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डायन चार्ल्स ब्रेस्लिन, पूर्व कैथोलिक, अमेरिका (3 का भाग 3)

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विवरण: डायन ने इस्लाम को स्वीकार करने और अपने नए जीवन पर चर्चा की, और अमेरिका के लिए एक प्रार्थना।

  • द्वारा Diane Charles Breslin
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 681 (दैनिक औसत: 4)
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इस्लाम की ओर मेरी यात्रा 

मेरी मुस्लिम बनने की चाहत को स्वीकार करने से पहले मैंने क़ुरआन की तीन साल तक तालीम और खोज की। बिल्कुल मुझे आदतों के बदलाव का डर था, जैसे की डेट करने और शराब पीने की मै आदि बन चुकी थी। संगीत और नाचना मेरी ज़िंदगी का अहम हिस्सा थे, और बिकीनी और छोटी स्कर्टस मेरी प्रसिद्धि का कारण थी। इस पूरे समय मुझे किसी भी मुसलमान से मिलने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उस समय राज्य की एकमात्र मस्जिद मे कुछ अप्रवासियों को छोड़कर जो मुश्किल से अंग्रेजी बोल पाते थे, कोई नहीं था। जब मैं शुक्रवार की प्रार्थना के लिए जाती और यह देखने की कोशिश करती कि मैं क्या विचार कर रही हूं, तो वहां लोग मुझे ऐसे देखते जैसे मै कोई जासूस हूं, और अभी भी अधिकांश इस्लामी सभाओं में ऐसा ही है। मेरी मदद के लिए एक भी मुस्लिम अमेरिकी उपलब्ध नहीं था और, जैसा कि मैंने कहा, सभी अप्रवासी आबादी भाषा की वजह से कुछ बता नहीं सकते थे। 

मेरी जीवन के इस चरण के बीच मे, मेरे पिता की कैंसर से मृत्यु हो गई। मैं उनके बेड के एक तरफ बैठी थी और ऐसा लगा जैसे मैंने सच मे एक स्वर्गदूत को देखा जो मेरे पिता की आत्मा निकाल रहा था। वह डरे हुए थे और आँसू उनकी आखों से बह रहे थे। मेरी माँ और पिता दोनों की आरामदायक ज़िंदगी, क्लब, महंगी गाड़ियां...., जो सब कमाए गए ब्याज के कारण था, यह सब अब खतम हो गया। 

अब मेरी चाह इस्लाम में जाने की और ज्यादा हो गई, अभी भी थोड़ा समय था, मेरे तौर तरीके बदलने का और उन सब को खतम करने का जिसके लिए मैंने कभी अपनी अच्छी ज़िंदगी के लिए तलाश की थी। इसके तुरंत बाद मैं मिस्र आई, और अरबी भाषा के चमत्कार और स्पष्ट सत्य की खोज के माध्यम से एक लंबी धीमी यात्रा में शामिल हुई - ईश्वर एक है, शाश्वत है; जिसने न कभी जन्म लिया और न जन्म दिया और ईश्वर के समान कुछ भी नहीं है। 

यह मनुष्यों के बीच परिणामी समानता भी है जिसने मुझे उस धर्म के प्रति सबसे अधिक आकर्षित किया। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) ने कहा की लोग कंघी के दांतों के समान होते है-सभी बराबर, सबसे अच्छा वो है जो सबसे धार्मिक है। क़ुरआन मे हमे यह बताया गया है की सबसे अच्छा वो है जो सबसे धार्मिक है। धार्मिकता मे केवल ईश्वर की मोहब्बत और उसका खौफ शामिल है। जैसे की ईश्वर के शब्द अरेबिक मे प्रकट हुए थे, उसके लिए मैंने अरेबिक भाषा सिखनी शुरू करदी। 

मेरी ज़िंदगी के हर एक हिस्से को क़ुरआन ने बदल दिया। मुझे दुनिया की कोई चीज नहीं चाहिए थी; मुझे ना गाड़ियां, ना कपड़े, ना यात्राएं जिनके बीच मे मैं पहले फसी हुई थी, मुझे कोई इन चाहतों के लिए नहीं बहला सकता था। मै आस्तिक के रुप में काफी अच्छी ज़िंदगी गुजार सकती थी; पर जैसे की कहते है.....यह अब दिल मे नहीं रह गया था....सिर्फ हाथों मे रह गया था। मुझे मेरे पुराने मित्रों और रिश्तेदारों को खोने का बिल्कुल डर नहीं था- अगर ईश्वर ने मुझे उनके करीब लाना चाहा, तो भी ठीक है, पर मुझे पता है ईश्वर मुझे वह देगा जिसकी मुझे जरूरत है, न ज्यादा - न कम। अब मै ज्यादा चिंतित और उदास महसूस नहीं करती थी, जो भी मुझसे छूट गया मुझे उसका भी पछतावा नहीं था, क्योंकि मै ईश्वर की देखभाल में सुरक्षित थी- केवल वह जिसे मैं हमेशा जानती थी बस उनका नाम नहीं मालूम था। 

अमेरिका के लिए प्रार्थना 

मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वो प्रत्येक अमेरिकी को एक सरल, सीधे अंदाज में ईश्वर के एक होने का संदेश दें....ज्यादातर अमरीकी लोग इस्लाम की पूरी जानकारी से बेखबर है। सारा ध्यान हमेशा राजनीति पर होता है, जो लोगों के कर्मों पर केंद्रित होता है। अब समय आ गया है कि हम उन पैगंबरो के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें जो हमें अंधकार से बाहर निकालने और प्रकाश की ओर ले जाने के लिए आए थे। इसमें कोई शक नहीं कि अब अमेरिका को प्रभावित करने वाली अस्वस्थता में अंधेरा छा गया है। सत्य का प्रकाश हम सभी को रास्ता दिखायेगा, और चाहे कोई इस्लामी मार्ग का अनुसरण करना चाहे या नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसे अवरुद्ध करना या दूसरों को इसका पालन करने से रोकना निश्चित रूप से आगे दुख की ओर ले जाएगा। मुझे अपने देश के स्वस्थ भविष्य की बहुत परवाह है, और मुझे पूरा यकीन है कि इस्लाम के बारे में अधिक जानने से मेरी इस आशा के पूरा होने की संभावना बढ़ जाएगी। 

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