Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

मैल्कम एक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका (2 का भाग 1)

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: सबसे प्रमुख अफ्रीकी-अमेरिकी क्रांतिकारी शख्सियतों में से एक की सच्ची इस्लाम की खोज की कहानी, और यह कैसे नस्लवाद की समस्या को हल करता है: भाग 1: इस्लाम का राष्ट्र और हज।

  • द्वारा Yusuf Siddiqui
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1023 (दैनिक औसत: 2)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

"मैं एक मुसलमान हूं और हमेशा रहूंगा। मेरा धर्म इस्लाम है।"

-मैल्कम एक्स

प्रारंभिक जीवन

मैल्कम एक्स का जन्म मैल्कम लिटिल के रूप मे 19 मई, 1925 को ओमाहा, नेब्रास्का में हुआ था। उनकी मां, लुई नॉर्टन लिटिल एक गृहिणी थीं और उनके परिवार में आठ बच्चों थे। उनके पिता, अर्ल लिटिल, एक मुखर बैपटिस्ट पादरी थे और अश्वेत राष्ट्रवादी नेता मार्कस गर्वे के समर्थक थे। अर्ल के नागरिक अधिकारों की सक्रियता की वजह से उन्हें श्वेत वर्चस्ववादी संगठन ब्लैक लीजन से मौत की धमकियां मिलती थी, जिससे उनके परिवार को मैल्कम के चौथे जन्मदिन से पहले दो बार स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ा। लीजन से बचने के लिए लिटिल के प्रयासों के बावजूद, 1929 में उनके लांसिंग, मिशिगन के घर को जला दिया गया, और दो साल बाद अर्ल का क्षत-विक्षत शरीर शहर के ट्रॉली ट्रैक पर पड़ा मिला, जब मैल्कम केवल छह वर्ष के थे। लुईस अपने पति की मृत्यु के कई वर्षों बाद तक भावनात्मक रूप से टूट गई थी और उन्हें एक मानसिक संस्थान जाना पड़ा। उनके बच्चों को विभिन्न पालक घरों और अनाथालयों में भेज दिया गया।

मैल्कम एक होशियार छात्र थे और अपनी कक्षा में सबसे ऊपर रहते हुए जूनियर हाई से स्नातक किया। हालांकि, जब एक पसंदीदा शिक्षक ने मैल्कम को बताया कि वकील बनने का उनका सपना एक नीग्रो के लिए कोई वास्तविक लक्ष्य नहीं था, तो मैल्कम ने स्कूल में रुचि खो दी और अंततः पंद्रह साल की उम्र में स्कुल से निकल गए। सड़कों के तौर-तरीकों को सीखते हुए, मैल्कम की जान-पहचान गुंडों, चोरों, गप्पी और दलालों से हो गई। उन पर बीस साल की उम्र में चोरी का दोष लगा, वह सत्ताईस साल की उम्र तक जेल में रहे। अपने जेल प्रवास के दौरान उन्होंने खुद को शिक्षित करने का प्रयास किया। इसके अलावा, जेल में अपनी अवधि के दौरान, उन्होंने एलिजाह मुहम्मद की शिक्षाओं का पूरी तरह से अध्ययन किया और इस्लाम राष्ट्र के बारे में सीखा और उसमें शामिल हो गए। उन्हें 1952 में रिहा किया गया तब तक वो बदल चुके थे।

'इस्लाम का राष्ट्र'

रिहा होने के बाद, मैल्कम डेट्रॉइट गए, संप्रदाय की दैनिक गतिविधियों में शामिल हो गए, और उन्हें खुद एलिजाह मुहम्मद से शिक्षा मिली। मैल्कम की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने संगठन को राष्ट्रव्यापी बनाने में मदद की, जबकि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति बनाया। प्रमुख टेलीविजन कार्यक्रमों और पत्रिकाओं द्वारा उनका साक्षात्कार लिया गया और वो देश भर में विभिन्न विश्वविद्यालयों और अन्य मंचों पर वक्ता बने। उनकी शक्ति उनके शब्दों में थी, जो अश्वेतों की दुर्दशा को इतनी स्पष्ट रूप से वर्णित करती थी और ज़बरदस्त रूप से गोरों को उकसाती थी। जब एक श्वेत व्यक्ति ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि कुछ दक्षिणी विश्वविद्यालय ने संगीन के बिना नए अश्वेत लोगों को नामांकित किया है, तो मैल्कम ने इस पर तिरस्कार के साथ प्रतिक्रिया दी:

जब मैं फिसल जाता, तो प्रोग्राम होस्ट प्रलोभन देता: आह! दरअसल, मिस्टर मैल्कम एक्स - आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि यह आपकी जाति के लिए एक अग्रिम है!

मैं तब पोल को झटका देता। मैं कुछ 'नागरिक अधिकारों के अग्रिम' के बारे में सुने बिना मुड़ नहीं सकता! गोरे लोग सोचते हैं कि अश्वेत व्यक्ति को 'हालेलुयाह' चिल्लाना चाहिए! चार सौ साल से श्वेत लोगों ने अश्वेत लोगों की पीठ में एक फुट लंबा चाकू डाल रखा है - और अब श्वेत लोग चाकू को शायद छह इंच बाहर निकालना शुरू कर रहे हैं! अश्वेत लोगों को आभारी होना चाहिए? क्यों, अगर श्वेत आदमी चाकू को निकाल भी ले, तो यह फिर भी एक निशान छोड़ देगा।

हालांकि मैल्कम के शब्द अक्सर अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ हो रहे अन्याय के साथ चुभते थे, इस्लाम राष्ट्र के समान नस्लवादी विचारों ने उन्हें किसी भी श्वेत को ईमानदार या मदद करने वाला मानने से रोक रखा था। बारह वर्षों तक, उन्होंने प्रचार किया कि श्वेत व्यक्ति शैतान है और माननीय एलिजाह मुहम्मद ईश्वर के दूत हैं। दुर्भाग्य से, मैल्कम की अधिकांश छवियां आज उनके जीवन के उस समय पर केंद्रित हैं, यद्यपि वह जिस परिवर्तन से गुजरने वाले थे, वह उसे अमेरिकी लोगों के लिए एक पूरी तरह से अलग, और अधिक महत्वपूर्ण संदेश देगा।

सच्चे इस्लाम में परिवर्तन

12 मार्च 1964 को, इस्लाम के राष्ट्र के भीतर आंतरिक ईर्ष्या और एलिजाह मुहम्मद की यौन अनैतिकता के खुलासे के बाद, मैल्कम ने अपना संगठन शुरू करने के इरादे से इस्लाम राष्ट्र छोड़ दिया:

मैं एक ऐसे आदमी की तरह महसूस करता हूं जो थोड़ी नींद की अवस्था में है और किसी ओर के नियंत्रण में है। मुझे लगता है कि मैं अभी जो सोच रहा हूं और कह रहा हूं वह मेरे लिए है। पहले, यह किसी के लिए और दूसरे के मार्गदर्शन में था, अब मैं अपने मन से सोचता हूं।

मैल्कम अड़तीस वर्ष के थे जब उन्होंने एलिजाह मुहम्मद के इस्लाम राष्ट्र को छोड़ दिया। छोड़ने से पहले जो हुआ उस पर विचार करते हुए उन्होंने कहा:

कॉलेज या विश्वविद्यालय में आमतौर पर अनौपचारिक सभाओं में मेरे बोलने के बाद, शायद एक दर्जन श्वेत लोग मेरे पास आते और खुद को अरब, मध्य पूर्वी या उत्तरी अफ्रीकी मुसलमान बताते, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्ययन करने और रहने आये हैं। वो मुझसे कहते कि, मेरे श्वेत-अभियोग वाले बयानों के बावजूद, उन्हें लगात है कि मैं खुद को ईमानदारी से मुस्लिम मान सकता हूं -- और उन्होंने महसूस किया कि अगर मैं उस चीज़ के संपर्क में आ गया जिसे वे हमेशा सच्चा इस्लाम कहते थे, तो मैं इसे समझूंगा, और इसे अपनाऊंगा। स्वचालित रूप से, एलिजाह के अनुयायी के रूप में, जब भी यह कहा गया था, मैंने उन्हें रोक दिया था। लेकिन इनमें से कई अनुभवों के बाद अपने विचारों की गोपनीयता में, मैंने खुद से सवाल किया: यदि कोई किसी धर्म को मानने में ईमानदार है, तो वह उस धर्म के बारे में अपने ज्ञान का विस्तार करने से क्यों कतराता है?

एक के बाद एक मै जिन रूढि़वादी मुसलमानो से मिला था, उन्होंने मुझे डॉ. महमूद युसुफ शवारबी से मिलने और बात करने का आग्रह किया. . . फिर एक दिन एक पत्रकार ने डॉ. शवारबी और मेरा परिचय कराया। वह सौहार्दपूर्ण था। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रेस में मेरे लेखो को पढ़ा था; मैंने कहा कि मुझे उनके बारे में बताया गया था, और हमने पंद्रह या बीस मिनट तक बात की। हम दोनों को अपने काम की वजह से जाना पड़ा, जब उन्होंने मुझे कुछ ऐसा बताया जिसका तर्क मेरे दिमाग से कभी नहीं निकलेगा। उन्होंने ने कहा, किसी भी मनुष्य का विश्वास उस समय तक पूरा नहीं होता जब तक वह अपने भाई के लिए वो नहीं चाहता जो वह अपने लिए चाहता है। (पैगंबर मुहम्मद [ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे] की एक कहावत)

तीर्थयात्रा का प्रभाव

मैल्कम इसके बाद हज के बारे में बताते हैं:

मक्का की तीर्थयात्रा, जिसे हज के नाम से जाना जाता है, एक धार्मिक दायित्व है जिसे हर रूढ़िवादी मुसलमान को सक्षम होने पर अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार करना चाहिए।

पवित्र क़ुरआन कहता है:

“..ईश्वर के घर (पैगंबर इब्राहीम द्वारा निर्मित) की तीर्थयात्रा एक कर्तव्य है जो मनुष्य ईश्वर के प्रति ऋणी है; जो सक्षम हैं, यात्रा करे...” (क़ुरआन 3:97)

“ईश्वर ने कहा: 'और घोषणा कर दो लोगों में ह़ज की, वे आयेंगे तेरे पास पैदल तथा प्रत्येक दुबली-पतली सवारियों पर, जो प्रत्येक दूरस्थ मार्ग से आयेंगी।’” (क़ुरआन 22:27)

जेद्दा जाने के लिए हवाई अड्डे पर हजारों लोगो ने एक तरह के कपड़े पहने थे। आप राजा हैं या किसान, इसका किसी को पता नहीं चलेगा। बड़ी सावधानी से मुझे कुछ ताकतवर शख्सियतों के बारे में इशारा करके बताया गया, जो उन्होंने पहना था, वही मैंने भी पहना था। इस तरह तैयार होने के बाद, हम सब थोड़ी-थोड़ी देर मे लब्बैक! (अल्लाहुम्मा) लब्बैक (मैं आया, हे ईश्वर!) पुकारते थे! विमान में सफेद, काले, भूरे, लाल और पीले लोग, नीली आँखें और भूरे बाल और मेरे गांठदार लाल बाल - सब एक साथ, भाइयों की तरह थे! सभी एक ही ईश्वर का सम्मान करते हैं, और सभी एक-दूसरे को समान सम्मान देते हैं...

तभी मैंने पहली बार गोरे आदमी का पुनर्मूल्यांकन करना शुरू किया। यह तब था जब मैंने पहली बार यह समझना शुरू किया कि गोरे आदमी, जैसा कि आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है, का अर्थ केवल रंग नहीं है; मुख्य रूप से यह दृष्टिकोण और कार्यों का वर्णन करता है। अमेरिका में, श्वेत व्यक्ति का अर्थ अश्वेत व्यक्ति के प्रति और अन्य सभी गैर-श्वेत पुरुषों के प्रति विशिष्ट दृष्टिकोण और कार्य है। लेकिन मुस्लिम दुनिया में, मैंने देखा था कि गोरे रंग के पुरुष किसी और की तुलना में अधिक सच्चे भाईचारे वाले हैं। उस सुबह गोरे लोगों के बारे में मेरे पूरे दृष्टिकोण में एक आमूलचूल परिवर्तन की शुरुआत थी।

दुनिया भर से हजारों की संख्या में तीर्थयात्री आये थे। वे सभी रंगों के थे, नीली आंखों वाले गोरे से लेकर काली चमड़ी वाले अफ्रीकियों तक। लेकिन हम सभी एकता और भाईचारे की भावना को प्रदर्शित करते हुए एक ही अनुष्ठान में भाग ले रहे थे, अमेरिका में मेरे अनुभवों से मुझे विश्वास था कि ऐसा कभी नही हो सकता... अमेरिका को इस्लाम को समझने की जरूरत है, क्योंकि यही एक ऐसा धर्म है जो अपने समाज से नस्ल की समस्या को मिटा देता है। मुस्लिम दुनिया में अपनी पूरी यात्रा के दौरान, मैं ऐसे लोगों से मिला, बात की, और यहां तक कि उन लोगों के साथ भी खाया, जिन्हें अमेरिका में गोरे माना जाता था - लेकिन इस्लाम धर्म ने उनके दिमाग से सफेद होने के रवैए को हटा दिया था। मैंने पहले कभी भी सभी रंगों के लोगो द्वारा एक साथ निभाए गए ईमानदार और सच्चे भाईचारे को नहीं देखा था, चाहे वो किसी रंग के क्यों न हो।

मैल्कम का अमेरिका का नया दृष्टिकोण

मैल्कम जारी रखते है:

पवित्र भूमि ने हर घंटे मुझे अमेरिका में काले और सफेद के बीच क्या हो रहा है, इस बारे में अधिक आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में सक्षम बनाया। अमेरिकी नीग्रो को उसकी नस्लीय दुश्मनी के लिए कभी भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है - वह केवल अमेरिकी गोरों के जागरूक नस्लवाद के चार सौ वर्षों पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे नस्लवाद अमेरिका को आत्महत्या के रास्ते पर ले जाता है, मुझे विश्वास है, उन अनुभवों से जो मैंने उनके साथ किए हैं, कि युवा पीढ़ी के गोरे, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में, दीवार पर लिखावट देखेंगे, और उनमें से कई सत्य के आध्यात्मिक पथ की ओर मुड़ेंगे -- एक ऐसा पथ जो इस आपदा को दूर करने के लिए अमेरिका के पास एकमात्र रास्ता है।

मेरा मानना ​​है कि ईश्वर अब दुनिया के तथाकथित 'ईसाई' श्वेत समाज को दुनिया के गैर-श्वेत लोगों का शोषण और गुलाम बनाने के अपराधों के लिए पश्चाताप करने और प्रायश्चित करने का अंतिम अवसर दे रहे हैं। यह ठीक वैसा ही है जब ईश्वर ने फिरौन को पश्चाताप करने का मौका दिया था। परन्तु फिरौन उन लोगों को न्याय देने से इन्कार करता रहा जिन पर उसने जुल्म किया था। और, हम जानते हैं, ईशर ने अंततः फिरौन को नष्ट कर दिया।

मैं डॉ. आजम के साथ उनके घर पर रात का खाना कभी नहीं भूलूंगा। जितना अधिक हम बात करते, उतना ही उनके ज्ञान का विशाल भंडार और उसकी विविधता असीमित लगती। उन्होंने पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) के वंशजों के नस्लीय वंश की बात की, और बताया कि उनमें काले और सफेद दोनों थे। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे रंग, और रंग की समस्याएं जो मुस्लिम दुनिया में मौजूद हैं, केवल वहीं मौजूद हैं, और उस हद तक, मुस्लिम दुनिया का वह क्षेत्र पश्चिम से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को रंग के प्रति दृष्टिकोण के आधार पर किसी भी मतभेद का सामना करना पड़ता है, तो यह सीधे तौर पर पश्चिमी प्रभाव के स्तर को दर्शाता है।

 

 

मैल्कम एक्स, संयुक्त राज्य अमेरिका (2 का भाग 2)

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: सबसे प्रमुख अफ्रीकी-अमेरिकी क्रांतिकारी शख्सियतों में से एक की सच्ची इस्लाम की खोज की कहानी, और यह कैसे नस्लवाद की समस्या को हल करता है: भाग 2: एक नया व्यक्ति एक नए संदेश के साथ।

  • द्वारा Yusuf Siddiqui
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 855 (दैनिक औसत: 2)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

एक ईश्वर के अधीन मनुष्य की एकता

उन्होंने अपनी तीर्थयात्रा के दौरान हार्लेम में नवगठित मुस्लिम मस्जिद में अपने वफादार सहायकों को कुछ पत्र लिखना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनके पत्र की नकल की जाए और प्रेस को वितरित किया जाए:

“मैंने इस प्राचीन पवित्र भूमि और इब्राहीम, मुहम्मद तथा पवित्र शास्त्र के अन्य सभी पैगंबरो के घर में सभी रंगों और नस्लों के लोगों द्वारा किये जाने वाले सच्चे आतिथ्य और सच्चे भाईचारे की जबरदस्त भावना को कभी नहीं देखा है। पिछले एक हफ्ते से, सभी रंगों के लोगों द्वारा अपने चारों ओर प्रदर्शित किए गए अनुग्रह से मैं पूरी तरह से अवाक और मंत्रमुग्ध हो गया हूं…”

“मेरे द्वारा कहे गए इन शब्दों से आप चौंक सकते हैं। लेकिन इस तीर्थयात्रा पर, जो मैंने देखा है और अनुभव किया है, उसने मुझे अपने पहले के विचारों को पुनर्व्यवस्थित करने और अपने पिछले कुछ निष्कर्षों को खत्म करने के लिए मजबूर कर दिया है। ये मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था। अपने दृढ़ विश्वासों के बावजूद, मैं हमेशा एक ऐसा व्यक्ति रहा हूं जो तथ्यों का सामना करने और जीवन की वास्तविकता को नए अनुभव और नए ज्ञान के रूप में स्वीकार करने की कोशिश करता है। मैंने हमेशा एक खुला दिमाग रखा है, जो लचीलेपन के लिए आवश्यक है जो सत्य के लिए हर प्रकार की बुद्धिमान खोज के साथ-साथ चलना चाहिए।”

“यहाँ मुस्लिम जगत में, मैंने पिछले ग्यारह दिनों से एक ही थाली में खाया है, एक ही गिलास में पिया है, और एक ही बिस्तर पर (या एक ही गलीचे पर) सोया हूं - उसी ईश्वर से प्रार्थना करते हुए, साथी मुसलमानों के साथ, जिनकी आँखें सबसे नीली थीं, जिनके बाल सबसे भूरे थे, और जिनकी त्वचा सबसे सफेद थी। और "श्वेत" मुसलमानों के शब्दों और कार्यों और कामों में, मैंने नाइजीरिया, सूडान और घाना के वही काले अफ्रीकी मुसलमानों के बीच वही ईमानदारी महसूस की।”

“हम सब सच में एक जैसे हैं -- क्योंकि एक ईश्वर में उनके विश्वास ने उनके मन से "श्वेत", उनके व्यवहार से 'श्वेत' और उनके दृष्टिकोण से 'श्वेत' को हटा दिया है।”

“मैं इससे देख सकता था कि शायद अगर गोरे अमेरिकी ईश्वर के एक होने को स्वीकार कर लें, तो शायद वे भी वास्तव में मनुष्य के एक जैसा होने को स्वीकार कर लेंगे - और लोगों को रंगो के आधार पर मापना, और बाधा डालना, और दूसरों को नुकसान पहुंचाना बंद कर देंगे।”

“असाध्य कैंसर की तरह अमेरिका में नस्लवाद की फैलती तबाही के साथ, तथाकथित "ईसाई" सफेद अमेरिकी लोगों को इस तरह की विनाशकारी समस्या के एक सिद्ध समाधान के लिए अधिक ग्रहणशील होना चाहिए। शायद यह अमेरिका को आसन्न आपदा से बचाने का समय हो सकता है -- इसी नस्लवाद की वजह से जर्मनी पर विनाश आया जिसने अंततः स्वयं जर्मनों को नष्ट कर दिया।”

“उन्होंने मुझसे पूछा कि हज के बारे में मुझे सबसे ज्यादा क्या प्रभावित करता है. . . . मैंने कहा, “भाईचारा! दुनिया भर से सभी जातियों, रंगों के लोगो का एक साथ आना! इसने मुझे एक ईश्वर की शक्ति साबित कर दी है। . . . सभी ने एक जैसा खाया और एक ही तरह से सोये। तीर्थयात्रा का हर माहौल एक ईश्वर के तहत मनुष्य की एकता पर जोर देता है।”

मैल्कम तीर्थयात्रा से अल-हज मलिक अल-शबज़ बन के लौटे। वह नई आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के साथ एक आग की तरह थे। उनके लिए यह संघर्ष एक राष्ट्रवादी के नागरिक अधिकारों के संघर्ष से लेकर एक अंतर्राष्ट्रीयवादी और मानवतावादी के मानवाधिकार संघर्ष तक विकसित हुआ था।

तीर्थयात्रा के बाद

श्वेत पत्रकार और अन्य लोग अपने बारे में अल-हज मलिक की नवगठित राय के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे। उन्हें शायद ही इस बात का विश्वास था कि जिस आदमी ने इतने सालों तक उनके खिलाफ प्रचार किया था, वह अचानक पलटकर उन्हें भाई कह सकता है। इन लोगों के लिए अल-हज्ज मलिक का यह कहना था:

“आप मुझसे पूछ रहे हैं कि 'क्या आपने यह नहीं कहा कि अब आप गोरे लोगों को भाई के रूप में स्वीकार करते हैं?' खैर, मेरा जवाब यह है कि मुस्लिम दुनिया में मैंने देखा, महसूस किया और घर पर लिखा कि मेरी सोच कैसे व्यापक हुई! जैसा कि मैंने लिखा था, मैंने कई गोरे-रंग वाले मुसलमानों के साथ सच्चा भाईचारा और प्यार साझा किया, जिन्होंने कभी किसी अन्य मुस्लिम के नस्ल या रंग के बारे में कभी कुछ भी नहीं सोंचा।”

“मेरी तीर्थयात्रा ने मेरा दायरा बढ़ाया। इसने मुझे एक नई अंतर्दृष्टि का आशीर्वाद दिया। पवित्र भूमि में दो सप्ताह में, मैंने वह देखा जो मैंने यहां उनतालीस वर्षों में अमेरिका में कभी नहीं देखा था। मैंने सभी जातियों, सभी रंगों को देखा - नीली आंखों वाले गोरे से लेकर काली चमड़ी वाले अफ्रीकियों तक - सच्चे भाईचारे में! एकता में! एक साथ रहते हैं! एक साथ पूजा करते हैं! कोई अलगाववादी नहीं - कोई उदारवादी नहीं; वे नहीं जानते होंगे कि उन शब्दों का अर्थ क्या है।”

“अतीत में, हां, मैंने सभी गोरे लोगों पर व्यापक आरोप लगाए हैं। मैं वो दोबारा फिर कभी ऐसा नहीं करूंगा -- जैसा कि मैं अब जानता हूं कि कुछ गोरे लोग वास्तव में ईमानदार होते हैं, कि कुछ वास्तव में एक अश्वेत व्यक्ति के प्रति भाईचारे से रहते हैं। सच्चे इस्लाम में मैंने देखा कि सभी गोरे लोगों के प्रति अभियोग उतना ही गलत है जितना काले लोगों के खिलाफ अभियोग गलत है।"

अश्वेत उन्हें एक नेता के रूप में देखने लगे थे, अल-हज मलिक ने एक नया संदेश दिया, जो इस्लाम के राष्ट्र में एक मंत्री के रूप में वह जो प्रचार कर रहे थे, उसके बिल्कुल विपरीत था:

“सच्चे इस्लाम ने मुझे सिखाया कि मानव परिवार और मानव समाज को पूर्ण बनाने के लिए सभी धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और नस्लीय सामग्री या विशेषताओं की आवश्यकता होती है।”

 “मैंने अपने हार्लेम स्ट्रीट दर्शकों से कहा कि मानवजाति को "शांति" तभी मिलेगी जब मानवजाति सिर्फ एक ईश्वर के प्रति समर्पण करेगी जिसने सभी को बनाया है, जिसके बारे मे आप कई जगह सुनते हैं.... लेकिन इसके लिए बहुत कम कार्य किये जाते हैं।”

टिकने के लिए बहुत खतरनाक

अल-हज मलिक का नया सार्वभौमिक संदेश अमेरिकी प्रतिष्ठान का सबसे बुरा सपना था। वे न केवल अश्वेत जनता को, बल्कि सभी जातियों और रंगों के बुद्धिजीवियों को भी आकर्षित कर रहे थे। अब उन्हें प्रेस द्वारा लगातार "हिंसा की वकालत" और "उग्रवादी" होने के रूप में दिखाया गया था, हालांकि वास्तव में वह और डॉ. मार्टिन लूथर किंग दृष्टिकोण में एक साथ आगे बढ़ रहे थे:

“लक्ष्य हमेशा से एक ही रहा है, लेकिन इसको पाने के रास्ते मेरे और डॉ. मार्टिन लूथर किंग के अहिंसक रास्ते की तरह अलग है, जो निहत्थे अश्वेतों के खिलाफ गोरे लोगों की क्रूरता और बुराई को चित्रित करता है। और आज इस देश के नस्लीय माहौल में, कोई बीच यह अनुमान लगा सकता है कि अश्वेत व्यक्ति की समस्याओं के प्रति दृष्टिकोण में "चरमपंथी" में से कौन पहले व्यक्तिगत रूप से एक घातक आपदा का सामना करेगा -- 'अहिंसक' डॉ. किंग, या तथाकथित 'हिंसक' मैं।”

अल-हज मलिक अच्छी तरह से जानते थे कि वह कई समूहों का लक्ष्य है। इसके बावजूद उन्हें जो कहना था वह कहने से कभी नहीं डरते थे। अपनी आत्मकथा के अंत में एक प्रसंग के रूप में वे कहते हैं:

"मुझे पता है कि समाजों ने अक्सर उन लोगों को मार डाला है जिन्होंने उन समाजों को बदलने में मदद की है। और अगर मैं मर गया किसी भी प्रकाश को लाने में, किसी भी सार्थक सत्य को उजागर करने में जो अमेरिका के शरीर में घातक जातिवादी कैंसर को नष्ट करने में मदद करेगा - तो, सारा श्रेय ईश्वर को है। और गलतियां सिर्फ मेरी हैं।”

मैल्कम एक्स की विरासत

यद्यपि अल-हज मलिक जानते थे कि उनकी हत्या हो सकती है, उन्होंने कभी पुलिस सुरक्षा के लिए अनुरोध नहीं किया। 21 फरवरी 1965 को न्यूयॉर्क के एक होटल में भाषण देने की तैयारी के दौरान तीन अश्वेत लोगों ने उन्हें गोली मार दी। वह चालीस की उम्र में तीन महीने कम थे। हालांकि यह स्पष्ट था कि हत्या का संबंध इस्लाम राष्ट्र से था, बहुत से लोग मानते थे कि इसमें एक से अधिक संगठन शामिल थे। एफबीआई जो अपने काले-विरोधी आंदोलन की प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है, इनको एक सहयोगी के रूप में देखा गया। हम निश्चित रूप से कभी नहीं जान सकते कि अल-हज मलिक की हत्या, या 1960 के दशक की शुरुआत में अन्य राष्ट्रीय नेताओं की हत्या के पीछे कौन था।

मैल्कम एक्स के जीवन ने अमेरिकियों को कई महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया। अल-हज मलिक की मृत्यु के बाद से अफ्रीकी-अमेरिकियों की अपनी इस्लामी जड़ों में रुचि बढ़ी। मैल्कम की आत्मकथा लिखने वाले एलेक्स हेली ने बाद में महाकाव्य, रूट्स, एक अफ्रीकी मुस्लिम परिवार के गुलामी के अनुभव के बारे में लिखा। अधिक से अधिक अफ्रीकी-अमेरिकी मुस्लिम बन रहे हैं, मुस्लिम नाम अपना रहे हैं, या अफ्रीकी संस्कृति की खोज कर रहे हैं। मैल्कम एक्स में रुचि हाल ही में फिल्म "एक्स" के कारण बढ़ी है। अल-हज मलिक आम तौर पर अफ्रीकी-अमेरिकियों, मुसलमानों और अमेरिकियों के लिए गर्व का स्रोत है। उनका संदेश सरल और स्पष्ट है:

“मैं किसी भी रूप में नस्लवादी नहीं हूं। मैं किसी भी तरह के जातिवाद में विश्वास नहीं करता। मैं किसी भी प्रकार के भेदभाव या अलगाव में विश्वास नहीं करता। मैं इस्लाम को मानता हूं। मैं एक मुस्लिम हूं।”

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version