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स्वर्ग के सुख (2 का भाग 1)

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विवरण: इस दुनिया के जीवन और स्वर्ग के बीच मूलभूत अंतरों को परिभाषित करने वाले दो लेख में से पहला। भाग 1: स्वर्ग में वो चीज़ें नहीं है जो इस जीवन में दुख, दर्द और पीड़ा देती हैं।

  • द्वारा M. Abdulsalam (© 2006 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 18 Apr 2022
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1154 (दैनिक औसत: 5)
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स्वर्ग की सच्चाई कुछ ऐसी है जिसे लोग तब तक नहीं जान पाएंगे जब तक कि वे वास्तव में स्वर्ग में न चले जाएं, लेकिन ईश्वर ने हमें क़ुरआन में इसकी कुछ झलक दिखाई है। उन्होंने स्वर्ग को इस दुनिया के जीवन, प्रकृतिक और जीवन के उद्देश्य, के साथ-साथ यहां के आनंद से अलग बताया है। ईश्वर ने जो स्वर्ग देने को कहा है क़ुरआन उसके बारे में लोगों को बताता है, इसके सुख का उल्लेख करता है, और सभी को इसकी सुंदरता बताता है। यह लोगों को बताता है कि स्वर्ग इस दुनिया के बाद जीवन जीने के दो तरीकों में से एक है, और यह कि स्वर्ग में हर अच्छी चीज उस हद तक उनकी होगी जो वो अभी कल्पना भी नहीं कर सकते। यह ये भी दर्शाता है कि स्वर्ग एक ऐसी जगह है जहां सभी सुख हैं और जहां लोगों को उनकी आत्मा और दिल की इच्छा की हर चीज दी जाएगी, और लोगों को जरुरत, चिंता या उदासी, दुख और अफसोस से दूर कर दिया जाएगा। स्वर्ग में हर तरह की सुंदरता और सुख मौजूद है और इसे इस तरह दिया जाएगा जैसा पहले न कभी देखा होगा और न सोचा होगा। ईश्वर ने वहां इन सुखों को उपहार के रूप में तैयार किया है, और ये केवल उन्हीं लोगों को दिया जायेगा जिन से वह प्रसन्न होगा।

लेकिन स्वर्ग में इन सुखों का स्वरूप क्या है, और यह इस दुनिया के सुखों से कैसे अलग होगा? हम इनमें से कुछ अंतरों को बताने का प्रयास करेंगे।

शुद्ध आनंद - न दर्द, न पीड़ा

यहाँ इस दुनिया में लोगों को कुछ सुख मिलता है तो वहीं उन्हें बहुत अधिक परिश्रम और पीड़ा का भी सामना करना पड़ता है। यदि कोई अपने जीवन की जांच-पड़ताल करे तो वो देखेगा कि वो जिस कठिनाई का सामना कर रहा है वो आराम और सुख से कहीं अधिक है। स्वर्ग में न तो कोई कठिनाई होगी और न ही कष्ट, और लोग उसमें पुरे आनंद और सुख से रहेंगे। इस जीवन में लोगों को जिस दुख, दर्द और पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है, स्वर्ग में ये सब नहीं होगा। आइए इनमें से कुछ कारणों पर एक नजर डालते हैं।

धन संपत्ति

जब कोई इस जीवन में सफलता के बारे में सोचता है, तो वे आमतौर पर बड़े घरों, बढ़िया गहनों और कपड़ों और महंगी कारों के बारे में सोचता हैं; वित्तीय स्थिरता को सुखी जीवन की कुंजी माना जाता है। अधिकांश लोगों के लिए सफलता का मतलब धन है, भले ही यह सच न हो। कितनी बार हमने धनी लोगों को ऐसा कठिनाई भरा जीवन जीते देखा है कि कभी-कभी वह आत्महत्या कर लेते हैं! धन एक ऐसी चीज है जिसे मनुष्य किसी भी कीमत पर चाहता है, और यह इच्छा एक बड़े उद्देश्य और ज्ञान के लिए बनाई गई है। जब यह इच्छा पूरी नहीं होती, तो व्यक्ति कुछ हद तक दुखी होता है। इसलिए ईश्वर ने स्वर्ग के निवासियों से वादा किया है कि उनके पास धन और संपत्ति के संबंध में वह सब कुछ होगा जिसकी उन्होंने कल्पना की थी, दोनों के लिए जो बेहद गरीब थे और यहां तक कि भूखे और प्यासे रहते थे, और अमीर लोगों के लिए जो और अधिक चाहते थे। ईश्वर हमें इसकी एक झलक देते हैं जब वो कहते हैं:

"...वहां सब कुछ होगा, जिसे उनका मन चाहेगा और जिसे उनकी आंखें देखकर आनन्द लेगी..." (क़ुरआन 43:71)

"आनन्द से खाओ और पियो उसके बदले में जो तुमने किया है पिछले दिनों (संसार) में!" (क़ुरआन 69:24)

"...उसमें उन्हें सोने के कंगन पहनाये जायेंगे, और वो महीन और गाढ़े रेशम के हरे वस्त्र पहनेंगे। वो सिंहासनों के ऊपर आसीन होंगे। ये प्रतिफल कितना अच्छा है! ये कितना अच्छा विश्राम स्थान है।" (क़ुरआन 18:31)

रोग और मृत्यु

इस जीवन में दर्द और पीड़ा का एक अन्य कारण किसी प्रियजन की मृत्यु या बीमारी है, स्वर्ग में ये दनो चीज़ें नही है। स्वर्ग में किसी को कोई बीमारी या दर्द नहीं होगा। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) ने स्वर्ग के लोगों के बारे में कहा:

"वे कभी बीमार नहीं होंगे, और न ही अपनी नाक साफ़ करेंगे और थूकेंगे।" (सहीह अल बुखारी)

स्वर्ग में किसी की मृत्यु नही होगी। सभी उसमें अनंत काल तक सुख का आनंद लेते रहेंगे। पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि जब लोग इसमें प्रवेश करेंगे तो एक पुकारने वाला स्वर्ग में पुकारेगा:

"वास्तव में आप स्वस्थ रहें और फिर कभी बीमार न हों, आप जीवित रहें और फिर कभी न मरें, आप जवान रहें और फिर कभी कमजोर न हों, आप आनंद लें, और फिर कभी दुख और पछतावा न करें।" (सहीह मुस्लिम)

सामाजिक रिश्ते

जहां तक व्यक्तिगत संबंधों में मनमुटाव के कारण होने वाले पछतावे का सवाल है, लोगों को स्वर्ग में कभी भी कोई बुराई या दुख पहुंचाने वाली बात नहीं सुनाई देगी। वो केवल अच्छी और शांति की बाते ही सुनेंगे। ईश्वर कहता है:

"नहीं सुनेंगे इसमें व्यर्थ और पाप की बात। केवल शांति! शांति!" की आवाज सुनेंगे।" (क़ुरआन 56:25-26)

लोगों के बीच न दुश्मनी होगी और न ही द्वेष:

"और उनके दिलों में जो द्वेष (अगर इस दुनिया में ऐसा है तो) होगा उसे हम निकाल देंगे..." (क़ुरआन 7:43)

पैगंबर ने कहा:

"वहां न घृणा होगी, न द्वेष होगा, उनके दिल एक जैसे होंगे और वे सुबह और शाम ईश्वर की बड़ाई करेंगे।" (सहीह अल बुखारी)

वहां लोगों के पास सबसे अच्छे साथी होंगे, जो दुनिया में भी सबसे अच्छे लोग थे:

"और जो ईश्वर और पैगंबर की आज्ञा का पालन करेंगे, वह स्वर्ग में उनके साथ होंगे जिनपर ईश्वर ने कृपा की है, अर्थात पैगंबरों, सत्य बोलने वालों, शहीदों और सदाचारियों के साथ और वे कितने अच्छे साथी होंगे!" (क़ुरआन 4:69)

स्वर्ग वालों के दिल पवित्र होंगे, उनकी वाणी अच्छी होगी, उनके काम अच्छे होंगे। वहां कोई आहत करने वाली, परेशान करने वाली, आपत्तिजनक या उत्तेजक बात नहीं होगी, क्योंकि स्वर्ग सभी बेकार बातों और कामो से मुक्त है। यदि हम इस जीवन में पीड़ा के सभी कारणों की बात करें, तो हम निश्चित रूप से स्वर्ग मे इन चीजों को नही पाएंगे।

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