요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

इस्लाम क्या है? (4 का भाग 2): इस्लाम की उत्पत्ति

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: विश्व के अन्य धर्मों के बीच इस्लाम की भूमिका, विशेष रूप से यहूदी-ईसाई परंपरा के संबंध में।

  • द्वारा M. Abdulsalam (© 2006 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 09 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1903 (दैनिक औसत: 6)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

लेकिन मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) का संदेश ईश्वर द्वारा प्रकट किए गए पिछले संदेशों के साथ कहां फिट बैठता है? पैगंबरों का एक संक्षिप्त इतिहास इस बात को स्पष्ट कर सकता है।

पहले मनुष्य, आदम ने इस्लाम का पालन किया, जिसमें उसने केवल ईश्वर की पूजा की और किसी और की नहीं की और उसकी आज्ञाओं का पालन किया। लेकिन समय बीतने और पूरी पृथ्वी पर मानवता के फैलाव के साथ, लोग इस संदेश से भटक गए और ईश्वर के साथ या उनके अलावा दूसरों की पूजा करने लगे। कुछ ने धार्मिक लोग जो उनके बीच थे और मर गए, उनकी पूजा करना शुरू कर दिया। जबकि अन्य ने आत्माओं और प्रकृति की शक्तियों की पूजा करना शुरू कर दिया। तब ईश्वर ने मानवता के लिए दूतों को भेजना शुरू कर दिया जो उनके वास्तविक स्वरूप के अनुरूप थे, ताकि मनुष्य सिर्फ एक ईश्वर की पूजा करें, और उन्होंने ईश्वर के सिवा किसी अन्य की पूजा करने के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।

इन दूतों में से पहले नूह थे, जिन्हे अपने लोगों को इस्लाम के इस संदेश का प्रचार करने के लिए भेजा गया था, जब लोगो ने ईश्वर के साथ अपने पवित्र पूर्वजों की पूजा करना शुरू कर दिया था। नूह ने अपने लोगों को उनकी मूर्तियों की पूजा छोड़ने के लिए बोला और उन्हें एक अकेले ईश्वर की पूजा करने का आदेश दिया। उनमें से कुछ ने नूह की शिक्षाओं का पालन किया, जबकि अधिकांश ने उन पर विश्वास नहीं किया। जो लोग नूह का अनुसरण करते थे, वे इस्लाम के अनुयायी थे, या मुसलमान थे, जबकि जो नहीं करते थे, वे अपने अविश्वास में बने रहे और ऐसा करने के लिए उन्हें दंड दिया गया।

नूह के बाद, ईश्वर ने हर उस राष्ट्र के पास दूत भेजे जो सत्य से भटक गए थे, ताकि उन्हें सही रास्ते पर लाया जा सके। यह सत्य उस समय एक ही था: अन्य सभी की पूजा करना छोड़ दें, और सृष्टि के निर्माता ईश्वर की पूजा करें और उनकी आज्ञाओं का पालन करें। लेकिन जैसा कि हमने पहले उल्लेख किया है, क्योंकि प्रत्येक राष्ट्र अपने जीवन के तरीके, भाषा और संस्कृति के संबंध में भिन्न था, विशिष्ट दूतों को एक विशिष्ट समय अवधि के लिए विशिष्ट राष्ट्रों में भेजा गया था।

ईश्वर ने सभी राष्ट्रों में दूत भेजे, और बेबीलोन के राज्य में उसने इब्राहिम को भेजा - जो महानतम पैगंबरो में से सबसे पहले थे - जिन्होंने अपने लोगों को उन मूर्तियों की पूजा को छोड़ने के लिए बोला, जिनके लिए वे समर्पित थे। उन्होंने उन्हें इस्लाम में बुलाया, लेकिन उन लोगों ने उसे अस्वीकार कर दिया और उन्हें मारने की कोशिश भी की। ईश्वर ने इब्राहीम की कई परीक्षा ली, और वह उन सभी मे सफल हुए। उनके कई बलिदानों के कारण, ईश्वर ने घोषणा की कि उनकी संतानों में से एक महान राष्ट्र का निर्माण करेगा और ईश्वर उनमें से पैगंबरो को चुनेंगे। जब भी उसके वंश के लोग सत्य से भटकने लगे, जो कि केवल ईश्वर की पूजा करना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना था। ईश्वर ने उनके पास एक और दूत भेजा, जो उन्हें वापस ईश्वर की ओर ले गया।

नतीजतन, हम देखते हैं कि कई पैगंबरों को इब्राहिम के वंश मे भेजा गया था, जैसे कि उसके दो बेटे इसहाक और इस्माईल, याकूब (इस्राईल), यूसुफ, दाऊद, सुलैमान, मूसा और निश्चित रूप से यीशु (इन सभी पर ईश्वर की शांति और आशीर्वाद बना रहे)। प्रत्येक पैगंबर को इस्राईल के बच्चों (यहूदियों) के पास भेजा गया था जब वे ईश्वर के सच्चे धर्म से भटक गए थे, और उन पर यह अनिवार्य हो गया था कि वे उस दूत का पालन करें जो उनके पास भेजा गया था और उनकी आज्ञाओं का पालन करें। सभी दूत एक ही संदेश के साथ आए, कि केवल ईश्वर को छोड़कर किसी अन्य की पूजा न करें और उनकी आज्ञाओं का पालन करें। कुछ ने पैगंबरों पर विश्वास नहीं किया, जबकि अन्य ने विश्वास किया। जो मानते थे वे इस्लाम के अनुयायी या मुसलमान थे।

दूतों में से मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) थे, इब्राहीम के पुत्र इस्माईल (ईश्वर की दया और आशीर्वाद उन पर हो) की संतान से, जिसे यीशु के उत्तराधिकार में दूत के रूप में भेजा गया था। मुहम्मद ने पिछले पैगंबरो और दूतों के रूप में इस्लाम के एक ही संदेश का प्रचार किया - सिर्फ एक ईश्वर की पूजा करो ओर उनकी आज्ञाओं का पालन करो - जिसमें पिछले पैगंबरो के अनुयायी भटक गए थे।

इसलिए जैसा कि हम देखते हैं, पैगंबर मुहम्मद एक नए धर्म के संस्थापक नहीं थे, जैसा कि कई लोग गलत सोचते हैं, लेकिन उन्हें इस्लाम के अंतिम पैगंबर के रूप में भेजा गया था। मुहम्मद के लिए अपने अंतिम संदेश को प्रकट करके, जो कि सभी मानव जाति के लिए एक शाश्वत और सार्वभौमिक संदेश है, ईश्वर ने अंततः उस वचन को पूरा किया जो उन्होंने इब्राहिम को दिया था।

सिर्फ जीवित लोगों पर यह दायित्व था कि वे पैगंबरो के अंतिम उत्तराधिकार के संदेश का पालन करें जिन्हे लोगों के लिए भेजा गया था, मुहम्मद के संदेश का पालन करना सभी मनुष्यो के लिए अनिवार्य हो जाता है। ईश्वर ने वादा किया था कि यह संदेश सभी समयों और स्थानों के लिए अपरिवर्तित और उपयुक्त रहेगा। यह कहने के लिए पर्याप्त है कि इस्लाम का मार्ग पैगंबर इब्राहीम के तरीके के समान है, क्योंकि बाइबिल और क़ुरआन दोनों इब्राहीम को किसी ऐसे व्यक्ति के एक महान उदाहरण के रूप में चित्रित करते हैं, जिसने खुद को पूरी तरह से ईश्वर के सामने समर्पित किया और सिर्फ ईश्वर की पूजा की। एक बार जब यह समझ में आ जाता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस्लाम में किसी भी धर्म का सबसे निरंतर और सार्वभौमिक संदेश है, क्योंकि सभी पैगंबर और संदेशवाहक "मुसलमान" थे, अर्थात वे जो ईश्वर की इच्छा के अधीन थे, और उन्होंने "इस्लाम" का प्रचार किया, अर्थात केवल ईश्वर की पूजा करके और उसकी आज्ञाओं का पालन करके सर्वशक्तिमान ईश्वर की इच्छा के अधीन होना।

तो हम देखते हैं कि जो लोग आज खुद को मुसलमान कहते हैं, वे एक नए धर्म का पालन नहीं करते हैं; बल्कि वे उन सभी पैगंबरो और दूतों के धर्म और संदेश का पालन करते हैं जो ईश्वर की आज्ञा से मनुष्यों के लिए भेजे गए थे, जिसे इस्लाम भी कहा जाता है। शब्द "इस्लाम" एक अरबी शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "ईश्वर के प्रति समर्पण", और मुसलमान वे हैं जो ईश्वर के संदेश के अनुसार जीवन जीते हैं और सक्रिय रूप से ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं।

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

इसी श्रेणी के अन्य लेख

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version