Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

您所请求的文章/视频尚不存在。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

あなたが要求した記事/ビデオはまだ存在していません。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

Статьи / видео вы запросили еще не существует.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

您所请求的文章/视频尚不存在。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

इस्लाम उदासी और चिंता से कैसे निपटता है (4 का भाग 1): मानवीय स्थिति

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: वास्तव में ईश्वर की याद से दिलों को आराम मिलता है (क़ुरआन 13:28)

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2010 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1586 (दैनिक औसत: 4)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

विकसित दुनिया में औसत इंसान हर दिन उदासी और चिंता से जूझता है। जहां दुनिया की अधिकांश आबादी अत्यधिक गरीबी, अकाल, संघर्ष और निराशा का सामना करती है, वहीं हममें से जिनका जीवन अपेक्षाकृत आसान है, उन्हें भय, तनाव और चिंता सताती है। हममें से जिनके पास उनकी तुलना में कहीं अधिक धन-दौलत है, क्यों अकेलेपन और हताशा में डूबे हुए हैं? हम भ्रम में जीते हैं, जितना हो सके प्रयास करते हैं फिर भी भौतिक संपत्ति इकट्ठा करने से टूटे हुए दिलों और बिखरी हुई आत्माओं को ठीक नहीं कर सकते हैं।

मानवजाति के पुरे इतिहास की तुलना में इस समय तनाव, चिंता और मनोवैज्ञानिक समस्याएं मानवीय स्थिति पर भारी पड़ रही हैं। हालांकि धार्मिक विश्वासों में आराम की भावना होनी चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि 21वीं सदी के मनुष्य ने ईश्वर से जुड़ने की क्षमता खो दी है। जीवन के अर्थ पर विचार करने से अब परित्याग की भावना नहीं आती। भौतिक संपत्ति प्राप्त करने की यह इच्छा हमारी परेशान आत्माओं को शांत करने वाला बाम बन गई है। ऐसा क्यों है?

हमारे पास बेहतर से बेहतर चीज़ें है जो आसानी से उपलब्ध है, फिर भी वास्तविकता यह है कि हमारे पास कुछ भी नहीं है। आत्मा को सुकून देने वाली कोई चीज नहीं। अंधेरी रात में खूबसूरत साज-सज्जा का समान हमारा हाथ नहीं पकड़ सकते। मनोरंजन के नवीनतम केंद्र हमारे आंसुओं को नहीं पोंछ सकते या हमारे दुख को शांत नहीं कर सकते। हममें से जो दर्द और दुख के साथ जी रहे हैं या कठिनाई मे हैं, वे खुद को अकेला महसूस करते हैं। हम खुद को खुले समुद्र में बिना पतवार के महसूस करते हैं। हमें डर लगा रहता कि विशाल लहरें कभी भी हमें घेर लेगी। हमारी इच्छाएं और ऋण हमारे ऊपर होते हैं और महान प्रतिशोधी स्वर्गदूतों की तरह हमारे ऊपर मंडराते रहते हैं, और हम बुरी आदतों और खुद के नुकसान में आराम तलाश करते हैं।

हम इन गहरे गड्ढो से कैसे दूर जा सकते हैं? इस्लाम में इसका उत्तर बहुत ही सरल है। हम ईश्वर की ओर मुड़ते हैं। ईश्वर जानता है कि उसकी रचना के लिए सबसे अच्छा क्या है। उन्हें मनुष्य के मन की स्थिति का पूरा ज्ञान है। वह हमारे दर्द, निराशा और दुख को जानता है। ईश्वर वह है जिसे हम अंधेरे में ढूंढते हैं। जब हम ईश्वर को अपनी जिंदगी में वापस शामिल करेंगे, तो दर्द कम हो जाएगा।

वास्तव में ईश्वर की याद से दिलों को आराम मिलता है। (क़ुरआन 13:28)

इस्लाम खाली रीति-रिवाजों और अति-आलोचनात्मक नियमों से भरा धर्म नहीं है, हालांकि ऐसा लग सकता है यदि हम ये भूल जाएं कि जीवन में हमारा वास्तविक उद्देश्य क्या है। हम ईश्वर की पूजा करने के लिए बनाए गए थे, इसके अलावा कुछ नही। हालांकि ईश्वर ने अपनी असीम दया और ज्ञान में हमें परीक्षाओं और समस्याओं से भरी इस दुनिया में ऐसे ही नहीं छोड़ दिया। उसने हमें हथियारों से लैस (सज्जित) किया। ये हथियार 21वीं सदी की महान सेनाओं के हथियारो से भी अधिक शक्तिशाली हैं। ईश्वर ने हमें क़ुरआन, और अपने पैगंबर मुहम्मद की प्रामाणिक परंपराएं दीं।

क़ुरआन मार्गदर्शन की एक पुस्तक है और पैगंबर मुहम्मद की परंपराएं उस मार्गदर्शन की व्याख्या करती हैं। इस्लाम का धर्म ईश्वर के साथ संबंध बनाने और बनाये रखने के बारे में है। इस तरह से इस्लाम उदासी और चिंता से निपटता है। जब लहर आ के नुकसान करने वाली होती है या दुनिया नियंत्रण से बाहर होने लगती है तो ईश्वर ही एक स्थिर कारक होता है। एक आस्तिक सबसे बड़ी गलती यह कर सकता है कि वो अपने जीवन के धार्मिक और भौतिक पहलुओं को अलग कर दे।

"ईश्वर ने उन लोगों से वादा किया है जो ईश्वर के एक होने में विश्वास करते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, कि उनके लिए क्षमा है और एक बड़ा इनाम (यानी स्वर्ग) है।" (क़ुरआन 5:9)

जब हम पूर्ण समर्पण के साथ स्वीकार करते हैं कि हम ईश्वर के दासों से अधिक कुछ नहीं हैं, जिन्हें इस पृथ्वी पर भेजा गया है आज़माइश और परीक्षा के लिए, अचानक से हमारे जीवन को एक नया अर्थ मिल जाता है। हम मानते हैं कि ईश्वर ही हमारे जीवन में स्थिर है और हम मानते हैं कि उसका वादा सच है। जब हमें चिंता और उदासी घेर लेती है, तो ईश्वर की ओर जाने से राहत मिलती है। यदि हम उनके मार्गदर्शन के अनुसार अपना जीवन जीते हैं तो हमें किसी भी निराशा को दूर करने के लिए साधन और क्षमता मिलती है। पैगंबर मुहम्मद ने घोषणा की कि एक आस्तिक के सभी मामले अच्छे हैं।

"वास्तव में एक विश्वास करने वाले की बातें आश्चर्यजनक हैं! वे सभी उसके फायदे के लिए हैं। अगर उसे जीवन में आसानी दी जाती है तो वह आभारी होता है, और यह उसके लिए अच्छा है। और यदि उसे कष्ट दिया जाता है, तो वह दृढ़ रहता है, और यह उसके लिए अच्छा है।"[1]

मानवजाति की सभी समस्यायें जो कष्ट देती है, इस्लाम में उनका समाधान है। यह हमें खुद की संतुष्टि और संपत्ति प्राप्त करने की आवश्यकता से परे देखने के लिए कहता है। इस्लाम हमें याद दिलाता है कि यह जीवन हमेशा के जीवन के रास्ते पर एक क्षणिक विराम है। इस दुनिया का जीवन कुछ समय का है, जो कभी-कभी बहुत खुशी और आनंद के क्षणों से भरा होता है, लेकिन कभी-कभी दुख, उदासी और निराशा से भरा होता है। यही जीवन का स्वभाव है, और यही मानवीय स्थिति है।

इसके बाद के तीन लेखों में हम क़ुरआन के मार्गदर्शन और पैगंबर मुहम्मद की प्रामाणिक परंपराओं के बारे में बताएंगे और देखेंगे की इस्लाम उदासी और चिंता से निपटने के लिए क्या सुझाव देता है। इसमें तीन प्रमुख बिंदु हैं जो आस्तिक को 21वीं सदी के जीवन की परेशानिओं से बचने में सक्षम बनाएंगे। ये है धैर्य, कृतज्ञता और ईश्वर में विश्वास। अरबी भाषा में सब्र, शुक्र और तव्वाकुल।

"और निश्चय ही हम भय, भूख, धन, जीवन और फलों की हानि के जरिये तुम्हारी परीक्षा लेंगे, परन्तु धैर्य रखने वालों को इनाम देंगे।" (क़ुरआन 2:155)

"इसलिए तुम मुझे (ईश्वर) याद रखो और मैं तुम्हें याद रखूंगा, और मेरे प्रति आभारी रहो (मेरे अनगिनत एहसानों के लिए) और कभी भी नाशुक्री न करो।" (क़ुरआन 2:152)

“यदि ईश्वर आपकी सहायता करता है तो कोई भी आपको हरा नहीं सकता; और यदि वह तुम्हे छोड़ दे, तो उसके बाद कोई नहीं है जो तुम्हारी सहायता करेगा, और विश्वाश करने वालो ईश्वर पर भरोसा रखो।” (क़ुरआन 3:160)



फुटनोट:

[1] सहीह मुस्लिम

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

इसी श्रेणी के अन्य लेख

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version