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ईश्वर के होने की निशानियां (2 का भाग 2)

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विवरण: क़ुरआन ईश्वर का सबसे बड़ा चमत्कार है और मानवजाति के अंतिम पैगंबर मुहम्मद को दिया गया था। भाग 2: प्रकृति - क़ुरआन में बड़े पैमाने पर वर्णित ईश्वर के होने की एक और महान निशानी।

  • द्वारा IslamReligion.com
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 85 (दैनिक औसत: 1)
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4)   प्रकृति

Signs-of-God02.jpgधरती पर जंगलों, नदियों, पहाड़ों, झरनों, समुद्रों और तरह-तरह के पौधों और जानवरों की प्रजातियों के रूप में जो कुछ भी मौजूद है वह वास्तव में कुछ उल्लेखनीय है। डॉल्फ़िन ने खुद अपने आप को पृथ्वी की सबसे उन्नत और कुशल सोनार प्रणाली से लैस (सन्नद्ध) नहीं किया, न ही बाज खुद अपने आप को मनुष्यों की तुलना में चार या पांच गुना अधिक मजबूत दृष्टि से लैस कर सकता है - ये दोनों काम सृष्टिकर्ता के हैं जिन्होंने जो कुछ बनाया उसे उत्तम बनाया। उसकी रचना को देख के यह जाना जा सकता है कि सृष्टिकर्ता कितना उल्लेखनीय और सक्षम है।

ईश्वर हमें उन पशुओं में निशानियां दिखाता है जिन्हें उसने हमारे लिए बनाया है। घोड़े, खच्चर और गधे मानवजाति के लिए उन दूर-दराज के स्थानों पर जाने के लिए हैं जहां पैदल पहुंचने में अधिक समय लगता है। गाय, भेड़, और बकरियां दूध देती हैं, और हम उनकी खाल और ऊन को वस्त्र बनाने के काम में लाते हैं, और उनसे हमें मांस मिलता है; जबकि मुर्गियां रोजाना लाखों अंडे देती हैं - ये सभी निशानियां हैं ताकि हम अपने ऊपर ईश्वर के आशीर्वाद को माने और उनका आभार व्यक्त करें। "और वास्तव में, तुम्हारे लिए चरने वाले पशुओं में एक निशानी है। हम (ईश्वर) तुम्हे उनके पेट के गोबर और रक्त के बीच से शुध्द दूध पिलाते हैं - जो पीने मे अच्छा लगता है। और खजूरों और अंगूरों के फलों से, जिससे तुम मदिरा बना लेते हो तथा उत्तम जीविका भी, वास्तव में इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है जो समझ-बूझ रखते हैं। (क़ुरआन 16:66-67)

अगर हम ऊपर आकाश की ओर देखें तो; पृथ्वी का वातावरण एक अद्वितीय सुरक्षात्मक परत के साथ बनाया गया है। सूर्य हमें प्रकाश देता है जो जीवन को संभव बनाता है, इसकी झुकी हुई धुरी हमें चार मौसम देती है ताकि हम विभिन्न जलवायु का आनंद ले सकें। तारे, धूमकेतु, और जो कुछ भी हम अंतरिक्ष में देख सकते हैं वे हमारे देखने के लिए है, उनकी सुंदरता की प्रशंसा करने के लिए है, स्वीकार करने के लिए है कि ईश्वर ने ब्रह्मांड का निर्माण किया है, और स्वीकार करने के लिए है कि यह निश्चित ही किसी उद्देश्य से बनाया गया है। वास्तव में ब्रह्मांड में सब कुछ हमारे लिए ही बना है। "बेशक आकाशों तथा धरती की रचना में, रात तथा दिन के एक-दूसरे के पीछे निरन्तर आने-जाने में, उन नावों में जो मानव के लाभ के लिए सागरों में चलती है और वर्षा के उस पानी में जिसे ईश्वर आकाश से बरसाता है, फिर धरती के सूखने के बाद इसे वर्षा से जीवित करता है और उसमें प्रत्येक जीवों को फैलाता है तथा वायुओं को चलाने में और उन बादलों में जो आकाश और धरती के बीच उसकी आज्ञा के अधीन रहते हैं, इन सब चीज़ों में उन लोगों के लिए अनगिनत निशानियां हैं जो समझ-बूझ रखते हैं।" (क़ुरआन 2:164)   

मनुष्यों और विपरीत लिंगो की विविधता, और जीवन में जो कुछ भी अच्छा है, वे सभी ईश्वर की कुछ भी करने की क्षमता और उसकी दयालुता की निशानिया हैं। "और उसकी निशानियों में से यह है कि उसने तुम में से ही तुम्हारे लिए पति या पत्नी बनाये ताकि तुम उन में शांति पाओ, और उसने तुम्हारे बीच स्नेह और दया को रखा। वास्तव में इसमें उन लोगों के लिए निशानिया हैं जो समझते हैं। और उसकी निशानियों मे से एक है आकाश और पृय्वी की उत्पत्ति, और भाषाओं और रंगों की विविधता। निस्सन्देह इसमें ज्ञान वालों के लिए निशानियां हैं।” (क़ुरआन 30:21-22)

वर्षा न केवल एक वरदान है और पानी जीवन का स्रोत है, बल्कि क़ुरआन में वर्षा का बार-बार उल्लेख एक बहुत बड़े उद्देश्य के लिए है। "और वही है जो अपनी दया (वर्षा) से पहले हवाओ को इसकी सूचना देने के लिए भेजता है और जब ये भारी बादलों को ले जाती है, तो हम उसे किसी निर्जीव धरती पर पहुंचा देते हैं, फिर उससे जल वर्षा कर, उसके द्वारा प्रत्येक प्रकार के फल उपजा देते हैं। इसी प्रकार, हम (ईश्वर) मुर्दों को जीवित करते हैं, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण कर सको।" (क़ुरआन 7:57) "और उसकी निशानियों में से यह है कि तुम धरती को बंजर देखते हो, लेकिन जब हम उस पर वर्षा बरसाते हैं तो वह लहलहाने लगती है और बढ़ने लगती है। बेशक जिसने इसे जीवित किया है वही मरे हुओं को जीवन देने वाला है। वास्तव में, वह सब कुछ कर सकता है" (क़ुरआन 41:39)। ये सबको पता होना चाहिए कि बारिश के बाद ईश्वर (ज्ञात जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से) एक मृत बीज को जीवित वनस्पति में बदल देता है। इससे व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जिस प्रकार ईश्वर एक मरे हुए बीज को जीवित करता है, उसी तरह वह कयामत के दिन जीवन देगा और न्याय के लिए सभी मानवजाति को पुनर्जीवित करेगा। यह जानने के बाद मनुष्य को उस अभूतपूर्व दिन की तैयारी करनी चाहिए और वो कार्य करने चाहिए जो ईश्वर को प्रसन्न करते हैं और उन कार्यो से बचना चाहिए जो उसे क्रोधित करते हैं।

इसलिए ईश्वर मानवजाति को निशानियां दिखाता है कि अगर इसका पालन किया जाए तो सच्चा मार्गदर्शन मिलता है; एक ऐसा मार्गदर्शन जो सूर्य से ज्यादा रौशनी वाला है। यह मार्गदर्शन इस्लाम है। "और यदि वे इस्लाम में समर्पित हैं तो वे सही मार्ग पर हैं, लेकिन यदि वे विमुख हो गये, तो तुम्हारा दायित्व सिर्फ संदेश पहुंचना है। और ईश्वर अपने भक्तों को देख रहा है।" (क़ुरआन 3:20) "आज के दिन मैंने (ईश्वर) तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म परिपूर्ण कर दिया है, तुम पर अपनी कृपा पूरी की, और तुम्हारे लिए इस्लाम को तुम्हारा धर्म चुना है।" (क़ुरआन 5:3) जो लोग ईश्वर की निशानियो को झुठलाते हैं, ये निशानियां क़यामत के दिन उनके खिलाफ़ इस्तेमाल की जानेवाली निशानियां होंगी। जो कोई भी ईश्वर की निशानियों को समझ के उसके बताये हुए मार्ग पर चलता है, उसे कभी न खत्म होने वाला आनंद यानि स्वर्ग का उपहार दिया जाएगा, और जो कोई भी ईश्वर के निशानियों को नही मानेगा, उसे कभी न खत्म होने वाला कष्ट यानि नर्क की आग से दंडित किया जाएगा।

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