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ईश्वर कहां है?

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विवरण: सर्वशक्तिमान ईश्वर अपनी रचनाओं के ऊपर, आसमान के ऊपर है।

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2009 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 457 (दैनिक औसत: 2)
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मनुष्य बार-बार स्वयं से जीवन के कुछ सच्चे गहन प्रश्न पूछता है। जब रात के शांत अंधेरे में तारे दूर विशाल, आलीशान आकाश में टिमटिमाते हैं, या ठंड मे, दिन के उजाले में जब जीवन एक तेज रफ्तार ट्रेन की तरह भागती है, सभी रंगों, जातियों और पंथों के लोग सोचते हैं कि उनके अस्तित्व का अर्थ क्या है। हम यहां क्यों आए हैं? इन सबका क्या मतलब है? क्या बस इतना ही है?

धूप और इंद्रधनुषी नीले आसमान वाले शानदार दिनों में, लोग सूर्य की ओर देखते हैं और इसकी सुंदरता का चिंतन करते हैं। बहुत सर्दी या बेतहाशा तूफान में, वे प्रकृति की शक्तियों पर विचार करते हैं। कहीं न कहीं मन की गहराइयों में, ईश्वर की अवधारणा उत्पन्न होती है। सृष्टि के चमत्कार हृदय और आत्मा के लिए एक पुकार हैं। बर्फ के टुकड़े का कोमल स्पर्श, ताज़े कटे हुए लॉन की महक, बारिश की बूंदों की कोमल छींटे और तूफान की तेज़ हवा ये सब याद दिलाती है कि यह दुनिया अजूबों से भरी हुई है।

जब दर्द और उदासी हमें घेर लेती है, तो मनुष्य फिर से जीवन के अर्थ पर विचार करता है। शोक और दुख के समय ईश्वर की अवधारणा उत्पन्न होती है। यहां तक कि जो लोग खुद को धर्म या आध्यात्मिक विश्वास से दूर समझते हैं, वे भी आसमान की ओर देख के मदद की गुहार लगाते हैं। जब हृदय संकुचित हो जाता है और भय हम पर हावी हो जाता है, तो हम असहाय होकर किसी प्रकार की उच्च शक्ति की ओर देखते हैं। उस समय ईश्वर की अवधारणा वास्तविक और सार्थक लगती है।

विनती और सौदेबाजी के समय, ब्रह्मांड की विशालता को उजागर किया जाता है। जीवन की वास्तविकता विस्मय और आश्चर्य से भरी है। यह एक रोलरकोस्टर राइड है। इसमें बहुत खुशी के क्षण भी हैं, और अपार दुख के क्षण भी हैं। या तो जीवन लंबा और नीरस हो सकता है या लापरवाह हो सकता है। जैसे-जैसे ईश्वर के बारे में जानते हैं और उसकी महिमा समझते हैं, वैसे-वैसे मन मे और प्रश्न आने लगते हैं। एक प्रश्न जो मन में अनिवार्य रूप से आता है कि ईश्वर कहां है?

पूरी दुनिया में सदियों से लोगों ने इस सवाल को समझने के लिए संघर्ष किया है कि ईश्वर कहां हैं। मनुष्य की प्रवृत्ति ईश्वर को खोजने की होती है। प्राचीन बेबीलोनियों और मिस्रवासियों ने ईश्वर की खोज में ऊँचे-ऊँचे स्तम्भों का निर्माण किया। फारसियों ने आग में ईश्वर की तलाश की। कई लोग, जैसे उत्तरी अमेरिका के स्थानीय लोग और सेल्टिक लोग अभी भी अपने चारों ओर प्रकृति के शानदार संकेतों में ईश्वर की तलाश करते हैं। बौद्ध अपने आप में ईश्वर को खोजते हैं, और हिंदू धर्म के अनुसार ईश्वर हर जगह और हर चीज में है।

ईश्वर की खोज भ्रमित करने वाली हो सकती है। ईश्वर कहां है, इस प्रश्न का उत्तर भी भ्रमित करने वाले हो सकता है। ईश्वर हर जगह है। ईश्वर आपके दिल में है। ईश्वर वहां है जहां अच्छाई और सुंदरता मौजूद है। लेकिन जब आपका दिल खाली होता है और आपका परिवेश निराशाजनक, गंदा और बेढब होता है, तो क्या ईश्वर वहां नही रहता है? नहीं! ऐसा बिलकुल नही है! इस भ्रम के बीच, ईश्वर की इस्लामी अवधारणा अंधेरे में ठोकर खाने वालों के लिए प्रकाश की किरण है।

ईश्वर के बारे में मुसलमान जो विश्वास रखते हैं वह स्पष्ट और सरल है। वे यह नहीं मानते कि ईश्वर हर जगह है; वे मानते हैं कि ईश्वर आसमान के ऊपर है। मुसीबत और संघर्ष के समय में मनुष्यों का आकाश की ओर देखना इस प्रश्न का एक अंतर्निहित उत्तर है कि ईश्वर कहां है? ईश्वर हमें क़ुरआन में बताता है कि वह सर्वोच्च है (क़ुरआन 2:255) और वह अपनी सारी रचनाओं से ऊपर है।

"उसीने उत्पन्न किया है आकाशों तथा धरती को छः दिनों में, फिर स्थित हो गया अर्श (सिंहासन) पर। वह जानता है उसे, जो प्रवेश करता है धरती में, जो निकलता है उससे, जो उतरता है आकाश से तथा चढ़ता है उसमें और वह तुम्हारे साथ है जहां भी तुम रहो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसे ईश्वर देख रहा है।" (क़ुरआन 57:4)

पैगंबर मुहम्मद ईश्वर की बात करते समय आकाश की ओर इशारा करते थे। ईश्वर से प्रार्थना करते समय वो अपने हांथो को आकाश की ओर उठाते थे। अपने विदाई उपदेश के दौरान, पैगंबर मुहम्मद ने लोगों से पूछा, "क्या मैंने संदेश दे दिया है?" और लोगों ने कहा, “हां!” उन्होंने फिर पूछा, "क्या मैंने संदेश दे दिया है?" और लोगों ने कहा, “हां!” उन्होंने तीसरी बार पूछा, "क्या मैंने संदेश दे दिया है?" और लोगों ने कहा "हां!" उन्होंने हर बार आकाश और फिर लोगों की ओर इशारा करते हुए कहा, "हे ईश्वर, तू गवाह है!"[1]

ईश्वर अपनी रचनाओं के ऊपर, आसमान के ऊपर है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी भी प्रकार के भौतिक आयामों में सिमित है। ईश्वर उन लोगों के बहुत करीब है जो उस पर विश्वास करते हैं और वह उनकी हर पुकार का उत्तर देता है। ईश्वर हमारे सभी रहस्यों, सपनों और इच्छाओं को जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है। ईश्वर अपने ज्ञान और शक्ति से अपनी रचनाओं के साथ है। ईश्वर सृष्टिकर्ता और पालनकर्ता है। उसकी इच्छा के बिना कुछ भी नही हो सकता है।

जब मुसलमान ब्रह्मांड के चमत्कारों पर आश्चर्य करते हैं तो वे जानते हैं कि सर्वोच्च ईश्वर आसमान के ऊपर है, और ये तथ्य उन्हें दिलासा देता है कि ईश्वर उनके सभी मामलों में उनके साथ है। जब किसी मुसलमान को नुकसान या शोक होता है, तो वह ईश्वर की समझदारी पर सवाल नहीं उठाता है, या यह सवाल नहीं पूछता है कि, 'जब मैं दुखी था, या शोक या पीड़ा में था, तो ईश्वर कहां था?' मनुष्यों को ईश्वर की पूजा करने के लिए पैदा किया गया था (क़ुरआन 51:56) और ईश्वर ने कई बार कहा है कि परीक्षा और समस्या हमारे जीवन का हिस्सा होंगे।

"और वही है जिसने छ: दिनों में आकाशों और पृथ्वी को बनाया है... कि वह तुम्हें परख सके, कि तुम में से कौन कर्मों में श्रेष्ठ है।" (क़ुरआन 11:7)

मनुष्य अपने सबसे कठिन और मुसिबत के समय मे स्वाभाविक रूप से आकाश की ओर देखता है। जब लोगों का दिल जोर से धड़कता है और उन्हें डर सताने लगता है, तो लोग ईश्वर की ओर देखते हैं। वे अपने हाथ उठाते हैं और दया, क्षमा और कृपा की भीख मांगते हैं, और ईश्वर उनका जवाब देता है क्‍योंकि वह अति दयालु, अति क्षमाशील और अति कृपालु है। ईश्वर अपनी सारी रचनाओं से विशिष्ट और अलग है, और उसके जैसा कुछ नहीं है। वह सब सुनने वाला और देखने वाला है (क़ुरआन 42:11) इसलिए जब हम यह प्रश्न पूछते हैं कि ईश्वर कहां है, तो निस्संदेह उत्तर है कि वह आसमान के ऊपर और अपनी रचनाओं के ऊपर है। हम यह भी कहते हैं कि उसे अपनी रचनाओं की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सारी रचनाओं को उसकी आवश्यकता है।



फुटनोट:

[1] विदाई उपदेश का पाठ सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम में और अत-तिर्मिज़ी और इमाम अहमद की किताबों मे है।

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