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बाइबल में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां (4 का भाग 1): विद्वानों की गवाही

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विवरण: बाइबल का सबूत कि मुहम्मद झूठे नबी नहीं है। भाग 1: बाइबिल की भविष्यवाणियों पर चर्चा करने में आने वाली कठिनाइयां, और कुछ विद्वानों के वृत्तांत जिन्होंने यह प्रमाणित किया कि मुहम्मद का वर्णन बाइबिल में किया गया है।

  • द्वारा Imam Mufti
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 17 Jul 2022
  • मुद्रित: 2
  • देखा गया: 1720 (दैनिक औसत: 6)
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शुरुआती दिक्कतें

बाइबल यहूदी और ईसाई धर्म का पवित्र धर्मग्रंथ है। इसाईओं की बाइबिल में पुराने टेस्टामेंट और नए टेस्टामेंट हैं, पुराना टेस्टामेंट रोमन कैथोलिक और पूर्वी रूढ़िवादी संस्करणों और कुछ किताबों की स्वीकृति के कारण प्रोटेस्टेंट द्वारा ग्रंथ के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है जिसकी वजह से यह थोड़ा बड़ा है। यहूदियों की बाइबल में केवल वे किताबे शामिल हैं जो ईसाइयों के पुराने टेस्टामेंट के रूप में जानी जाती हैं। इसके अलावा, यहूदी और ईसाई सिद्धांत काफी अलग अलग हैं।[1]  पैगंबर मुहम्मद की भविष्यवाणी पुराने टेस्टामेंट और नए टेस्टामेंट दोनों में की गई है।

माना जाता है कि यीशु और धर्मोपदेशक अरामी भाषा बोलते थे। लगभग 650 ई. तक अरामी भाषा बोली जाती रही, इसके बाद इसकी जगह अरबी भाषा ने ले ली।[2]  हालांकि आज की बाइबल अरामी हस्तलिपि पर आधारित नहीं है, बल्कि ग्रीक और लैटिन संस्करणों पर आधारित है।

बाइबल की भविष्यवाणियों का हवाला देते हुए यह जरूरी नहीं है कि मुसलमान वर्तमान बाइबल को पूरी तरह से ईश्वर की किताब के रूप में स्वीकार करें। पिछले धर्मग्रंथों पर मुसलमानो के यकीन के लिए, कृपया यहां क्लिक करें।

 किसी को पैगंबर मानने के लिए यह आवशयक नहीं है कि उनकी भविष्यवाणी पिछले पैगंबर ने की हो। मूसा फिरौन के लिए एक पैगंबर थे, उससे पहले किसी ने भी उनके पैगंबर होने की भविष्वाणी नहीं की थी। इब्राहीम नमरूद के लिए ईश्वर की तरफ से भेजे गए पैगंबर थे, लेकिन फिर भी किसी ने उनके आने की भविष्यवाणी नहीं की थी। नूह, लूत और अन्य भी ईश्वर के भेजे गए पैगंबर थे फिर भी उनकी भविष्यवाणी नहीं की गई थी। एक पैगंबर होने का सबूत केवल पुरानी भविष्यवाणियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके द्वारा लाया गया वास्तविक संदेश, चमत्कार और बहुत कुछ शामिल है।

भविष्यवाणियों पर चर्चा करना एक नाजुक मामला है। इसके लिए बाइबल के संस्करणों और अनुवादों को देखना, हाल ही में खोजी गई हस्तलिपियों और हिब्रू, ग्रीक और अरामी शब्दों को खोजना और उनको जांचने की आवश्यकता होती है। यह विशेष रूप से मुश्किल है क्योकि 15वीं शताब्दी से पहले प्रिंटिंग प्रेस नही थे इसलिए बाइबल की सभी प्रतियों में भिन्नताएँ हैं।[3]  यह आम लोगों के लिए आसान विषय नहीं है। इसलिए सबसे अच्छी गवाही उस जगह के प्राचीन और आधुनिक विशेषज्ञों से मिलती है जिन्होंने भविष्यवाणियों को स्वीकार किया था।

हमारे पास शुरुआती यहूदि और ईसाइ भिक्षुओं और रब्बियों के रिकॉर्ड हैं जिन्होंने देखा कि पैगंबर मुहम्मद बिलकुल वैसे थे जैसा बाइबल में विशेष भविष्यवाणी की गई थी। इन लोगों के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं।

आने वाले पैगंबर

इस्लाम से पहले के यहूदी और अरब के ईसाई एक पैगंबर के आने का इंतजार कर रहे थे। पैगंबर मुहम्मद के आने से पहले अरब में यहूदी, ईसाई और अरब के मूर्तिपूजक रहते थे, जो कभी-कभी आपस में ही लड़ते रहते थे। यहूदी और ईसाई कहते थे: "एक पैगंबर के आने का समय आ गया है जो इब्राहिम के धर्म को आगे बढ़ाएगा। हम उसके साथ शामिल हो जायेंगे और तुम्हारे खिलाफ भयंकर युद्ध करेगें।" जब पैगंबर मुहम्मद वास्तव में आये तो उनमें से कुछ ने उन पर विश्वास किया और कुछ ने इनकार कर दिया। इसलिए ईश्वर ने ये छंद उतारा:

“और अब जो एक किताब ईश्वर की तरफ से उनके पास आई है, उसके साथ उनका क्या बर्ताव है? इसके बावजूद कि उसके आने से पहले वो खुद कुफ़्र करनेवालों के मुकाबले में जीत और मदद की दुआएं मांगा करते थे। मगर अब वो चीज़ आ गई है और वो उसे पहचान भी गए हैं, फिर भी उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया है। तो अब ईश्वर की लानत इन इनकार करने वालों पर है।“ (क़ुरआन 2:89)

पहला गवाह एक ईसाई भिक्षु बुहैरा थे, जब पैगंबर मुहम्मद छोटे थे तभी उन्होंने उनके पैगंबर होने को पहचाना और अपने चाचा से कहा:

"...आपके भतीजे की किस्मत बहुत बड़ी है, इसलिए उसे जल्दी से घर ले जाओ।"[4]

 

 

दूसरे गवाह एक ईसाई विद्वान वरकाह इब्न नौफल थे, जो मुहम्मद से एक बार मिलने के तुरंत बाद मर गए। वरकाह ने प्रमाणित किया कि मुहम्मद अपने समय के पैगंबर थे और उन्होंने बिल्कुल मूसा और यीशु की तरह ही इल्म हासिल किया था।[5]

मदीना के यहूदी किसी पैगंबर के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। तीसरे और चौथे गवाह उनके दो प्रसिद्ध यहूदी रब्बी, अब्दुल्ला इब्न सलाम और मुखैरिक थे।[6]

छठे और सातवें गवाह भी यमनी यहूदी रब्बी, वहब इब्न मुनाबिह और काब अल-अहबर (डी. 656 सीई) थे। काब ने बाइबल में मूसा द्वारा आने वाले पैगंबर की भविष्यवाणी और तारीफ के लंबे अंश पाए।[7]

क़ुरआन कहता है:

"क्या इन (मक्कावालों) के लिये ये निशानी नहीं है कि इसे बनी-इस्राईल के आलिम जानते हैं।" (क़ुरआन 26:197)



फुटनोट:

[1] "बाइबल" एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रीमियम सर्विस से एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका। (http://www.britannica.com/eb/article-9079096)

[2] "अरामी लैंग्वेज" एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रीमियम सर्विस से एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका। (http://www.britannica.com/eb/article-9009190)

[3] "बिब्लिकल लिटरेचर" एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका प्रीमियम सर्विस से एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका। (http://www.britannica.com/eb/article-73396)

[4] मार्टिन लिंग्स द्वारा लिखित "मुहम्मद: हिस लाइफ बेसिड ऑन थ अर्लियेस्ट सोर्सेज", पृष्ट 29। इब्न इशाक द्वारा लिखित और ए. गुइल्लाम द्वारा अनुवादित "सिरत रसूल अल्लाह", पृष्ट 79-81। अजहर विश्वविद्यालय के डॉ मुहम्मद अबू लैलाह द्वारा लिखित "क़ुरआन एंड दी गोस्पेल्स: एक तुलनात्मक अध्ययन," पृष्ट 46

[5] मार्टिन लिंग्स द्वारा लिखित "मुहम्मद: हिस लाइफ बेसिड ऑन थ अर्लियेस्ट सोर्सेज", पृष्ट 35

[6] अजहर विश्वविद्यालय के डॉ मुहम्मद अबू लैलाह द्वारा लिखित "क़ुरआन एंड दी गोस्पेल्स: ए कम्पेरेटिव स्टडी," पृष्ट 47

[7] अजहर विश्वविद्यालय के डॉ मुहम्मद अबू लैलाह द्वारा लिखित "क़ुरआन एंड दी गोस्पेल्स: ए कम्पेरेटिव स्टडी," पृष्ट 47-48

 

 

बाइबल में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां (4 का भाग 2): पुराने टेस्टामेंट में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां

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विवरण: बाइबल के सबूत कि मुहम्मद झूठे पैगंबर नहीं है। भाग 2: व्यवस्थाविवरण 18:18 में वर्णित भविष्यवाणी पर एक चर्चा, और पैगंबर मुहम्मद इस भविष्यवाणी में दूसरों की तुलना में कैसे अधिक फिट बैठते हैं।

  • द्वारा Imam Mufti
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व्यवस्थाविवरण 18:18 "मैं (ईश्वर) उनके लिए उन्हीं के बीच से तेरे (मूसा) जैसा एक पैगंबर खड़ा करूंगा और उसे अपने आदेश बताया करूंगा, और वह जाकर उन्हें वो सारी बातें बताएगा जो मै बताने के लिए कहूंगा।"

कई ईसाई मानते हैं कि मूसा की ये भविष्यवाणी यीशु के लिए थी। वास्तव में यीशु की भविष्यवाणी पुराने टेस्टामेंट में की गई थी, लेकिन यह स्पष्ट होगा कि यह भविष्यवाणी उनके लिए फिट नहीं होती है, बल्कि मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) के लिए ज्यादा फिट होती है। मूसा ने निम्नलिखित भविष्यवाणी की:

1.       पैगंबर मूसा की तरह होंगे

.

तुलना के क्षेत्र

मूसा

यीशु

मुहम्मद

जन्म

सामान्य जन्म

चमत्कारी, कुंवारी माँ से जन्म

सामान्य जन्म

मिशन

सिर्फ पैगंबर

ईश्वर का बेटा माना जाता था

सिर्फ पैगंबर

माँ-बाप

बाप और माँ

सिर्फ माँ

बाप और माँ

पारिवारिक जीवन

शादी हुई थी, बच्चे थे

कभी शादी नहीं हुई

शादी हुई थी, बच्चे थे

अपने लोगों द्वारा स्वीकारना

यहूदियों ने उन्हें स्वीकार किया

यहूदियों ने उन्हें अस्वीकार किया [1]

अरब के लोगों ने उन्हें स्वीकार किया

राजनीतिक अधिकार

मूसा के पास था (नंबर 15:36)

यीशु ने इसे अस्वीकार किया[2]

मुहम्मद के पास था

विरोधियों पर विजय

फिरौन डूब गया

कहा जाता है कि क्रूस पर चढ़ाया गया

मक्का वाले पराजित हुए

मौत

प्राकृतिक मौत

सूली पर चढ़ाए जाने का दावा किया गया

प्राकृतिक मौत

दफन

कब्र में दफनाया गया

खाली मकबरा

कब्र में दफनाया गया

दिव्यता

दिव्य नहीं

ईसाइयों के लिए दिव्य

दिव्य नहीं

मिशन शुरू करने की उम्र

40

30

40

पृथ्वी पर फिर से जिन्दा होना

पृथ्वी पर फिर से जिन्दा नहीं होंगे

फिर से जिन्दा होने का दावा किया गया

पृथ्वी पर फिर से जिन्दा नहीं होंगे

 

 2.       आने वाला पैगंबर यहूदियों के भाइयों  में से होगा

यह छंद स्पष्ट रूप से कहता है कि पैगंबर यहूदियों के भाइयों में से होंगे। इब्राहीम के दो बेटे थे: इश्माएल और इसहाक। यहूदी इसहाक के पुत्र याकूब के वंशज हैं। अरब वाले इश्माएल की संताने हैं। इस प्रकार अरब वासी यहूदी के भाई हैं।[3] बाइबल पुष्टि करता है:

‘और वह (इश्माएल) अपने सब भाइयों के सामने बसेरा करेगा।' (उत्पत्ति 16:12)

‘और वह (इश्माएल) अपने सभी भाइयों के सामने मर गया।' (उत्पत्ति 25:18)

इसहाक की संताने इश्माएलियों के भाई हैं। इसी तरह मुहम्मद इस्राएलियों के भाइयों में से हैं, क्योंकि वह इब्राहीम के पुत्र इश्माएल के वंशज थे।

 

3.       ईश्वर अपने आदेशों को आने वाले पैगंबर को बताएगा।

क़ुरआन मुहम्मद के बारे में कहता है:

"और वह नहीं बोलते अपनी इच्छा से, वह तो बस वह़्यी (प्रकाशना) है जो (उनकी ओर) की जाती है। " (क़ुरआन 53:3-4)

यह व्यवस्थाविवरण 18:18 के छंद से काफी मेल खाता है:

"मैं उनके लिए उन्हीं के बीच से तेरे जैसा एक पैगंबर खड़ा करूंगा और उसे अपने आदेश बताया करूंगा, और वह जाकर उन्हें वो सारी बातें बताएगा जो मै बताने के लिए कहूंगा।“ (व्यवस्थाविवरण 18:18)

पैगंबर मुहम्मद पूरी दुनिया और उनके जरिये यहूदियों के लिए एक संदेश लेकर आए थे। यहूदियों के साथ-साथ सभी को उनके पैगंबर होने को मानना चाहिए, और नीचे दिए गए शब्द इसका समर्थन करते है:

"तुम्हारा ईश्वर यहोवा तुम्हारे भाइयों के बीच में से तुम्हारे लिए मेरे जैसा एक पैगंबर खड़ा करेगा। तुम उसकी बात सुनना।" (व्यवस्थाविवरण 18:15)

 

4.       न मानने वालों के लिए चेतावनी

भविष्यवाणी जारी है:

व्यवस्थाविवरण 18:19: "अगर एक इंसान उस पैगंबर की बात नहीं सुनेगा जो मेरे नाम से बताएगा तो उस इंसान से मैं हिसाब लूंगा।" (कुछ अनुवादों में: "मैं बदला लूंगा")।

दिलचस्प बात यह है कि मुसलमान क़ुरआन के हर सूरह की शुरुआत में ईश्वर का नाम लेते हैं और कहते है:

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

"शुरू करता हूँ ईश्वर के नाम से जो बड़ा मेहरबान और बड़े रहम वाला है।"

निम्नलिखित कुछ विद्वानों के विवरण है जो इस भविष्यवाणी को मुहम्मद के लिए मानते थे।

पहला गवाह

अब्दुल-अहद दाऊद (पूर्व पादरी डेविड बेंजामिन केलदानी), बीडी, यूनीएट-कल्डियन संप्रदाय के एक रोमन कैथोलिक पादरी थे (उनकी जीवनी यहां पढ़ें).  इस्लाम स्वीकार करने के बाद उन्होंने एक किताब लिखी 'मुहम्मद इन द बाइबल'। वह इस भविष्यवाणी के बारे में लिखते हैं:

"यदि ये शब्द मुहम्मद के लिए नहीं हैं, तो ये शब्द अभी भी अधूरे हैं।" यीशु ने खुद के पैगंबर होने का दावा कभी भी नहीं किया था। यहां तक कि उनके शिष्य भी यही मानते थे: उन्होंने भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए यीशु के दूसरे जन्म को भी देखा था (प्रेरितों के काम 3: 17-24)। अभी तक यह निर्विवाद है कि यीशु का पहला जन्म 'आपके जैसा पैगंबर आएगा' से मेल नहीं खाता था और उनका दूसरा जन्म शायद ही इन शब्दों से मेल खाये। यीशु के चर्च द्वारा माना जाता है कि यीशु फिर से एक कानून बताने वाले के रूप में नहीं, बल्कि एक न्याय करने वाले के रूप में आएंगे; लेकिन वादा किया गया है कि आने वाला व्यक्ति अपने दाहिने हाथ में एक "उग्र कानून" ले के आएगा।"[4]

दूसरा गवाह

मुहम्मद असद का जन्म लियोपोल्ड वीस में जुलाई 1900 में ल्वोव (जर्मन लेम्बर्ग) शहर में हुआ था, जो उस समय ऑस्ट्रियाई साम्राज्य का हिस्सा था और अब पोलैंड में है। वह रब्बियों का वंशज में से थे जिसको उसके पिता ने तोड़ा था और एक बैरिस्टर बन गए थे। असद ने खुद पूरी तरह से धार्मिक शिक्षा प्राप्त की थी जो उन्हें परिवार की रब्बी परंपरा को बनाये रखने के काबिल बनाती थी। वह कम उम्र में ही हिब्रू में पारंगत हो गया थे और अरामी भाषा से भी परिचित थे। उन्होंने वास्तविक पुराने टेस्टामेंट को पढ़ा था और साथ ही तल्मूड, मिश्ना और गेमारा के पाठ और टिप्पणियों को भी पढ़ा था, और उन्होंने बाइबल व्याख्या को पेचीदगियों में तल्लीन किया था, टारगम।[5]

क़ुरआन के इस छंद पर टिप्पणी करते हुए:

"झूठ का रंग चढ़ाकर हक़ के बारे में शक न पैदा करो और न जानबूझकर हक़ को छिपाने की कोशिश करो।" (क़ुरआन 2:42)

मुहम्मद असद लिखते हैं:

"सत्य को असत्य से ढकने" का अर्थ बाइबल के पाठ को ख़राब करना है, क़ुरआन जिसका आरोप अक्सर यहूदियों पर लगाता है (और जो तब से आलोचना का विषय बन गया है), जबकि 'सत्य को छुपाना' का मतलब बाइबिल के वाक्य में मूसा के शब्दों को न मानना या जानबूझकर गलत व्याख्या करना है, 'तुम्हारा ईश्वर यहोवा तुम्हारे भाइयों के बीच में से तुम्हारे लिए मेरे जैसा एक पैगंबर खड़ा करेगा। तुम उसकी बात सुनना।' (व्यवस्थाविवरण 18:15), और ये वचन जो खुद ईश्वर ने दिए हैं, 'मैं उनके लिए उन्हीं के बीच से तेरे जैसा एक पैगंबर खड़ा करूंगा और उसे अपने आदेश बताया करूंगा।' (व्यवस्थाविवरण 18:18)। इज़राइल के लोगों के भाई स्पष्ट रूप से अरब के लोग हैं, और विशेष रूप से उनके बीच मुस्तरिबा ('अरेबियन') समूह, जो इश्माएल और अब्राहम के वंश है: और चूंकि यह समूह अरब के पैगंबर के अपने वंश कुरैश का था, ऊपर दिए गए बाइबिल के वाक्य को उनके आने के के संदर्भ में लिया जाना चाहिए।"[6]



फुटनोट:

[1] "वह (यीशु) अपनों के पास आया, लेकिन उसके अपनों ने उसे स्वीकार नहीं किया" (यूहन्ना 1:11)

[2] यूहन्ना 18:36.

[3] मार्टिन लिंग्स द्वारा लिखित 'मुहम्मद: प्रारंभिक स्रोतों पर आधारित उनका जीवन', पृष्ट 1-7

[4] इबिड, पृष्ट 156

[5] सऊदी अरामको पत्रिका के जनवरी/फरवरी 2002 के अंक में इस्माइल इब्राहिम नवाब द्वारा लिखित 'बर्लिन टू मक्का: इस्लाम में मुहम्मद असद का सफर'।

[6] मुहम्मद असद, 'क़ुरआन का संदेश' (जिब्राल्टर: दार अल-अंडालस, 1984), पृष्ट 10-11

 

 

बाइबल में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां (4 का भाग 3): नया नियम में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां

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विवरण: बाइबल के सबूत कि मुहम्मद झूठे पैगंबर नहीं है। भाग 3: पैराकलेट या "दिलासा देने वाला" के यूहन्ना 14:16 में वर्णित भविष्यवाणी पर एक चर्चा, और पैगंबर मुहम्मद इस भविष्यवाणी में दूसरों की तुलना में कैसे अधिक फिट बैठते हैं।

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  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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यूहन्ना 14:16 "और मैं पिता से प्रार्थना करूंगा, और वह तुम्हें एक और दिलासा देने वाला देगा, कि वह सदा तुम्हारे साथ रहे।" (अमेरिकी स्टैण्डर्ड वर्शन)

इस छंद में यीशु ने वादा किया है कि एक और "दिलासा देने वाला" आएगा, और इसलिए हमें इस "दिलासा देने वाला" के बारे में कुछ मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।

ग्रीक शब्द परवकोथोसिस, हो पराक्लेटोस, का अनुवाद 'दिलासा देने वाला' के रूप में किया गया है। पराक्लेटोस  का अधिक सटीक अर्थ है 'वह जो दूसरे की पैरवी करता है, एक हिमायती।'[1]  ग्रीक भाषा में हो पराक्लेटोस  का मतलब एक व्यक्ति है, कोई समूह नही। ग्रीक भाषा में प्रत्येक संज्ञा किसी लिंग को दर्शाता है; इसका मतलब है पुल्लिंग, स्त्रीलिंग या तटस्थ। यूहन्ना के सुसमाचार अध्याय 14, 15 और 16 में, हो पैराक्लेटोस  वास्तव में एक व्यक्ति है। ग्रीक में सभी सर्वनामों का मतलब लिंग से होना चाहिए जिसका वे उल्लेख करते हैं और सर्वनाम "हे" का प्रयोग पैराकलेटोस का जिक्र करते समय किया जाता है। नया नियम शब्द नूमा  का उपयोग करता है, जिसका अर्थ है "सांस" या "रूह", "आत्मा" के लिए हिब्रू शब्द पुराना नियम में इस्तेमाल होता है। नूमा  व्याकरणिक रूप से एक तटस्थ शब्द है और इसे हमेशा सर्वनाम "यह" द्वारा दर्शाया जाता है।

वर्तमान समय की सभी बाइबल का संग्रह "प्राचीन हस्तलिपि" से किया गया हैं, सबसे पुराना चौथी शताब्दी सी.ई. का है। कोई भी दो प्राचीन हस्तलिपियां एक जैसी नहीं हैं।[2]  आज बाइबल सभी हस्तलिपियों को मिलाकर तैयार की जाती हैं, इसका कोई एक निश्चित संदर्भ नहीं है। बाइबल के अनुवादक सही संस्करण को "चुनने" का प्रयास करते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, चूंकि वे नहीं जानते कि कौन सी "प्राचीन हस्तलिपि" सही है, वे हमारे लिए तय करते हैं कि किसी छंद के लिए कौन सा "संस्करण" सही है। एक उदाहरण के रूप में यूहन्ना 14:26 है। यूहन्ना 14:26 बाइबल का एकमात्र छंद है जो पैराकलेटोस  का मतलब पवित्र आत्मा बताती है। लेकिन "प्राचीन हस्तलिपि" इस बात से सहमत नहीं हैं कि "पैराक्लेटोस" का मतलब 'पवित्र आत्मा' है। उदाहरण के लिए, पांचवीं शताब्दी सी.ई. के आसपास लिखी गई प्रसिद्ध कोडेक्स सिरिएकस है जो 1812 में माउंट सिनाई पर मिली, इसके 14:26 में "पैराकेलेट, एक पवित्र आत्मा नहीं, बल्कि "पैराकेलेट, एक आत्मा" लिखा है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है? यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बाइबल की भाषा में "आत्मा" का सीधा मतलब है "एक पैगंबर।"

"हे प्रियों, हर एक रूह पर यकीन न करो, लेकिन रूहों को परखो कि क्या वे ईश्वर की तरफ से आई हैं या नहीं: क्योंकि बहुत से झूठे पैगंबर दुनिया में आएंगे।"[3]

यह जानना जरुरी है कि कई बाइबल विद्वानों ने पैराक्लेटोस को 'अकेला उद्धारकर्ता (बचाने की शक्ति रखने वाला) माना है, न कि पवित्र आत्मा।[4]

तब यह सवाल उठता है कि: क्या यीशु का पैराकलेटोस, दिलासा देने वाला, एक 'पवित्र आत्मा' या एक व्यक्ति - एक पैगंबर - उनके बाद आने वाला था? इस सवाल के जवाब के लिए, हमें हो पैराकलेटोस  के विवरण को समझना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या यह आत्मा के लिए है या इंसान के लिए है।

जब हम अध्याय 14:16 और अध्याय 16:7 से आगे पढ़ेंगे तो हमें पता चलेगा कि यीशु ने आने वाले की और पैराकलेटोस की विशेष पहचान बताई है। और यूहन्ना 14 और 16 के अनुसार, हमें निचे लिखे तथ्य पता चलते हैं।

1.      जीसस ने कहा कि पैराकलेटोस एक इंसान है:

यूहन्ना 16:13 "वह बोलने वाला होगा।"

यूहन्ना 16:7 "...क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह दिलासा देने वाला तुम्हारे पास न आएगा।"

यह नामुमकिन है कि दिलासा देने वाला "पवित्र आत्मा" हो क्योंकि पवित्र आत्मा यीशु से बहुत पहले और उनके दौरान भी मौजूद थी।[5]

यूहन्ना 16:13: यीशु ने पैराकलेट को सात बार 'वह' कहा है, न कि 'यह', बाइबल के किसी अन्य छंद में सात पुरुषवाचक सर्वनाम नहीं हैं। इसलिए पैराकलेट  एक व्यक्ति है, आत्मा नहीं।

2.     यीशु को पैराकलेटोस कहा जाता है:

"और यदि कोई गुनाह करता है तो पिता के पास हमारी पैरवी करने वाला (पैराकलेटोस) है, अर्थात् यीशु मसीह।" (1 यूहन्ना 2:1)

यहां हम देखते हैं कि पैराकलेटोस का मतलब पैरवी करने वाला एक इंसान है।

3.      यीशु की दिव्यता एक बाद का नवाचार

325 सी.ई. में नाइसिया की परिषद से पहले यीशु को पैगंबर नहीं माना गया था, लेकिन यहूदियों को छोड़कर हर कोई सहमत था कि वह ईश्वर के एक पैगंबर थे, जैसा कि बाइबल में बताया गया है:

मत्ती 21:11 "...यह गलील के नासरत का नबी यीशु है।"

लूका 24:19 "...यीशु नासरी के विषय में जो परमेश्वर और सब लोगों के निकट काम और वचन में सामर्थी पैगंबर था"

4.    यीशु ने एक और पराक्लेटोस के लिए ईश्वर से दुआ की थी:

यूहन्ना 14:16 "और मैं पिता से दुआ करूंगा, और वह तुम्हें एक और पराक्लेटोस देगा।"



फुटनोट:

[1] न्यू टेस्टामेंट शब्दों के लिए वाइन की एक्सपोजिटरी डिक्शनरी.

[2] "इस तरह के बड़े फर्क के अलावा, शायद ही कोई छंद है जिसके कुछ प्रतियों के [प्राचीन हस्तलिपियां जिन से बाइबिल बनाई गई है] वाक्यों में फर्क नहीं है। कोई भी यह नहीं कह सकता है कि इनमे जो कुछ जोड़ा गया है, छोड़ा गया है या संशोधन किया गया है सिर्फ लापरवाही की वजह से है।" डॉ. फ़्रेडरिक केन्योन द्वारा लिखित 'हमारी बाइबल और प्राचीन हस्तलिपियां, आइरे और स्पॉटिसवूड, पृष्ट 3

[3] 1 यूहन्ना 4: 1-3

[4] ‘...ईसाई परंपरा ने इस (पैराक्लेट) को पवित्र आत्मा के रूप में पहचाना है, लेकिन स्पिट्टा, डेलाफोस, विंडिश, सासे, बुल्टमैन और बेट्ज़ जैसे विद्वानों ने संदेह किया है कि क्या यह पहचान मूल तस्वीर के लिए सही है और उन्होंने बताया है कि कभी पैराकलेट का मतलब एक अकेला उद्धारकर्ता व्यक्ति था, बाद में इसे पवित्र आत्मा के साथ भ्रमित किया गया।" 'एंकर बाइबिल, डबलडे एंड कंपनी, इंक. गार्डन सिटी, एनवाई 1970, खंड 29ए, पृष्ट 1135

[5] जेनेसिस 1: 2, 1 शमूएल 10:10, 1 शमूएल 11:6, यशायाह 63:11, लूका 1:15, लूका 1:35, लूका 1:41, लूका 1:67, लूका 2:25, लूका 2:26, लूका 3:22, यूहन्ना 20:21-22

 

 

बाइबल में पैगंबर मुहम्मद के आने की भविष्यवाणियां (4 का भाग 4): नया नियम में पैगंबर मुहम्मद के आने की और अधिक भविष्यवाणियां

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विवरण: बाइबल के सबूत कि मुहम्मद झूठे पैगंबर नहीं है। भाग 4: पैराकलेट या "दिलासा देने वाला" के यूहन्ना 14:16 में वर्णित भविष्यवाणी पर एक और चर्चा, और पैगंबर मुहम्मद इस भविष्यवाणी में दूसरों की तुलना में कैसे अधिक योग्य होते हैं।

  • द्वारा Imam Mufti
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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5.      यीशु अन्य पैराकलेटोस के मकसद को बताते हैं:

यूहन्ना 16:13 "वह आपको सभी सच्चाई में मार्गदर्शन करेगा।"

मुहम्मद के बारे में ईश्वर क़ुरआन में कहता है:

"ऐ लोगों, ये रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से सच लेकर आया है। ईमान ले आओ, तुम्हारे लिये यही बेहतर है..." (क़ुरआन 4:170)

यूहन्ना 16:14 "वह मेरी प्रशंसा करेगा।"

पैगंबर मुहम्मद द्वारा लाया गया क़ुरआन यीशु की प्रशंसा करता है:

"...उसका नाम मसीह, मरियम का बेटा, ईसा होगा, दुनिया और आख़िरत में इज्ज़त वाला होगा, ईश्वर के करीबी बन्दों में से गिना जायेगा।" (क़ुरआन 3:45)

पैगंबर मुहम्मद ने भी यीशु की प्रशंसा की:

"जो कोई भी इस बात की गवाही देता है कि ईश्वर के सिवा कोई भी पूजने के लायक नहीं है, उसका कोई साथी नहीं है, और मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं, और यीशु ईश्वर के बंदे और पैगंबर हैं, और उसका वचन जो उसने मरियम को दिया था, और उसने एक रूह बनाई, और स्वर्ग और नर्क सच है, ईश्वर उसे उसके कर्मों के अनुसार स्वर्ग में डालेगा।" (सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम)

यूहन्ना 16:8 "वह दुनिया को उसके गुनाह, और ईश्वर के धर्म, और आनेवाले फैसले के दिन का यकीन दिलाएगा।"

क़ुरआन कहता है:

"यक़ीनन उन लोगों ने अविश्वास किया जिन्होंने कहा कि मरियम का बेटा मसीह ही ईश्वर है। हालांकि मसीह ने कहा था कि "ऐ बनी-इसराईल के लोगों ईश्वर की पूजा करो जो मेरा ईश्वर है और तुम्हारा भी।" जिसने ईश्वर के साथ किसी को शामिल किया उस पर ईश्वर ने स्वर्ग निषिद्ध कर दी और उसका ठिकाना नरक है और ऐसे अत्याचारों का कोई मददगार नही।" (क़ुरआन 5:72)

यूहन्ना 16:13 "वह अपनी तरफ से कुछ नहीं कहेगा, लेकिन वह जो कुछ सुनेगा वही कहेगा।"

पैगंबर मुहम्मद के बारे में क़ुरआन कहता है:

“और वह नहीं बोलते अपनी इच्छा से, ये तो एक "वही" है जो उस पर उतारी जाती है।“ (क़ुरआन 53:3-4)

यूहन्ना 14:26 "और मैंने जो कुछ तुम से कहा है, वो वही सब बातें तुम्हें याद दिलाएगा।"

कुरआन कहता है:

"…हालांकि मसीह ने कहा था कि "ऐ बनी-इसराईल के लोगों ईश्वर की पूजा करो जो मेरा ईश्वर है और तुम्हारा भी…" (क़ुरआन 5:72)

…लोगों को यीशु के पहले और सबसे बड़े आदेश की याद दिलाता है जिसे वे भूल गए हैं:

"सब आदेशो में से पहला यह है, 'ऐ इसराईल के लोगों सुनो, प्रभु हमारा ईश्वर एक ही प्रभु है।" (मरकुस 12:29)

यूहन्ना 16:13 "और वह तुम्हें बताएगा कि आगे क्या होने वाला है।"

क़ुरआन कहता है:

"ऐ नबी! ये ग़ैब की खबरों में से है जो हम तुम पर ज़ाहिर कर रहे हैं..." (क़ुरआन 12:102)

पैगंबर मुहम्मद के शिष्य हुदैफा हमें बताते हैं:

"नबी ने एक बार हम लोगों को आने वाले क़यामत के दिन तक क्या-क्या होगा सब कुछ बताया था।" (सहीह अल बुखारी)

यूहन्ना 14:16 "ताकि वह हमेशा तुम्हारे साथ रहे।"

...मतलब उनकी मूल शिक्षाएं हमेशा रहेंगी। मुहम्मद लोगों के लिए ईश्वर के आखिरी नबी थे।[1]  उनकी शिक्षाएं पूरी तरह से संरक्षित हैं। वह उनके मानने वालों के दिलों और दिमागों मे हैं जो उन्ही के अनुसार ईश्वर की पूजा करते हैं। यीशु या मुहम्मद सहित पृथ्वी पर किसी भी मनुष्य का जीवन अनन्त नहीं है। पैराकलेटोस  भी कोई अपवाद नहीं है। यह पवित्र आत्मा का एक संकेत नहीं हो सकता क्योंकि वर्तमान समय में पवित्र आत्मा के धर्म का अस्तित्व ईसा के 451 ईस्वी में चाल्सीडॉन की परिषद तक यीशु के बाद साढ़े चार शताब्दियों तक नहीं था।

यूहन्ना 14:17 "वह सत्य की रूह होगा"

…मतलब वह सच्चा पैगंबर होगा, देखें 1 यूहन्ना 4: 1-3

यूहन्ना 14:17 "दुनिया न तो उसे देखती है...

आज दुनिया में बहुत से लोग मुहम्मद को नहीं जानते।

यूहन्ना 14:17 "...न ही उसे जानता है"

बहुत कम लोग ईश्वर के रहम के नबी, सच्चे मुहम्मद को पहचानते हैं।

यूहन्ना 14:26 "अधिवक्ता (पैराकेलेटोस)"

कयामत के दिन पैगंबर मुहम्मद बड़े पैमाने पर मानवता और पापी विश्वासियों के अधिवक्ता होंगे: 

क़यामत के दिन लोग उन लोगों की तलाश करेंगे जो मुसीबत और दर्द को कम करने के लिए उनकी ओर से ईश्वर से पैरवी (मध्यस्थ) बन सकते हैं। आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा और यीशु ये करने से मना कर देंगे।

फिर वे हमारे नबी के पास आएंगे और हमारे नबी कहेंगे, "मैं ही हूं जो ये कर सकता है।" और वह क़यामत के दिन लोगों की पैरवी करेंगे ताकि फ़ैसला किया जा सके। यह 'मक़ामे-महमूद' है जिसका ईश्वर ने क़ुरआन में वादा किया है:

"...ये नामुमकिन नहीं की तुम्हारा रब तुम्हें मक़ामे-महमूद (तारीफ़ के काबिल मक़ाम) पर पहुंचा दे।" (क़ुरआन 17:79)[2]

पैगंबर मुहम्मद ने कहा:

"मेरी हिमायत मेरे समुदाय के उन लोगों के लिए होगी जिन्होंने बड़े पाप किए हैं।" (अल-तिर्मिज़ी)

"मैं स्वर्ग में पहला हिमायती होऊंगा।" (सहीह मुस्लिम)

कुछ मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि यीशु ने वास्तव में अरामी भाषा में जो कहा वह ग्रीक के शब्द पेरिक्लिटोस के सबसे ज्यादा करीब है जिसका अर्थ है 'प्रशंसित'। अरबी में 'मुहम्मद' शब्द का अर्थ है 'प्रशंसनीय, प्रशंसित'। दूसरे शब्दों मे कहें तो ग्रीक में पेरिक्लिटोस "मुहम्मद" है। इसके समर्थन में हमारे पास दो मजबूत कारण हैं। पहला, बाइबल में समान शब्द प्रतिस्थापन के कई प्रलेखित मामलों के कारण, यह मुमकिन है कि दोनों शब्द मूल वाक्य में मौजूद थे, लेकिन लिखने वाले ने छोड़ दिए थे क्योंकि प्राचीन रिवाज में शब्दों को बारीकी से लिखते थे और बीच में कोई खाली जगह नहीं छोड़ते थे। ऐसी स्थिति में मूल वाक्य यह होगा, "और वह आपको एक और प्रशंसनीय (पेरिक्लीटोस) दिलासा देने वाला (पैराकेलेटोस) देगा।" दूसरा, हमारे पास विभिन्न युगों के कम से कम चार मुस्लिम अधिकारियों की विश्वसनीय गवाही है जिन्होंने ईसाई विद्वानों के लिए ग्रीक या सिरिएक शब्द का अनुवाद 'प्रशंसित, प्रशंसा की' के रूप में किया था।[3]

नीचे बताये गए लोग वह हैं जो साबित करते हैं कि पैराकलेट वास्तव में मुहम्मद (उन पर ईश्वर की दया और कृपा बनी रहे) का एक संकेत है:

पहला गवाह

पुजारी और ईसाई विद्वान एंसेल्म तुर्मेदा (1352/55-1425 सी.ई.) भविष्यवाणी के गवाह थे। इस्लाम कबूल करने के बाद उन्होंने एक किताब लिखी, "तुहफत अल-अरिब फी अल-रद 'अला अहल अल-सालिब।"

दूसरा गवाह

अब्दुल-अहद दाऊद(पूर्व पादरी डेविड अब्दु बेंजामिन केलदानी), बीडी, यूनीएट-कल्डियन संप्रदाय के एक रोमन कैथोलिक पादरी थे।[4]  इस्लाम स्वीकार करने के बाद उन्होंने एक किताब लिखी 'मुहम्मद इन द बाइबल'। वे इस किताब में लिखते हैं:

"इसमें जरा भी शक नहीं है कि "पेरिक्लाइट" का मतलब पैगंबर मुहम्मद, यानी अहमद है।"

तीसरा गवाह

मुहम्मद के जीवन का सार पहले ही ऊपर दिया जा चुका है। इस छंद पर टिप्पणी करते हुए:

"...एक रसूल जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा..." (क़ुरआन 61:6)

...जहां यीशु ने मुहम्मद के आने की भविष्यवाणी की, असद बताते हैं कि पराक्लेटोस शब्द:

"...लगभग निश्चित रूप से पेरिक्लिटोस (बहुप्रशंसित) शब्द का एक गलत रूप है, जो अरामी शब्द या नाम मवहमाना का एक सटीक ग्रीक अनुवाद है। (यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अरामीक भाषा यीशु के समय और उसके बाद कुछ शताब्दियों तक फिलिस्तीन में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा थी, और इसलिए निस्संदेह यह वही भाषा थी जिसमें मूल - अब नहीं है - सुसमाचार (बाइबिल) के ग्रंथों की रचना की गई थी। पेरिक्लिटोस और पराक्लेटोस को बोलने की समानता को देखते हुए यह समझना आसान है कि अनुवादक ने कैसे - या शायद बाद के लेखक ने - इन दो अभिव्यक्तियों को अस्पष्ट कर दिया। यह महत्वपूर्ण है कि अरामी मवहमाना और ग्रीक पेरिक्लिटोस दोनों का मतलब वही है जो आखिरी पैगंबर के दो नामों मुहम्मद और अहमद का है, ये दोनों हिब्रू भाषा की क्रिया 'हमीदा' (उसने प्रशंसा की) और हिब्रू भाषा की संज्ञा 'हम्द' (प्रशंसा) से लिए गए हैं।"



फुटनोट:

[1] क़ुरआन 33:40.

[2] सहीह अल-बुखारी भी देखें

[3] इब्न इशाक (85-151 सीई) द्वारा लिखित 'सिरत रसूल अल्लाह' पृष्ट 103 अबू उबैदा अल-खजराजी (1146-1187 सीई) द्वारा लिखित 'बैन अल-इस्लाम वल-मसिहिया: किताब' अबी उबैदा अल-खजराजी, पृष्ट 220-221 इब्न उल-कय्यम द्वारा लिखित 'हिदाया तुल-हयारा', पृष्ट 119 अल-सुयुति द्वारा लिखित अल-रियाद अल-अनिका, पृष्ट129

[4] उनकी जीवनी यहां पढ़ें: (http://www.muhammad.net/biblelp/bio_keldani.html.)

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