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ईश्वर की दिव्य दया (3 का भाग 1): ईश्वर अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है

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विवरण: अल्लाह के दो सबसे बार-बार दोहराए जाने वाले नाम अर-रहमान और अर-रहीम की एक व्यावहारिक व्याख्या, और ईश्वर की सर्वव्यापी दया की प्रकृति।

  • द्वारा Imam Mufti
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 16 May 2022
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1032 (दैनिक औसत: 4)
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यदि कोई पूछे कि, 'तुम्हारा ईश्वर कौन है?' मुस्लिम का जवाब होगा, 'अत्यन्त कृपाशील और दयावान्।' इस्लामिक सूत्रों के अनुसार, पैगंबरों ने ईश्वर के न्याय को बताते हुए उनकी दया के बारे मे भी बताया। मुस्लिम धर्मग्रंथों में, ईश्वर अपना परिचय देता है:

"वह ईश्वर ही है, जिसके सिवा कोई देवता नहीं है, दृश्य और अदृश्य को जानने वाला। वह अत्यन्त कृपाशील और दयावान् है।" (क़ुरआन 59:22)

इस्लामी शब्दावली में अर-रहमान और अर-रहीम जीवित ईश्वर के व्यक्तिगत नाम हैं। दोनों संज्ञा रहमा से आये हैं, जिसका अर्थ है "दया", "करुणा", और "प्रेमपूर्ण कोमलता।" अर-रहमान ईश्वर के सर्व-दयालु होने के स्वभाव को दर्शाता है, जबकि अर-रहीम उनकी रचनाओं के ऊपर किये गए दया को दर्शाता है, एक छोटा अंतर, जो उसकी सभी सर्वव्यापी दया को दर्शाता है।

"आप कह दें कि ईश्वर कहकर पुकारो अथवा परम दयालु (अर-रहमान) कहकर पुकारो, जिस नाम से भी पुकारो, उसके सभी नाम शुभ हैं... " (क़ुरआन 17:110)

ये दो नाम क़ुरआन मे ईश्वर के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले नामों में से हैं: अर-रहमान का उपयोग सत्तावन बार किया गया है, जबकि अर-रहीम का उपयोग इसका दोगुना (एक सौ चौदह बार) किया गया है।[1]  यह प्रेम-कृपा की एक बड़ी भावना व्यक्त करता है, पैगंबर ने कहा:

"वास्तव में, ईश्वर दयालु है, और दयालुता को पसंद करता है। वह दयालुता से वह देता है जो वो कठोरता से नहीं देता है।" (सहीह मुस्लिम)

ये दोनों ही ईश्वरीय गुण हैं जो सृष्टि के साथ ईश्वर के संबंध को बताते हैं।

"सब प्रशंसायें ईश्वर के लिए हैं, जो सारे संसारों का पालनहार है। जो अत्यंत कृपाशील और दयावान् है।" (क़ुरआन 1:2-3)

इसे मुसलमान प्रार्थना में एक दिन में कम से कम सत्रह बार पढ़ते हैं, वे यह कहते हुए शुरू करते हैं:

"ईश्वर के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील और दयावान् है। सब प्रशंसायें ईश्वर के लिए हैं, जो सारे संसारों का पालनहार है। जो अत्यंत कृपाशील और दयावान् है।" (क़ुरआन 1:1-3)

ये शक्तिशाली शब्द एक दिव्य प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं:

"जब बंदा कहता है: 'सब प्रशंसायें ईश्वर के लिए हैं, जो सारे संसारों का पालनहार है।' तब ईश्वर कहता है: 'मेरे दास ने मेरी प्रशंसा की।' जब वह कहता है: 'ईश्वर अत्यंत कृपाशील और दयावान् है,' तब ईश्वर कहता है: 'मेरे दास ने मेरा गुणगान किया।'" (सहीह मुस्लिम)

ये नाम एक मुसलमान को लगातार अपने आस-पास की दिव्य दया की याद दिलाता है। मुस्लिम धर्मग्रंथों के सभी अध्याय इस एक वाक्यांश से शुरू होते हैं, 'ईश्वर के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील और दयावान् है।' मुसलमान ईश्वर के प्रति अपनी निर्भरता व्यक्त करने के लिए ईश्वर के नाम से शुरू करते हैं और हर बार खाते, पीते, पत्र लिखते, या कोई महत्वपूर्ण कार्य करते समय खुद को दिव्य दया की याद दिलाते हैं। सांसारिकता में आध्यात्मिकता खिलती है। प्रत्येक सांसारिक कार्य की शुरुआत में ये पढ़ना उस कार्य को महत्वपूर्ण बनाता है, उस कार्य पर दैवीय आशीर्वाद दिलाता है और उसे पवित्र करता है। यह हस्तलिपियों और स्थापत्य अलंकरण में सजावट का एक लोकप्रिय रूप है।

"ईश्वर के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील और दयावान् है।" एक डच कलाकार यूसेफ द्वारा लिखा हुआ।

दया करने के लिए ऐसा व्यक्ति चाहिए जिस पर दया की जाए। जिस पर दया की जाती है उसे दया की आवश्यकता होनी चाहिए। पूर्ण दया जरूरतमंदों के लिए है, जबकि असीम दया उन लोगों के लिए है जिन्हे इसकी जरूरत चाहे हो या न हो, जो इस दुनिया से मृत्यु के बाद के अद्भुत जीवन के लिए है।

इस्लामी सिद्धांत के अनुसार, मनुष्य प्रेमपूर्ण और दयालु ईश्वर के साथ एक व्यक्तिगत संबंध बनाता है, जो पापों को क्षमा करने और प्रार्थनाओं का जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहता है। ईश्वर मनुष्यों के दुख समझने के लिए इंसान नही बनता। बल्कि, ईश्वर की दया उसकी पवित्रता के अनुरूप एक गुण है, जो दैवीय सहायता और उपकार लाती है।

ईश्वर की दया विशाल है:

"कह दो: 'तुम्हारा पालनहार विशाल दयाकारी है ...।'" (क़ुरआन 6:147)

सभी के लिए:

"...परन्तु मेरी दया में सब कुछ समाया हुआ है..." (क़ुरआन 7:156)

सृष्टि स्वयं ईश्वरीय कृपा, दया और प्रेम की अभिव्यक्ति है। ईश्वर हमें अपने चारों ओर उसकी दया के प्रभावों को देखने के लिए कहता है:

"तो देखो ईश्वर की दया की निशानियों को, वह कैसे बेजान होने के बाद पृथ्वी को जीवन देता है! ..." (क़ुरआन 30:50)

ईश्वर दया करने वाले को पसंद करता है

ईश्वर दया को पसंद करता है। मुसलमान इस्लाम को दया का धर्म मानते हैं। उनके अनुसार, उनके पैगंबर पूरी मानवता के लिए ईश्वर की दया हैं:

"और (हे नबी!) हमने आपको भेजा है समस्त संसार के लिए दया बना कर।" (क़ुरआन 21:107)

वैसे ही जैसे वे यीशु (जीसस) को लोगों के लिए ईश्वर की दया मानते हैं:

"हम उसे लोगों के लिए एक निशानी बनायें अपनी विशेष दया से।" (क़ुरआन 19:21)

पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) की बेटियों में से एक ने उन्हें अपने बीमार बेटे की खबर दी। उन्होंने उसे याद दिलाया कि देने वाला और लेने वाला ईश्वर है, और हर किसी का एक नियत कार्यकाल होता है। उन्होंने उसे धैर्य रखने को कहा। जब उसके बेटे की मौत की खबर उनको मिली तो उनकी आंखों में करुणा के आंसू छलक पड़े। उनके साथी हैरान रह गए। दया के पैगंबर ने कहा:

"यह वह करुणा है जो ईश्वर ने अपने दासों के हृदयों में रखी है। अपने सभी दासों में से, ईश्वर केवल दयालु पर दया करते हैं।" (सहीह अल बुखारी)

सौभाग्यशाली हैं दया करने वाले लोग, क्योंकि उन पर दया की जाएगी, जैसा कि पैगंबर मुहम्मद ने कहा:

"ईश्वर उस पर दया नहीं करेगा जो लोगों के प्रति दयालु नहीं है।" (सहीह अल बुखारी)

उन्होंने यह भी कहा:

"परम दयालु दया करने वालों लोगों पर दया करता है। तुम पृथ्वी पर रहने वालों पर दया करो, और जो आसमान पर है, वह तुम पर दया करेगा।" (अत-तिर्मिज़ी)



फुटनोट:

[1] इसके विपरीत, 'दयालु' बाइबल में एक दिव्य नाम के रूप में नही है। (यहूदी विश्वकोश, 'ईश्वर के नाम,' पृष्ठ 163)

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