भाईचारे में! एकता में! एक साथ रहते हैं! एक साथ पूजा करते हैं! कोई अलगाववादी नहीं - कोई उदारवादी नहीं; वे नहीं जानते होंगे कि उन शब्दों का अर्थ क्या है।”

“अतीत में, हां, मैंने सभी गोरे लोगों पर व्यापक आरोप लगाए हैं। मैं वो दोबारा फिर कभी ऐसा नहीं करूंगा -- जैसा कि मैं अब जानता हूं कि कुछ गोरे लोग वास्तव में ईमानदार होते हैं, कि कुछ वास्तव में एक अश्वेत व्यक्ति के प्रति भाईचारे से रहते हैं। सच्चे इस्लाम में मैंने देखा कि सभी गोरे लोगों के प्रति अभियोग उतना ही गलत है जितना काले लोगों के खिलाफ अभियोग गलत है।"

अश्वेत उन्हें एक नेता के रूप में देखने लगे थे, अल-हज मलिक ने एक नया संदेश दिया, जो इस्लाम के राष्ट्र में एक मंत्री के रूप में वह जो प्रचार कर रहे थे, उसके बिल्कुल विपरीत था:

“सच्चे इस्लाम ने मुझे सिखाया कि मानव परिवार और मानव समाज को पूर्ण बनाने के लिए सभी धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और नस्लीय सामग्री या विशेषताओं की आवश्यकता होती है।”

 “मैंने अपने हार्लेम स्ट्रीट दर्शकों से कहा कि मानवजाति को "शांति" तभी मिलेगी जब मानवजाति सिर्फ एक ईश्वर के प्रति समर्पण करेगी जिसने सभी को बनाया है, जिसके बारे मे आप कई जगह सुनते हैं.... लेकिन इसके लिए बहुत कम कार्य किये जाते हैं।”

टिकने के लिए बहुत खतरनाक

अल-हज मलिक का नया सार्वभौमिक संदेश अमेरिकी प्रतिष्ठान का सबसे बुरा सपना था। वे न केवल अश्वेत जनता को, बल्कि सभी जातियों और रंगों के बुद्धिजीवियों को भी आकर्षित कर रहे थे। अब उन्हें प्रेस द्वारा लगातार "हिंसा की वकालत" और "उग्रवादी" होने के रूप में दिखाया गया था, हालांकि वास्तव में वह और डॉ. मार्टिन लूथर किंग दृष्टिकोण में एक साथ आगे बढ़ रहे थे:

“लक्ष्य हमेशा से एक ही रहा है, लेकिन इसको पाने के रास्ते मेरे और डॉ. मार्टिन लूथर किंग के अहिंसक रास्ते की तरह अलग है, जो निहत्थे अश्वेतों के खिलाफ गोरे लोगों की क्रूरता और बुराई को चित्रित करता है। और आज इस देश के नस्लीय माहौल में, कोई बीच यह अनुमान लगा सकता है कि अश्वेत व्यक्ति की समस्याओं के प्रति दृष्टिकोण में "चरमपंथी" में से कौन पहले व्यक्तिगत रूप से एक घातक आपदा का सामना करेगा -- 'अहिंसक' डॉ. किंग, या तथाकथित 'हिंसक' मैं।”

अल-हज मलिक अच्छी तरह से जानते थे कि वह कई समूहों का लक्ष्य है। इसके बावजूद उन्हें जो कहना था वह कहने से कभी नहीं डरते थे। अपनी आत्मकथा के अंत में एक प्रसंग के रूप में वे कहते हैं:

"मुझे पता है कि समाजों ने अक्सर उन लोगों को मार डाला है जिन्होंने उन समाजों को बदलने में मदद की है। और अगर मैं मर गया किसी भी प्रकाश को लाने में, किसी भी सार्थक सत्य को उजागर करने में जो अमेरिका के शरीर में घातक जातिवादी कैंसर को नष्ट करने में मदद करेगा - तो, सारा श्रेय ईश्वर को है। और गलतियां सिर्फ मेरी हैं।”

मैल्कम एक्स की विरासत

यद्यपि अल-हज मलिक जानते थे कि उनकी हत्या हो सकती है, उन्होंने कभी पुलिस सुरक्षा के लिए अनुरोध नहीं किया। 21 फरवरी 1965 को न्यूयॉर्क के एक होटल में भाषण देने की तैयारी के दौरान तीन अश्वेत लोगों ने उन्हें गोली मार दी। वह चालीस की उम्र में तीन महीने कम थे। हालांकि यह स्पष्ट था कि हत्या का संबंध इस्लाम राष्ट्र से था, बहुत से लोग मानते थे कि इसमें एक से अधिक संगठन शामिल थे। एफबीआई जो अपने काले-विरोधी आंदोलन की प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है, इनको एक सहयोगी के रूप में देखा गया। हम निश्चित रूप से कभी नहीं जान सकते कि अल-हज मलिक की हत्या, या 1960 के दशक की शुरुआत में अन्य राष्ट्रीय नेताओं की हत्या के पीछे कौन था।

मैल्कम एक्स के जीवन ने अमेरिकियों को कई महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया। अल-हज मलिक की मृत्यु के बाद से अफ्रीकी-अमेरिकियों की अपनी इस्लामी जड़ों में रुचि बढ़ी। मैल्कम की आत्मकथा लिखने वाले एलेक्स हेली ने बाद में महाकाव्य, रूट्स, एक अफ्रीकी मुस्लिम परिवार के गुलामी के अनुभव के बारे में लिखा। अधिक से अधिक अफ्रीकी-अमेरिकी मुस्लिम बन रहे हैं, मुस्लिम नाम अपना रहे हैं, या अफ्रीकी संस्कृति की खोज कर रहे हैं। मैल्कम एक्स में रुचि हाल ही में फिल्म "एक्स" के कारण बढ़ी है। अल-हज मलिक आम तौर पर अफ्रीकी-अमेरिकियों, मुसलमानों और अमेरिकियों के लिए गर्व का स्रोत है। उनका संदेश सरल और स्पष्ट है:

“मैं किसी भी रूप में नस्लवादी नहीं हूं। मैं किसी भी तरह के जातिवाद में विश्वास नहीं करता। मैं किसी भी प्रकार के भेदभाव या अलगाव में विश्वास नहीं करता। मैं इस्लाम को मानता हूं। मैं एक मुस्लिम हूं।”

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