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पैगंबरी के लिए मुहम्मद का दावा (3 का भाग 3): क्या वह पागल, कवि या जादूगर थे?

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विवरण: इस दावे के लिए सबूत कि मुहम्मद एक सच्चे नबी थे और धोखेबाज नहीं थे। भाग 3: आलोचकों द्वारा किए गए कुछ अन्य झूठे दावों पर एक नज़र।

  • द्वारा Imam Mufti
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 790 (दैनिक औसत: 3)
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क्या वह पागल थे?

मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को इलाज करने वाला ही, रोगी को उनके लक्षणों से पहचान सकता है।  पैगंबर मुहम्मद ने अपने जीवन में किसी भी समय पागलपन का कोई लक्षण नहीं दिखाया, कोई भी दोस्त, पत्नी या परिवार के सदस्य ने पागलपन के कारण उन पर संदेह नहीं किया न ही उन्हें छोड़ दिया। रहस्योद्घाटन के प्रभाव से पैगंबर पर, जैसे पसीना उस तरह के चीजों का आना संदेश की तीव्रता के कारण था जिसे उन्हें सहन करना पड़ा था, न कि किसी मिर्गी के दौरे या पागलपन के उदाहरण के कारण...

इसके विपरीत, मुहम्मद ने लंबे समय तक उपदेश दिया प्राचीन अरबों के लिए पूर्णता और परिष्कार का कानून लाया जो उनके लिए अज्ञात था। यदि पैगंबर पागल होते, तो तेईस वर्ष की अवधि में कम से कम एक बार तो यह उनके आसपास के लोगों महसूस होता। इतिहास में कब एक पागल आदमी ने दस साल तक एक ईश्वर की पूजा करने के संदेश का प्रचार किया, जिसमें से तीन वर्ष उन्होंने और उनके अनुयायियों ने निर्वासन में बिताए, और अंततः वह वहां का शासक बन गए?  किस पागल आदमी ने कभी उन लोगों का दिल और दिमाग जीता है जो उससे मिले और उसके विरोधियों का सम्मान अर्जित किया?

इसके अलावा, उनके सबसे करीबी साथी, अबू बक्र और उमर को उनकी क्षमताओं, बड़प्पन, कौशल और चालाकी के लिए पहचाने जाते थे।  वे उनके द्वारा लाए गए धर्म के लिए कुछ भी बलिदान देने को तैयार थे। एक अवसर पर, अबू बक्र, मुहम्मद के लिए अपनी सारी भौतिक संपत्ति लाए, ईश्वर की दया और आशीर्वाद उन पर हो, और जब पूछा गया कि वह अपने परिवार के लिए क्या छोड़ आया है? तो उन्होंने जवाब दिया, 'मैंने उनके लिए ईश्वर और उनके दूत को छोड़ा है!'

पेशे से एक व्यापारी, अबू बक्र, मुहम्मद के बाद सभी अरबों का शासक चुने जाने के बाद, उन्होंने अपने और अपने परिवार पर खर्च दो दिरहम तक सीमित किए थे!

उमर अबू बक्र के बाद अरब का शासक बने और सीरिया, मिस्र पर विजय प्राप्त की और फारसी और रोमन साम्राज्यों को अपने अधीन कर लिया। वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपने ईमानदार न्याय के लिए जाने जाते थे। कोई कैसे सुझाव दे सकता है कि ये लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति का अनुसरण कर रहे थे?

ईश्वर सुझाव देते हैं: ईश्वर के सामने बिना किसी पक्षपात या पूर्वकल्पित विश्वासों से   खड़े हों, और किसी अन्य व्यक्ति के साथ चर्चा करें या इसके बारे में स्वयं सोचें, इस नबी को कोई पागलपन नहीं है, वह आज भी उतना ही स्थिर है जितना आप उसे चालीस वर्षों से जानते थे।

"आप कह दें कि मैं बस तुम्हें एक बात की नसीह़त कर रहा हूँ कि तुम ईश्वर के लिए दो-दो तथा अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर सोचो। तुम्हारे साथी को कोई पागलपन नहीं है। वह तो बस सचेत करने वाले हैं तुम्हें, आगामी कड़ी यातना से।" (क़ुरआन 34:46)

पुराने मक्का वासियों ने आदिवासी पक्षपात से उनके आह्वान को खारिज कर दिया, और वे उसके पागलपन के आरोपों में सच्चे नहीं थे। आज भी, बहुत से लोग मुहम्मद को एक नबी के रूप में स्वीकार करने से इनकार करते हैं क्योंकि वह एक अरब थे और यह कहकर खुद को संतुष्ट करते हैं कि वह पागल हो गया होगा या शैतान के लिए काम किया होगा। अरबों के लिए उनकी नफरत मुहम्मद की अस्वीकृति में तब्दील हो जाती है, भले ही ईश्वर कहते हैं:

"नहीं, लेकिन उन्होंने (जिसे आप पागल कवि कहते हैं) सच्चाई लाया है, और वह (ईश्वर के पहले) संदेशवाहक (सिखाया है) की सच्चाई की पुष्टि करता है।" (क़ुरआन 37:37)

हालाँकि बुतपरस्त अरब मुहम्मद को बहुत अच्छी तरह से जानते थे, फिर भी उन्होंने उन पर पागलपन के आरोप लगाए, क्योंकि वे उनके धर्म को अपने पूर्वजों की परंपरा के खिलाफ अपवित्र मानते थे।

"उन्हें जब हमारी स्पष्ट़ आयतें पढ़कर सुनाई जाती है तो वे कहते है, 'यह तो बस ऐसा व्यक्ति है जो चाहता है कि तुम्हें उनसे रोक दें जिनको तुम्हारे बाप-दादा पूजते रहे है।' और कहते है, 'यह तो एक घड़ा हुआ झूठ है।' जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने सत्य के विषय में, जबकि वह उनके पास आया, कह दिया, 'यह तो बस एक प्रत्यक्ष जादू है।' हमने उन्हें न तो किताबे दी थीं, जिनको वे पढ़ते हों और न तुमसे पहले उनकी ओर कोई सावधान करनेवाला ही भेजा था और झूठलाया उन लोगों ने भी जो उनसे पहले थे। और जो कुछ हमने उन्हें दिया था ये तो उसके दसवें भाग को भी नहीं पहुँचे है। तो उन्होंने मेरे रसूलों को झुठलाया। तो फिर कैसी रही मेरी यातना!।" (क़ुरआन 34:43-45)

क्या वह कवि थे?

ईश्वर क़ुरआन में उनके आरोप का उल्लेख करते हैं और इसका जवाब देते हैं:

"क्या वे कहते हैं कि ये कवि हैं, हम प्रतीक्षा कर रहे हैं उसके साथ कालचक्र की? आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करते रहो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ। क्या उन्हें सिखाती हैं उनकी समझ ये बातें अथवा वह उल्लंघनकारी लोग हैं? क्या वे कहते हैं कि इस (नबी) ने इस (क़ुर्आन) को स्वयं बना लिया है? वास्तव में, वे ईमान लाना नहीं चाहते।" (क़ुरआन 52:30-33)

ईश्वर उस समय के कवियों का वर्णन करते हैं ताकि पैगंबर की तुलना उनके साथ की जा सके:

"और कवियों का अनुसरण बहके हुए लोग करते हैं। क्या आप नहीं देखते कि वे प्रत्येक वादी में फिरते हैं।[1] और ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं। परन्तु वो (कवि), जो ईमान लाये, सदाचार किये, ईश्वर का बहुत स्मरण किया तथा बदला लिया इसके पश्चात् कि उनके ऊपर अत्याचार किया गया! तथा शीघ्र ही जान लेंगे, जिन्होंने अत्याचार किया है कि व किस दुष्परिणाम की ओर फिरते हैं!" (क़ुरआन 26:224-227)

अरबी कवि सच्चाई से काफ़ि दूर थे, शराब, परस्त्रीगामी, युद्ध और फुर्सत इन चीजों में व्यापृत थे, जबकि पैगंबर इसके विपरीत थे, जो अच्छे शिष्टाचार को आमंत्रित करते हैं, जैसे ईश्वर की सेवा करते हैं और गरीबों की मदद करते हैं। मुहम्मद ने किसी और से पहले अपनी शिक्षाओं का पालन किया जो पुराने कवियों या आज के दार्शनिकों से विभिन्न थे।

पैगंबर ने जिस क़ुरआन का पाठ किया वह अपनी शैली में किसी भी कविता के विपरीत था।  उस समय के अरबों में कविता के प्रत्येक पद के लिए लय, तुकबंदी, शब्दांश और अंत के संबंध में सख्त नियम हैं। क़ुरआन उस समय के किसी भी नियम के अनुरूप नहीं था, लेकिन साथ ही, यह किसी भी प्रकार के पाठ को पार करता है जिसे अरबों ने कभी नहीं सुना था। उनमें से कुछ लोग वास्तव में क़ुरआन के कुछ छंदों को सुनने के बाद ही मुसलमान बन गए, उनके निश्चित ज्ञान के कारण कि इतनी सुंदर चीज का स्रोत कभी भी कोई सृजित प्राणी नहीं कर सकता...

मुहम्मद को कभी भी इस्लाम से पहले या पैगंबरी के बाद कविता की रचना करने के लिए नहीं जाना जाता था। बल्कि, पैगम्बर को इससे बहुत नफरत थी।  उनके बयानों के संकलन, जिन्हें सुन्ना कहा जाता है, जिसको परिश्रमपूर्वक संरक्षित किया गया है और क़ुरआन की तुलना में इसकी साहित्यिक सामग्री में पूरी तरह से अलग हैं। अरबी कविता के भण्डार गृह में पैगंबर मुहम्मद के एक भी दोहे नहीं मिलते हैं।

क्या वह एक जादूगर थे?

पैगंबर मुहम्मद ने कभी भी जादू-टोना नहीं सीखा और न ही कभी उसका अभ्यास किया। इसके विपरीत, उन्होंने जादु टोना करने के अभ्यास की निंदा की है और अपने अनुयायियों को सिखाया कि इससे बचाव कैसे किया जाए?

जादूगरों का शैतान के साथ एक मजबूत रिश्ता होता है और उनकी साझेदारी उन्हें लोगों को धोखा देने की अनुमति देती है। शैतान झूठ, पाप, अश्लीलता, अनैतिकता, बुराई का प्रचार करते हैं और वे बहुत से परिवारों को बर्बाद कर देते हैं। क़ुरआन उन लोगों को स्पष्ट करता है जिन पर शैतान आते हैं:

"क्या मैं तुम्हें बता दूं कि दुष्टात्माएँ किस पर आती हैं? वे हर पापी झूठे पर उतरते हैं।  जो कुछ सुना जाता है, उसे वे आगे बढ़ाते हैं, और उनमें से अधिकतर झूठे हैं।" (क़ुरआन 26:221-223)

पैगंबर मुहम्मद अपने वचन के प्रति ईमानदार व्यक्ति के रूप में जाने तथा पहचाने जाते थे, जो कभी झूठ नहीं बोलते थे। उन्होंने अच्छे नैतिकता और अच्छे शिष्टाचार की आज्ञा दी। विश्व इतिहास में कोई भी जादूगर क़ुरआन जैसा ग्रंथ या उनके जैसा कानून कभी भी नहीं ला पाया है।


फुटनोट:

[1] मुहावरेदार वाक्यांश का उपयोग किया जाता है, जैसा कि अधिकांश टिप्पणीकार बताते हैं, एक भ्रमित या लक्ष्यहीन का वर्णन करने के लिए - और अक्सर आत्म-विरोधाभासी - शब्दों और विचारों के साथ खेलते हैं। इस संदर्भ में यह क़ुरआन की शुद्धता के बीच अंतर पर जोर देने के लिए है, जो सभी आंतरिक विरोधाभासों से मुक्त है, और अस्पष्टता अक्सर कविता में निहित होती है।

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