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डायन चार्ल्स ब्रेस्लिन, पूर्व-कैथोलिक, यूएसए (3 का भाग 1)

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विवरण: एक सख्त कैथोलिक बाइबिल पढ़ने के बाद विश्वास खो देता है, लेकिन ईश्वर में उसका निरंतर विश्वास उसे अन्य धर्मों का पता लगाने के लिए प्रेरित करता है

  • द्वारा Diane Charles Breslin
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 1235 (दैनिक औसत: 3)
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     जब मुझसे पूछा जाता है कि मैं मुस्लिम कैसे बानी तो मैं हमेशा जवाब देती हूं कि मैंने हमेशा खुद को सिर्फ एक ईश्वर मे विश्वास करने वाला महसूस किया, फिर भी मुझे पहली बार इसका एहसास हुआ जब मैंने इस्लाम नामक धर्म और क़ुरआन नामक एक किताब के बारे में सुना।

      लेकिन सबसे पहले मैं अपनी अमेरिकी, पारंपरिक आयरिश कैथोलिक पृष्ठभूमि के संक्षिप्त सार के साथ शुरु करती हूं।

वास्तव में मैं कैथोलिक थी

      मेरे पिता ने मिशनरी के रूप में प्रशिक्षण लेने के लिए तीन साल के कार्यकाल के बाद शिक्षालय छोड़ दिया। वह बोस्टन क्षेत्र में पैदा हुए और पले-बढ़े तेरह बच्चों में सबसे बड़े थे। उनकी दो बहनें नन बन गईं, जैसा कि उनकी माँ की मौसी ने किया था। मेरे पिताजी का छोटा भाई भी शिक्षालय में था और उन्होंने अंतिम निश्चय लेने से ठीक पहले 9 साल बाद नौकरी छोड़ दी। मेरी दादी माँ सुबह से पहले उठ जाती थीं और तैयार होके सुबह की प्रार्थना के लिए पहाड़ी पर चली जाती, जबकि घर के बाकी लोग सोये रहते थे। मैं उन्हें एक बहुत ही दृढ़, दयालु, निष्पक्ष और मजबूत महिला के रूप में याद करती हूं, और उस समय के लिए यह असामान्य था। मुझे यकीन है कि उन्होंने कभी इस्लाम का जिक्र नहीं सुना होगा, और ईश्वर उनके दिल के विश्वास के आधार पर उनका न्याय करेगा। बहुत से जिन्होंने इस्लाम के बारे में कभी नहीं सुना, वे सहज भाव से एक ईश्वर की प्रार्थना करते हैं, हालांकि उन्हें अपने पूर्वजों से विभिन्न संप्रदायों के लेबल विरासत में मिले हैं।

      चार साल की उम्र में कैथोलिक नर्सरी स्कूल में मेरा दाखिल किया गया था और अपने जीवन के अगले 12 साल त्रिमूर्ति सिद्धांत से घिरे हुए थे। वहां हर जगह क्रॉस पाए जाते थे, यहाँ तक की ननो के कपड़ो के ऊपर भी, दीवारों पे, कक्षा में और यहाँ तक की मेरे घर के हर कमरों की दीवारों पे। वहां मूर्तियां और पवित्र चित्र भी थे - वहां आप जिधर भी देखो, हर जगह बेबी जीसस और उनकी मां मैरी थी - कभी खुश, कभी उदास, फिर भी हमेशा शास्त्रीय रूप से सफेद और एंग्लो चित्रित होते थे। विभिन्न और विविध स्वर्गदूतों और संतों के चित्र आने वाले अवकाश के दिन के आधार पर।

      मेरे पास हमारे यार्ड से घाटी के बकाइन के पेड़ (लाइलक्स) और गेंदे को उठाकर गुलदस्ते बनाने की यादें हैं, जिन्हें मैंने अपने बेडरूम के बगल में ऊपर बरामदा में सबसे बड़ी मदर मैरी की मूर्ति के आधार पर फूलदान में रखा था। वहाँ मैं घुटने टेककर प्रार्थना करती, ताज़े चुने हुए फूलों की सुखद सुगंध का आनंद लेती और शांति से विचार करती कि मैरी के लंबे, शाहबलूत बाल कितने प्यारे थे। मैं स्पष्ट रूप से कह सकती हूं कि मैंने कभी भी उनसे प्रार्थना नहीं की या महसूस किया कि उनके पास मेरी मदद करने की कोई शक्ति है। जब मैं रात को बिस्तर पर माला धारण करती तब भी ऐसा ही होता था। मैं ऊपर की ओर देख के और सच्चे दिल से हमारे पिता और जय मैरी और महिमा पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के लिए अनुष्ठान की प्रार्थना दोहराती थी - मैं जानती थी की केवल एक ही सर्वशक्तिमान है लेकिन मैं यह सिर्फ इसलिए करती थी, क्योंकि मुझे यही सब सिखाया गया था

      मेरे बारहवें जन्मदिन पर, मेरी माँ ने मुझे एक बाइबल दी। कैथोलिक के रूप में हमें वेटिकन द्वारा स्वीकृत हमारे बाल्टीमोर कैटिचिज़्म के अलावा कुछ भी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया गया था। किसी भी तुलनात्मक आत्मनिरीक्षण को नकारा और मना किया जाता था। फिर भी मैंने जोश से पढ़ा, यह जानने के लिए कि इसमें मेरे निर्माता से और उसके बारे में एक कहानी होगी। मैं और भी भ्रमित हो गई। यह पुस्तक स्पष्ट रूप से द्वारा लिखी हुई थी, जटिल और समझने में मुश्किल। लेकिन बस यही उपलब्ध था।

     मेरी उपस्थिति चर्च में लगातार कम होती गई जबकि पहले ये बहुत अच्छी थी यह मेरे किशोरावस्था का समय था जब ऐसा हुआ जैसा कि मेरी पीढ़ी के लिए आदर्श था, और जब तक मैं अपने बीसवें दशक में पहुंची, तब तक मेरा कोई औपचारिक धर्म नहीं था। मैंने बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म के बारे में बहुत कुछ पढ़ा और यहां तक कि कुछ महीनों के लिए स्थानीय बैपटिस्ट चर्च को भी आजमाया। वे मेरा ध्यान आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे, शुरुआत में बहुत आकर्षक लेकिन बाद में सामान्य से। फिर भी औपचारिक रूप से अभ्यास न करने के सभी वर्षों में, एक दिन कभी नहीं बीता जब मैंने "ईश्वर से बात नहीं की" विशेष रूप से जब मैं सोती तो मैं हमेशा अपने सभी आशीर्वादों के लिए धन्यवाद कहती और अपनी किसी भी समस्या के लिए मदद मांगती। यह हमेशा वही निश्चित और सिर्फ वही था जिसे मैं संबोधित करती थी, निश्चित रूप से वह सुन रहा था और मुझे उनके प्यार और देखभाल पर भरोसा था। इस बारे में मुझे कभी किसी ने कुछ नहीं सिखाया; यह शुद्ध वृत्ति थी।

 

 

डायन चार्ल्स ब्रेस्लिन, पूर्व-कैथोलिक, यूएसए (3 का भाग 2)

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विवरण: डायन द्वारा इस्लाम पढ़ने के बाद, वह फिर से जीसस और मैरी से प्यार करती है, लेकिन एक नई रोशनी में सच्चा प्यार

  • द्वारा Diane Charles Breslin
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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अन्य लोग

अपनी मास्टर डिग्री की तैयारी के दौरान ही मैंने पहली बार क़ुरआन के बारे में सुना। उस समय तक मैं अधिकांश अमरीकी लोगों की तरह "अरब" के लोगों को रहस्यमय, अंधेरे शिकारियों के रूप में जानती थी जो हमारी सभ्यता को लूटने के लिए बाहर निकलते थे। इस्लाम का कभी उल्लेख नहीं किया गया था - केवल धूर्त, अरब के गंदे लोग गंदे, रेगिस्तान में ऊंट और तंबू का उल्लेख किया गया था। धर्म की कक्षा में एक बच्चे के रूप में, मैं अक्सर सोचती थी कि अन्य लोग कौन थे? यीशु काना और गलीली और नज़ारेथ में आये, लेकिन उनकी आँखें नीली थीं - अन्य लोग कौन थे? मुझे संकेत हुआ कि कहीं न कहीं कुछ छूट रहा है। 1967 में अरब-इजराइल युद्ध के दौरान, हम सभी को अन्य लोगों की पहली झलक मिली, और अधिकांश लोगों द्वारा उन्हें स्पष्ट रूप से दुश्मन के रूप में देखा गया। लेकिन मैं उन्हें पसंद करती थी, और बिना किसी स्पष्ट कारण के। मैं आज तक इसकी व्याख्या नहीं कर सकती, सिवाय इसके कि अब यह महसूस होता है कि वे मेरे मुस्लिम भाई थे।

मैं क़रीब 35 साल की थी जब मैंने क़ुरआन का पहला पन्ना पढ़ा। मैंने इसे उस क्षेत्र के निवासियों के धर्म से परिचित होने के लिए ऐसे ही देखने के लिए खोला था, जिसमें मैं अपनी मास्टर डिग्री के लिए पढ़ाई कर रही थी। ईश्वर ने पुस्तक की सूरत अल-मुमिनुन (द बिलीवर्स) के छंद 42-44 को खुलवा दिया:

"और वास्तव में, तुम्हारा धर्म एक ही धर्म है और मैं ही तुम सबका पालनहार हूँ, अतः मुझी से डरो। तो उन्होंने खण्ड कर लिया, अपने धर्म का, आपस में कई खण्ड, प्रत्येक सम्प्रदाय उसीमें जो उनके पास है, मगन है। अतः (हे नबी!) आप उन्हें छोड़ दें, उनकी अचेतना में कुछ समय तक।” (क़ुरआन 23:52-54)

पहली बार पढ़ने से मुझे पता चला कि यह निश्चित सत्य था- स्पष्ट और सशक्त, सभी मानवता के सार को प्रकट करना और इतिहास प्रमुख के रूप में मैंने जो कुछ भी पढ़ा था उसे सत्यापित करना। सच्चाई की मानवता की दयनीय अस्वीकृति, विशेष होने के लिए उनकी निरंतर व्यर्थ प्रतिस्पर्धा और अपने अस्तित्व के उद्देश्य की उपेक्षा सभी कुछ शब्दों में सामने आती है। राष्ट्र राज्य, राष्ट्रीयताएं, संस्कृतियां, भाषाएं - सभी श्रेष्ठ महसूस कर रहे हैं, जब वास्तव में, ये सभी पहचान एकमात्र वास्तविकता का मुखौटा है जिसे साझा करने में हमें खुशी होनी चाहिए- वह है एक मालिक की सेवा करना, वह जिसने सब कुछ बनाया और जो सब कुछ का मालिक है।

मै अभी भी ईसा और मरियम से प्यार करती हूँ

बचपन में मै अक्सर ये वाक्यांश दोहराती थी " पवित्र मैरी, ईश्वर की माँ, हम जैसे गुनाहगारो के लिए प्रार्थना करो इस समय भी और मरने के समय भी, आमीन। अब मैं देखती हूं कि देवत्व की माता के रूप में उसकी गलत व्याख्या से मरियम को कितना बदनाम किया गया है। कुंवारी माँ से जन्मे महान पैगंबर ईसा के लिए उन्हें सभी महिलाओं से ऊपर चुना गया, उन्हें इस रूप में देखना चाहिए। मेरी माँ अक्सर मैरी की मदद के लिए अपनी निरंतर दलीलों का बचाव करते हुए कहती हैं कि वह भी एक माँ हैं और एक माँ के दुखों को समझती हैं। मेरी माँ और अन्य सभी के लिए यह विचार करना कहीं अधिक उपयोगी होगा कि कैसे सबसे शुद्ध मैरी को उसके समय के यहूदियों द्वारा बदनाम किया गया था और सबसे घृणित पाप, व्यभिचार का आरोप लगाया गया था। मरियम ने यह सब सहन किया, यह जानते हुए कि सर्वशक्तिमान द्वारा उसे सही ठहराया जाएगा, और उसे उनकी सभी विपत्तियों को सहन करने की शक्ति दी जाएगी।

मरियम के विश्वास और ईश्वर की दया में विश्वास की यह मान्यता एक को महिलाओं के बीच उसकी सबसे ऊँची स्थिति को पहचानने की अनुमति देगी, और साथ ही उसे ईश्वर की माँ कहने की बदनामी को दूर करेगी, जो कि उस समय के यहूदियों की तुलना में एक और भी बदतर आरोप है। एक मुसलमान के रूप में आप ईसा और मरियम से प्यार कर सकते हैं, लेकिन ईश्वर से अधिक प्रेम करने से आपको स्वर्ग मिलेगा, क्योंकि वह वही है जिसके नियमों का आपको पालन करना चाहिए। वह उस दिन आपका न्याय करेगा जब कोई और आपकी मदद नहीं करेगा। उसने आपको, और ईसा को, और उसकी धन्य माता मरियम को बनाया, जैसे उसने मुहम्मद को बनाया। सब मर गए या मरेंगे - ईश्वर कभी नहीं मरता।

जीसस (अरबी में ईसा) ने कभी भी ईश्वर होने का दावा नहीं किया। बल्कि, उन्होंने बार-बार खुद को भेजे जाने के रूप में संदर्भित किया। जब मैं पीछे मुड़कर अपनी युवावस्था में अनुभव की गई उलझन को देखती हूं, तो इसकी जड़ चर्च के इस दावे में निहित है कि ईसा ने खुद के बारे मे जितना बोला वो उससे कहीं अधिक थे। चर्च के पिताओं ने ट्रिनिटी की अवधारणा का आविष्कार करने के लिए एक सिद्धांत तैयार किया। यह मूल तौरात और इंजील (मूसा और ईसा को दिए गए शास्त्र) का भ्रमित प्रतिपादन है जो ट्रिनिटी के मुद्दे के मूल में है।

वास्तव में, केवल यह कहना पर्याप्त है कि यीशु एक पैगंबर थे, हाँ, एक दूत जो उसे भेजने वाले के वचन के साथ आया था। यदि हम यीशु (उन पर ईश्वर की दया और आशीर्वाद हो) को सही रूप मे देखें, तो मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) को उनके छोटे भाई के रूप में स्वीकार करना आसान हो जायेगा, जो उसी लक्ष्य के साथ आए थे - सभी को सर्वशक्तिमान की पूजा करने के लिए बोलना, जिन्होंने सब कुछ बनाया और जिनके पास हम सभी वापस जायेंगे। उनकी भौतिक विशेषताओं पर बहस करने का कोई मतलब नहीं है। अरब, यहूदी, कोकेशियान, नीली या भूरी आँखें, लंबे या छोटे बाल - संदेश के वाहक के रूप में उनके महत्व के बारे में सभी पूरी तरह से अप्रासंगिक हैं। इस्लाम के बारे में जानने के बाद अब जब भी मैं जीसस के बारे में सोचती हूं, मुझे वह जुड़ाव महसूस होता है जो एक खुशहाल परिवार में महसूस होता है - विश्वासियों का परिवार। आप देखते हैं कि ईसा एक "मुसलमान" थे, जो अपने ईश्वर के अधीन थे।

"दस आज्ञाओं" में से पहला:

1.   मैं तेरा ईश्वर यहोवा हूं, मेरे साथ झूठे देवता न रखना।

2.   तू अपने ईश्वर यहोवा का नाम व्यर्थ न लेना।

कोई भी जो "ला इलाहा इल्लल्लाह" (ईश्वर के अलावा कोई पूज्य नहीं है) का सही अर्थ जानता है, इस गवाही में समानता को तुरंत पहचान लेगा। तब हम वास्तव में सभी पैगंबरो की वास्तविक कहानी को एक साथ ला सकते हैं और विकृतियों को समाप्त कर सकते हैं।

"तथा उन्होंने कहा कि बना लिया है अत्यंत कृपाशील ने अपने लिए एक पुत्र। वास्तव में, तुम एक भारी बात गढ़ लाये हो। समीप है कि इस कथन के कारण आकाश फट पड़े तथा धरती चिर जाये और गिर जायेँ पर्वत कण-कण होकर।” (क़ुरआन 19:88-90)

 

 

डायन चार्ल्स ब्रेस्लिन, पूर्व कैथोलिक, अमेरिका (3 का भाग 3)

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विवरण: डायन ने इस्लाम को स्वीकार करने और अपने नए जीवन पर चर्चा की, और अमेरिका के लिए एक प्रार्थना।

  • द्वारा Diane Charles Breslin
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
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इस्लाम की ओर मेरी यात्रा 

मेरी मुस्लिम बनने की चाहत को स्वीकार करने से पहले मैंने क़ुरआन की तीन साल तक तालीम और खोज की। बिल्कुल मुझे आदतों के बदलाव का डर था, जैसे की डेट करने और शराब पीने की मै आदि बन चुकी थी। संगीत और नाचना मेरी ज़िंदगी का अहम हिस्सा थे, और बिकीनी और छोटी स्कर्टस मेरी प्रसिद्धि का कारण थी। इस पूरे समय मुझे किसी भी मुसलमान से मिलने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उस समय राज्य की एकमात्र मस्जिद मे कुछ अप्रवासियों को छोड़कर जो मुश्किल से अंग्रेजी बोल पाते थे, कोई नहीं था। जब मैं शुक्रवार की प्रार्थना के लिए जाती और यह देखने की कोशिश करती कि मैं क्या विचार कर रही हूं, तो वहां लोग मुझे ऐसे देखते जैसे मै कोई जासूस हूं, और अभी भी अधिकांश इस्लामी सभाओं में ऐसा ही है। मेरी मदद के लिए एक भी मुस्लिम अमेरिकी उपलब्ध नहीं था और, जैसा कि मैंने कहा, सभी अप्रवासी आबादी भाषा की वजह से कुछ बता नहीं सकते थे। 

मेरी जीवन के इस चरण के बीच मे, मेरे पिता की कैंसर से मृत्यु हो गई। मैं उनके बेड के एक तरफ बैठी थी और ऐसा लगा जैसे मैंने सच मे एक स्वर्गदूत को देखा जो मेरे पिता की आत्मा निकाल रहा था। वह डरे हुए थे और आँसू उनकी आखों से बह रहे थे। मेरी माँ और पिता दोनों की आरामदायक ज़िंदगी, क्लब, महंगी गाड़ियां...., जो सब कमाए गए ब्याज के कारण था, यह सब अब खतम हो गया। 

अब मेरी चाह इस्लाम में जाने की और ज्यादा हो गई, अभी भी थोड़ा समय था, मेरे तौर तरीके बदलने का और उन सब को खतम करने का जिसके लिए मैंने कभी अपनी अच्छी ज़िंदगी के लिए तलाश की थी। इसके तुरंत बाद मैं मिस्र आई, और अरबी भाषा के चमत्कार और स्पष्ट सत्य की खोज के माध्यम से एक लंबी धीमी यात्रा में शामिल हुई - ईश्वर एक है, शाश्वत है; जिसने न कभी जन्म लिया और न जन्म दिया और ईश्वर के समान कुछ भी नहीं है। 

यह मनुष्यों के बीच परिणामी समानता भी है जिसने मुझे उस धर्म के प्रति सबसे अधिक आकर्षित किया। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की दया और कृपा उन पर बनी रहे) ने कहा की लोग कंघी के दांतों के समान होते है-सभी बराबर, सबसे अच्छा वो है जो सबसे धार्मिक है। क़ुरआन मे हमे यह बताया गया है की सबसे अच्छा वो है जो सबसे धार्मिक है। धार्मिकता मे केवल ईश्वर की मोहब्बत और उसका खौफ शामिल है। जैसे की ईश्वर के शब्द अरेबिक मे प्रकट हुए थे, उसके लिए मैंने अरेबिक भाषा सिखनी शुरू करदी। 

मेरी ज़िंदगी के हर एक हिस्से को क़ुरआन ने बदल दिया। मुझे दुनिया की कोई चीज नहीं चाहिए थी; मुझे ना गाड़ियां, ना कपड़े, ना यात्राएं जिनके बीच मे मैं पहले फसी हुई थी, मुझे कोई इन चाहतों के लिए नहीं बहला सकता था। मै आस्तिक के रुप में काफी अच्छी ज़िंदगी गुजार सकती थी; पर जैसे की कहते है.....यह अब दिल मे नहीं रह गया था....सिर्फ हाथों मे रह गया था। मुझे मेरे पुराने मित्रों और रिश्तेदारों को खोने का बिल्कुल डर नहीं था- अगर ईश्वर ने मुझे उनके करीब लाना चाहा, तो भी ठीक है, पर मुझे पता है ईश्वर मुझे वह देगा जिसकी मुझे जरूरत है, न ज्यादा - न कम। अब मै ज्यादा चिंतित और उदास महसूस नहीं करती थी, जो भी मुझसे छूट गया मुझे उसका भी पछतावा नहीं था, क्योंकि मै ईश्वर की देखभाल में सुरक्षित थी- केवल वह जिसे मैं हमेशा जानती थी बस उनका नाम नहीं मालूम था। 

अमेरिका के लिए प्रार्थना 

मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वो प्रत्येक अमेरिकी को एक सरल, सीधे अंदाज में ईश्वर के एक होने का संदेश दें....ज्यादातर अमरीकी लोग इस्लाम की पूरी जानकारी से बेखबर है। सारा ध्यान हमेशा राजनीति पर होता है, जो लोगों के कर्मों पर केंद्रित होता है। अब समय आ गया है कि हम उन पैगंबरो के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें जो हमें अंधकार से बाहर निकालने और प्रकाश की ओर ले जाने के लिए आए थे। इसमें कोई शक नहीं कि अब अमेरिका को प्रभावित करने वाली अस्वस्थता में अंधेरा छा गया है। सत्य का प्रकाश हम सभी को रास्ता दिखायेगा, और चाहे कोई इस्लामी मार्ग का अनुसरण करना चाहे या नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसे अवरुद्ध करना या दूसरों को इसका पालन करने से रोकना निश्चित रूप से आगे दुख की ओर ले जाएगा। मुझे अपने देश के स्वस्थ भविष्य की बहुत परवाह है, और मुझे पूरा यकीन है कि इस्लाम के बारे में अधिक जानने से मेरी इस आशा के पूरा होने की संभावना बढ़ जाएगी। 

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