Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

あなたが要求した記事/ビデオはまだ存在していません。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

क्या हम अकेले हैं? (3 का भाग 1): जिन्न की दुनिया

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:
  • द्वारा Aisha Stacey (© 2011 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 14 Feb 2022
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 711 (दैनिक औसत: 3)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

पूरे इतिहास में मानवजाति अलौकिकता की ओर आकर्षित हुई है। आत्माओं, भूतों और कई अन्य अजीब जीवों ने हमारे दिमाग में जगह बना ली है और हमारी कल्पनाओं पर कब्जा कर लिया है। अजीब और भ्रामक दिखने वाले जीवों की वजह से कई बार लोग शिर्क [1] कर बैठते हैं जो पापों में सबसे बड़ा पाप है। तो क्या ये आत्माएं सच मे होती हैं? क्या ये हमारी कल्पना मात्र से अधिक हैं, या धुएं और भ्रम से बनी हुई छायाएं हैं? खैर, मुसलमानों के अनुसार ये सच मे होती हैं। आत्माएं, भूत, बंशी (आयरिश किंवदंती में एक महिला आत्मा), पोल्टरजिस्ट और प्रेत सभी को समझाया जा सकता है यदि कोई आत्माओं की इस्लामी अवधारणा - जिन्न की दुनिया - को समझ लेता है।

जिन्न, यह एक ऐसा शब्द है जो अंग्रेजी बोलने वालों के लिए पूरी तरह से अनसुना नही है। जिन्न और जिनी के बीच समानता पर ध्यान दें। टीवी और फिल्मों ने जिनी को मानवजाति की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाले चंचल प्राणी के रूप में दिखाया है। टेलीविजन श्रृंखला "आई ड्रीम ऑफ जिनी" में जिनी एक युवा महिला थी जो हमेशा चंचल शरारत करती थी, और डिज्नी की एनिमेटेड फिल्म "अलादीन" में जिनी को प्यारा काल्पनिक पात्र दिखाया गया था। इसके बावजूद जिन्न एक हानिरहित परी कथा का हिस्सा नहीं हैं; वे सच मे हैं और मानवजाति के लिए सच मे बहुत खतरा पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, ईश्वर जो सबसे बुद्धिमान है, उसने हमें असहाय नही छोड़ा है। ईश्वर ने जिन्न के स्वभाव को बहुत स्पष्ट रूप से समझाया है। हम जिन्नों के तरीकों और उद्देश्यों को जानते हैं क्योंकि ईश्वर ने क़ुरआन और पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) की परंपराओं में इसके बारे में बताया है। ईश्वर ने हमें अपनी रक्षा के लिए "हथियार" और उसके अनुनय का विरोध करने के लिए साधन दिए हैं। हालांकि, सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि वास्तव में जिन्न क्या हैं।

अरबी शब्द जिन्न, क्रिया 'जन्ना' से बना है और इसका अर्थ है छिपाना या गुप्त रखना। ये जिन्न इसलिए कहलाते हैं क्योंकि ये लोगों की नज़रों से खुद को छुपाते हैं। शब्द जनीन (भ्रूण) और मिजन (ढाल) एक ही मूल के हैं। [2]  जैसा कि नाम से पता चलता है, जिन्न आम तौर पर इंसानों के लिए अदृश्य होते हैं। जिन्न ईश्वर की रचना का हिस्सा हैं। ये आदम और मानवजाति के निर्माण से पहले आग से पैदा किये गए थे।

और हमने मनुष्य को सड़े हुए कीचड़ के सूखे गारे से बनाया। और उससे पहले जिन्नों को हमने अग्नि की ज्वाला से पैदा किया। (क़ुरआन 15:26-27)

पैगंबर मुहम्मद की परंपराओं के अनुसार स्वर्गदूतों को प्रकाश से, जिन्न को आग से और मानवजाति को "जैसा ऊपर बताया गया है" (अर्थात् मिट्टी) से पैदा किया गया था।[3]  ईश्वर ने स्वर्गदूतों, जिन्न और मानवजाति को सिर्फ अपनी पूजा करने के लिए पैदा किया है।

"मैंने जिन्नो और मनुष्यो को सिर्फ अपनी पूजा करने के लिए पैदा किया है।" (क़ुरआन 51:56)

जिन्न हमारी दुनिया में मौजूद हैं लेकिन वे हमसे अलग रहते हैं। जिन्नो की अपनी अलग प्रकृति और विशेषताएं हैं और वे आम तौर पर मानवजाति से छुप के रहते हैं। जिन्नो और मनुष्यों में कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिसमे सबसे महत्वपूर्ण है स्वतंत्र इच्छा और इसकी वजह से इनमें अच्छे और बुरे, सही और गलत को चुनने की क्षमता है। जिन्न खाते-पीते हैं, शादी करते हैं, बच्चे पैदा करते हैं और मर जाते हैं।

"और निश्चित रूप से हमने बहुत से जिन्न और मानव को नरक के लिए पैदा किया है। इनके पास दिल है, जिससे ये सोच-विचार नहीं करते, इनकी आंखे हैं जिससे देखते नही हैं और कान है जिससे सुनते नही है।" (क़ुरआन 7:179)

इस्लामी विद्वान इब्न अब्द अल-बर्र ने कहा कि जिन्नो के कई नाम हैं और ये कई प्रकार के होते हैं। सामान्य तौर पर इन सब को जिन्न कहा जाता है; एक जिन्न जो लोगों के बीच रहता है (एक शिकारी या निवासी) आमिर कहलाता है, और वो जिन्न जो खुद को एक बच्चे से जोड़ता है अरवाह कहलाता है। एक दुष्ट जिन्न जिसे अक्सर शैतान कहा जाता है, जब ये दुष्ट और राक्षसी से आगे बढ़ जाते हैं, तो इन्हें मारिद कहा जाता है, और सबसे दुष्ट और ताकतवर जिन्न को इफ़्रीत (बहुवचन अफ़ारीत) कहा जाता है। [4]  पैगंबर मुहम्मद की परंपराओं में जिन्न को तीन वर्गों में बांटा गया है; एक जिनके पंख हैं और वे हवा में उड़ते हैं, दूसरा जो सांप और कुत्तों के जैसे होते हैं, और तीसरा जो अंतहीन यात्रा करते हैं। [5]

जिन्न में ऐसे भी होते हैं जो ईश्वर और ईश्वर के सभी पैगंबरो के संदेश पर विश्वास करते हैं और ऐसे भी हैं जो नहीं करते हैं। ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने बुरे कर्मों को छोड़ दिया और सच्चे विश्वासी, आस्था वाले और धैर्यवान बन गए।

"(ऐ मुहम्मद) कह दो: यह मुझे बताया गया है कि जिन्न के एक समूह ने सुना और कहा; 'वास्तव में हमने एक अद्भुत क़ुरआन सुना है। यह दिखाता है सीधी राह इसलिए हमने इस पर विश्वास किया, और हम अपने ईश्वर के साथ कभी किसी को भागीदार नहीं बनाएंगे।” (क़ुरआन 72:1-2)

जिन्न ईश्वर के प्रति जवाबदेह हैं और उनकी आज्ञाओं और निषेधों के अधीन हैं। उनसे हिसाब लिया जाएगा और या तो वे स्वर्ग या नर्क में डाले जायेंगे। फिर से जिंदा होने वाले दिन मानवजाति के साथ जिन्न भी मौजूद होंगे और ईश्वर उन दोनों को संबोधित करेगा।

"हे जिन्नों तथा मनुष्यों के समुदाय! क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से ऐसे पैगंबर नहीं आये जो तुम्हें मेरी छंद सुनाते और तुम्हें इस दिन से सावधान करते? वे कहेंगेः हम स्वयं अपने ही विरुध्द गवाह हैं।” (क़ुरआन 6:130)

अब तक हमने सीखा है कि अलौकिक प्राणी होते हैं। हम अकेले नहीं हैं। वे ऐसे जीव हैं जो हमारे साथ रहते हैं, फिर भी हमसे अलग हैं। उनका अस्तित्व कई अजीब और परेशान करने वाली घटनाओं का स्पष्टीकरण है। हम जानते हैं कि जिन्न अच्छे और बुरे दोनों होते हैं, हालांकि शरारत करने वालो और बुरे काम करने वालो की संख्या विश्वास करने वालो से कहीं ज्यादा हैं।

शैतान एक आसमान से गिरे हुए देवदूत हैं, ये अवधारणा ईसाई धर्म के सिद्धांतों से है, लेकिन इस्लाम के अनुसार शैतान एक जिन्न है, न कि एक देवदूत। ईश्वर ने क़ुरआन में शैतान के बारे में बहुत कुछ बताया है। भाग दो में हम शैतान के बारे में और अधिक चर्चा करेंगे कि किस तरह उसे ईश्वर की दया से बाहर कर दिया गया।



फुटनोट:

[1] शिर्क - मूर्तिपूजा या बहुदेववाद का पाप है। इस्लाम सिखाता है कि ईश्वर एक है, अकेला है, बिना किसी साथी, संतान या मध्यस्थ के।

[2] इब्न अकील आकम अल मिरजान फी अहकाम अल जान। पृष्ठ 7

[3] सहीह मुस्लिम

[4] आकम अल जान, 8.

[5] अत तबरानी, अल हकीम और अल-बेहाकी

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

इसी श्रेणी के अन्य लेख

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version