您所请求的文章/视频尚不存在。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

あなたが要求した記事/ビデオはまだ存在していません。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

您所请求的文章/视频尚不存在。

The article/video you have requested doesn't exist yet.

L'articolo / video che hai richiesto non esiste ancora.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

요청한 문서 / 비디오는 아직 존재하지 않습니다.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

המאמר / הסרטון שביקשת אינו קיים עדיין.

The article/video you have requested doesn't exist yet.

पैगंबर मुहम्मद के महान जीवन में पैगंबरी के संकेत (भाग 2 का भाग 1): पैगंबर मुहम्मद का प्रारंभिक जीवन

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: पैगंबर मुहम्मद का जीवन ईश्वर द्वारा निर्देशित था और यह बहुत कम उम्र से ही प्रदर्शित किया गया था।

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2013 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 1
  • देखा गया: 1260 (दैनिक औसत: 4)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

"पैगंबर मुहम्मद आप में से किसी के पिता नहीं हैं, लेकिन वह ईश्वर के दूत और वह आखरी नबी हैं और ईश्वर को सभी बातों का ज्ञान है।” (क़ुरआन 33:40)

SignsProphethood1.jpgजब कोई व्यक्ति इस्लाम स्वीकार करता है, तो वह पैगंबर मुहम्मद को ईश्वर का अंतिम पैगंबर के रूप में भी स्वीकार करता है और वह इस बात की भी पुष्टि करता है कि पांच दैनिक प्रार्थनाओं में से कोई भी प्रार्थना अदा करेगा। इसके अलावा दुनिया में लगभग 1.5 अरब से भी अधिक लोग मानते हैं कि पैगंबर मुहम्मद का जीवन अनुकरणीय और आकांक्षा के योग्य है। हालाँकि बहुत से लोग पैगंबर मुहम्मद को जाने बिना ही इस्लाम को अपना लेते हैं, ईश्वर उनलोगों पर अपनी रहमत बनाए रखे। शायद वे सभी जानते हैं कि वह अरब प्रायद्वीप में पैदा हुए थे और वहीं पल बड़े और उन्होंने क़ुरआन के रूप में ईश्वर का शाब्दिक वचन प्राप्त किया था। निम्नलिखित दो लेखों में हम पैगंबर मुहम्मद के महान जीवन के बारे में जानेंगे। ये हमारी जानकारी को तो बढ़ाएगा ही और दिलसे प्यार करना भी सिखाएंगे। हम उसके नेक जीवन में भविष्यवक्ता को देखकर इससे सही ज्ञान प्राप्त करेंगे।

अरबी में पैगंबर (नबी) शब्द नबअ शब्द से बना है जिसका अर्थ समाचार होता है। इस प्रकार हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि एक पैगंबर ईश्वर और उसके संदेश को आम लोगों तक पहुंचता है। वे एक अर्थ में पृथ्वी पर ईश्वर के राजदूत हैं। उनका मिशन एक ईश्वर के पूजा करने का संदेश देना है। इसमें लोगों को पूजा के लिए बुलाना, संदेश की व्याख्या करना, खुशखबरी या चेतावनी देना और राष्ट्र के मामलों का निर्देशन करना शामिल है। सभी नबी ईमानदारी और पूरी तरह से ईश्वर के संदेश को व्यक्त करने के लिए उत्सुक थे और इसमें हमारे अंतिम पैगंबर मुहम्मद भी शामिल थे। अपने अंतिम उपदेश के दौरान पैगंबर मुहम्मद ने तीन बार सभा से पूछा कि क्या ‘ मैं ने ईश्वर का पूरा पैगाम आप तक पहुंचाया है कि नहीं ' आसमान कि और इशारह करते हुए ईश्वर से सहाबा किराम (माननीय साथियों)  के जवाब को अपने इश्वर को सुनने के लिए कहा, जो जवाब एक शानदार "हाँ!" था।

साथ ही साथ एक ईश्वर को उनके आह्वान का सार, पैगंबरों की सच्चाई का एक और स्वीकृत संकेत यह है कि वे अपना जीवन कैसे जीते हैं। पैगंबर मुहम्मद के जीवन के वृत्तांत जो हमें अपने धर्मी पूर्ववर्तियों से विरासत में मिले हैं, यह दर्शाते हैं कि हमारे नबी की भविष्यवाणी शुरू से ही ईश्वर के द्वारा निर्देशित थी। बहुत पहले से ही पैगंबर मुहम्मद को मानव जाति को सही रास्ते पर ले जाने के लिए तैयार किया जा रहा था और उनके जीवन के अनुभवों ने उन्हें इस तरह के एक बड़ी जिम्मेदारी के लिए अच्छी स्थिति में खड़ा कर दिया। फिर 40 वर्ष की आयु में जब उन्हें नबूअत प्रदान किया गया, तब भी ईश्वर ने उनके लक्ष्य का समर्थन और पुष्टि करना जारी रखा। पैगंबर मुहम्मद के जीवन का लेखा-जोखा उनके अनुकरणीय चरित्र के उदाहरणों से भरा पड़ा है; जैसे वह दयालु, सच्चा, बहादुर, और उदार थे। वह आख़िरत की तैयारी कर रहे थे।  पैगंबर मुहम्मद जिस तरह से अपने साथियों, परिचितों, दुश्मनों, जानवरों और यहां तक ​​​​कि निर्जीव वस्तुओं के साथ व्यवहार करते थे, उसमें कोई संदेह नहीं था कि वह हमेशा ईश्वर के प्रति जागरूक थे।

पैगंबर मुहम्मद का जन्म कई तथाकथित चमत्कारी घटनाओं के साथ हुआ था और असाधारण घटनाओं की बात निस्संदेह पैगंबर के संकेत के रूप में कार्य करती थी, हालांकि हमें उन असाधारण घटनाओं में अनारक्षित रूप से विश्वास करने के बारे में सतर्क रहना चाहिए। इस्लामी इतिहास के सभी जानकारों और इतिहासकारों द्वारा सभी घटनाओं को स्वीकार नहीं किया जाता है, हालांकि वे एक असाधारण शुरुआत और अल्लाह द्वारा निर्देशित जीवन का संकेत देते हैं, वे अलंकृत या अतिरंजित हो सकते हैं।

पैगंबर मुहम्मद के बचपन को विशेष और साधारण परिस्थितियों ने घेर लिया और निस्संदेह उनके चरित्र पर असर पड़ा। जब वह आठ साल के थे, तब उन्होंने अपने दोनों माता-पिता और अपने प्यारे दादा अब्दुल मुत्तलिब को खो दिया था। उनकी परवरिश उनके चाचा और उनके महान समर्थक अबू तालिब की देखभाल से हुई। इस प्रकार एक छोटे लड़के के रूप में भी वह पहले से ही बड़ी भावनात्मक और शारीरिक उथल-पुथल का सामना कर चुके थे। मुहम्मद के जीवन को कई इतिहासकार और क़ुरआन दोनों ही उनके बाधित जीवन को स्वीकार करते हैं।

क्या उसने तुम्हें (हे मुहम्मद) अनाथ नहीं पाया और तुम्हें शरण दी? (क़ुरआन 93:6)

मुहम्मद के चाचा अबू तालिब गरीब थे और अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष करते थे, इसलिए अपनी किशोरावस्था के दौरान पैगंबर मुहम्मद ने एक चरवाहे के रूप में काम किया। इस व्यवसाय से उन्होंने एकांत को अपनाना सीखा और धैर्य, सतर्कता, देखभाल, नेतृत्व और खतरे को महसूस करने की क्षमता जैसे गुणों को विकसित किया। चरवाहा एक ऐसा पेशा था जिसके बारे में हम जानते हैं कि ईश्वर के सभी नबियों में एक समान बात था। ’… उनके साथियों ने पूछा, “क्या आप एक चरवाहा थे?” उन्होंने उत्तर दिया, "ऐसा कोई नबी नहीं था जो चरवाहा न हो।"’[1]

अपनी किशोरावस्था में मुहम्मद कभी-कभी अबू तालिब के साथ, कारवां के साथ व्यापार केंद्रों की यात्रा करते थे। कहा जाता है कि कम से कम एक अवसर पर उन्होंने सीरिया के तरह उत्तर की ओर यात्रा की थी।  पुराने व्यापारियों ने उनके चरित्र को पहचाना और उनका उपनाम अल-अमीन रखा, जिसका अर्थ होता है "जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं"। उनकी युवावस्था में भी उन्हें सच्चे और भरोसेमंद के रूप में जाना जाता था।  एक कहानी जिसे अधिकांश इस्लामी विद्वानों और इतिहासकारों ने स्वीकार किया है। वह पैगंबर मुहम्मद की सीरिया की यात्राओं में से एक है।

कहानी यह है कि भिक्षु (सन्यासी बाबा) बहिरा ने आने वाले नबी की भविष्यवाणी की और अबू तालिब को "अपने भतीजे की सावधानी से रक्षा करने" की सलाह दी।  जीवनी लेखक इब्न इशाक के अनुसार, जिस कारवां में पैगंबर मुहम्मद यात्रा कर रहे थे, शहर के किनारे पर पहुंचे, बहिरा को एक बादल दिखाई दे रहा था जो छावं करते हुए एक जवान आदमी का पीछा कर रहा था। जब कारवां कुछ पेड़ों की छाया के नीचे रुका, तो बहिरा ने "बादल को देखा, तब वह पेड़ पर छाया हुआ था, और उसकी शाखाएँ ईश्वर का हुकम से झुकी हुई थीं, जब तक कि वह उसके नीचे छाया में रहे।" बहिरा ने यह देखने के बाद मुहम्मद को करीब से देखा और उनसे कई ईसाई भविष्यवाणियों के बारे में कई सवाल पूछे, जिनके बारे में उन्होंने पढ़ा और सुना था।

युवा मुहम्मद अपने लोगों के बीच अपने शालीनता, सदाचारी व्यवहार और शालीन व्यवहार के लिए प्रतिष्ठित थे, इस प्रकार उनके साथियों के लिए उन्हें देखना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी। यहां तक ​​​​कि एक युवा के रूप में भी कई साल पहले अंधविश्वासी प्रथाओं को छोड़ दिया तथा शराब पीने, पत्थर की वेदियों पर वध किए गए मांस खाने या मूर्तिपूजा उत्सवों में भाग लेने से दूर रहें। जब तक वह वयस्क होते, तब तक मुहम्मद को मक्का समुदाय का सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद सदस्य माना जाता था। यहां तक ​​कि जो लोग छोटे आदिवासी झगड़ों से खुद को चिंतित रखते थे, वे भी मुहम्मद की ईमानदारी और अखंडता को स्वीकार करते थे।

मुहम्मद के गुण और अच्छे नैतिक चरित्र कम उम्र से ही स्थापित हो गए थे, और ईश्वर ने उनका समर्थन और मार्गदर्शन करना जारी रखा। जब वह 40 वर्ष के थे, तब मुहम्मद को दुनिया को बदलने तथा पूरी मानवता को लाभ पहुंचाने का साधन दिया गया था।

निम्नलिखित लेख में हम देखेंगे कि पैगंबर बनने के बाद मुहम्मद का जीवन कैसे बदल गया और निष्कर्ष निकाला कि उन लोगों को विश्वास देना अनुचित है जो दावा करते हैं कि मुहम्मद झूठे पैगंबर थे। उन्होंने आराम, धन, महानता, महिमा या शक्ति प्राप्त करने के लिए पैगंबरी नहीं किया।

 



फुटनोट:

[1] सहीह अल-बुखारी

 

 

पैगंबर मुहम्मद के महान जीवन में पैगंबर होने का सूचना (2 का भाग 2): नबूवत के बाद

रेटिंग:
फ़ॉन्ट का आकार:

विवरण: रहस्योद्घाटन शुरू होने के बाद पैगंबर मुहम्मद का जीवन काफी बदल गया। उन्होंने कैसे समायोजित किया, यह नबूवत के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक था।

  • द्वारा Aisha Stacey (© 2013 IslamReligion.com)
  • पर प्रकाशित 04 Nov 2021
  • अंतिम बार संशोधित 04 Nov 2021
  • मुद्रित: 0
  • देखा गया: 876 (दैनिक औसत: 3)
  • रेटिंग: अभी तक रेटिंग नहीं दी गई है
  • द्वारा रेटेड: 0
  • ईमेल किया गया: 0
  • पर टिप्पणी की है: 0

SignsProphethood2.jpg40 साल की उम्र में, पैगंबर मुहम्मद एक स्थापित व्यापारी और पारिवारिक व्यक्ति थे, जो ध्यान और प्रतिबिंब की अवधि से गुजरे। वह मक्का का एक सम्मानित नागरिक थे और लोग उनके पास विवादों को निपटाने, सलाह लेने और अपने कीमती सामान देने तथा सुरक्षित रखने के लिए लोग उनके पास आते थे। हालाँकि यह सब बदलने वाला था क्योंकि उनके अलगाव और चिंतन के एक समय के दौरान स्वर्गदूत जिब्राइल ने उनसे मुलाकात की थी और क़ुरआन की आयतें (छंदें) उनके सामने प्रकट होने लगी थीं। उनका मिशन शुरू हो गया था; उनका जीवन अब उनका अपना नहीं था - यह अब इस्लाम के प्रचार के लिए समर्पित था।

शायद अब उसके जीवन की कुछ घटनाएँ समझ में आने लगी थीं। शायद वह देख सकते थे कि ईश्वर ने उनके लिए जिन चीजों की योजना बनाई थी, क्योंकि बीती बातों की जांच में हम देख सकते हैं कि पैगंबर मुहम्मद के पूरे जीवन में कई पहलुओं और परिस्थितियों में पैगंबर के संकेत दिखाई दे रहे थे। अपने लक्ष्य से पहले मुहम्मद का जीवन अपेक्षाकृत आसान था। उनकी शादी अच्छी और खुशहाल थी, वह बच्चे, बिना वित्तीय चिंता और निस्संदेह दोस्तों और परिवार से घिरे थे जो उन्हें बहुत प्यार और उनका सम्मान करते थे।

अपने पैगंबरी की घोषणा करने के बाद वह जल्द ही गरीब हो गए,उनका सामाजिक बहिष्कृत किया गया और एक से अधिक अवसरों पर उसकी जान को खतरा भी था। महानता, शक्ति, धन और महिमा उनके दिमाग से सबसे दूर की चीज थी। वास्तव में उनके पास ये चीजें पहले से ही थीं, भले ही वह छोटे स्तर पर थी। झूठी भविष्यवाणी और मिशन की घोषणा करने से उसे कुछ हासिल नहीं होता है। पैगंबर मुहम्मद, उनके परिवार और उनके अनुयायियों का उपहास किया गया तथा शारीरिक रूप से परेशान किया गया, उनकी जीवन शैली सबसे खराब स्थिति में बदल गई।

मुहम्मद के साथियों में से एक ने कहा, “ईश्वर का पैगंबर ने उस समय से जब तक ईश्वर ने उन्हें (पैगंबर के रूप में) भेजा था, तब तक अच्छे आटे से बनी रोटी खाने के नसीब नहीं हुई थी।”[1] एक अन्य ने घोषणा की कि "जब पैगंबर की मृत्यु हो गई, उन्होंने अपने सफेद खच्चर (सवारी के लिए), अपनी अस्त्र (हथियार) और भूमि के एक टुकड़े को छोड़कर जिसे उसने दान के लिए छोड़ दिया था, उसके पास न तो पैसा था और न ही कुछ और।”[2].

अपनी मृत्यु से पहले, पैगंबर मुहम्मद एक साम्राज्य के नेता थे, राष्ट्रीय खजाने तक उनकी पहुंच थी, लेकिन वे सादगी से रहते थे, उन्होंने केवल अपने मिशन को पूरा करने और ईश्वर की पूजा करने पर ध्यान केंद्रित किया। पैगंबर, शिक्षक, राजनेता, सामान्य, न्यायाधीश और मध्यस्थ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छी तरह से निभाते और उसके बावजूद मुहम्मद नबी अपनी बकरियों को दूध पिलाते थे, अपने कपड़े और जूते खुद ही साफ कर लेते थे , साथ ही सामान्य घरेलू काम में मदद करते थे।[3] पैगंबर मुहम्मद का जीवन विनम्रता और सादगी का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। उनके पोशाक और जीवन शैली ने उन्हें उनके अनुयायियों से अलग नहीं किया। जब कोई सभा में जाता था तो पैगंबर मुहम्मद के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं था जो उन्हें सभा में अन्य लोगों से अलग करता था।

अपने लक्ष्य के शुरुआती वर्षों में, सफलता की एक दूरस्थ संभावना से बहुत पहले, मुहम्मद को मक्का के नेताओं से एक दिलचस्प प्रस्ताव मिला। यह सोचकर कि मुहम्मद व्यक्तिगत लाभ के लिए पैगंबर के ये दावे कर रहे होंगे, एक दूत उनके पास आया और कहा "... यदि आप धन चाहते हैं, तो हम आपके लिए पर्याप्त धन एकत्र करेंगे ताकि आप हम में से सबसे अमीर बन सकें। यदि आप नेतृत्व चाहते हैं, तो हम आपको अपना नेता मानेंगे और आपकी स्वीकृति के बिना कभी भी किसी मामले पर निर्णय नहीं लेंगे। यदि आप एक राज्य चाहते हैं, तो हम आपको अपने ऊपर राजा बना देंगे..."। किसी भी इंसान के लिए, किसी भी ऐतिहासिक काल में इसे ठुकराना बहुत कठिन प्रस्ताव होगा; हालाँकि मुहम्मद को व्यक्तिगत लाभ या मान्यता की कोई इच्छा नहीं थी। हालाँकि इस उदार पेशकश के लिए केवल एक ही शर्त थी, यह वह थी जो उस हर चीज़ के विरुद्ध थी जिसके लिए अब मुहम्मद खड़े थे। मक्का के नेताओं को उम्मीद थी कि वह इस्लाम को छोड़ देंगे और बिना किसी हिचकिचाहट के ईश्वर की इबादत करना बंद कर देंगे। ।[4]  पैगंबर मुहम्मद ने स्पष्ट रूप से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

एक अन्य अवसर पर मुहम्मद के चाचा अबू तालिब को अपने भतीजे की जान का डर था और तब उनके चाचा उनसे लोगों को इस्लाम में बुलाना बंद करने की भीख मांगी। फिर से मुहम्मद का जवाब निर्णायक और ईमानदार था, उन्होंने कहा, "मैं ईश्वर के नाम की कसम खाता हूँ, हे चाचा! बात (लोगों को इस्लाम में बुलाने की), मैं तब तक नहीं रुकूंगा जब तक कि या तो ईश्वर इसे जीत नहीं लेते या मैं इसका बचाव करते हुए नष्ट नहीं हो जाता।”[5]

मक्का के बुतपरस्त लोगों ने मुहम्मद के चरित्र को कलंकित करने और उस संदेश को छोटा करने के लिए कई उपाय किए जिस को वह (पैगंबर मुहम्मद) फैलाने की कोशिश कर रहे थे। क़ुरआन की निंदा करते समय वे विशेष रूप से निर्दयी थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि क़ुरआन दैवीय रूप से प्रकट नहीं हुआ था और मोहम्मद ने इसे स्वयं लिखा था। यह लोगों को मुहम्मद का अनुसरण करने या ईश्वर के पैगंबर होने के उनके दावे पर विश्वास करने से हतोत्साहित करने के लिए किया गया था। पैगंबर मुहम्मद ने क़ुरआन नहीं लिखा था। वह एक अनपढ़ व्यक्ति थे, पढ़ने या लिखने में पूरी तरह से असमर्थ थे। वह कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को जानने या अनुमान लगाने में भी असमर्थ थे जिनका क़ुरआन आसानी से और अक्सर उल्लेख करता है।

इसके अलावा यह कहना भी समझ में आता है कि अगर क़ुरआन मुहम्मद द्वारा लिखा गया होता तो वह प्रशंसा करते और खुद का बहुत अधिक उल्लेख करते। क़ुरआन वास्तव में पैगंबर मुहम्मद का उल्लेख करने की तुलना में पैगंबर यीशु और मूसा दोनों का कई बार नाम से उल्लेख करता है। क़ुरआन भी पैगंबर मुहम्मद को फटकार और सुधारता है। क्या एक धोखेबाज पैगंबर खुद को एक ऐसे व्यक्ति की तरह दिखाने का जोखिम उठाएगा जो गलतियाँ कर सकता है?

पैगंबर मुहम्मद एक अनपढ़ अरब व्यापारी थे। उनका जीवन अचूक हो सकता है, सिवाय इसके कि उनके अस्तित्व की शुरुआत से ही ईश्वर उनके साथ थे, उन्हें भविष्यवाणी के लिए तैयार कर रहे थे और पूरी मानवता को धार्मिक विकास के एक नए युग में मार्गदर्शन करने के लिए तैयार कर रहे थे। जैसे-जैसे मुहम्मद बड़े हुए, वे सच्चे, ईमानदार, भरोसेमंद, उदार और ईमानदार होने लगे। वह बहुत आध्यात्मिक होने के लिए भी जाने जाते थे और लंबे समय से अपने समाज के खुले विरोध और मूर्तिपूजा से घृणा करते थे।

जब हम पैगंबर मुहम्मद के जीवन को दूर से देखते हैं तो हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि उनका जीवन में से ईश्वर की सेवा मुख्य था, उनका एकमात्र उद्देश्य संदेश देना था। संदेश का भार उसके कंधों पर भारी पड़ा और यहां तक कि अपने अंतिम भाषण पर भी वह चिंतिंत होकर भाषण दे रहा था और लोगों से यह प्रमाणित कर रहा था कि उसने ईश्वर का संदेश पूर्ण रूप से आम जनता तक सुरक्षित रूप में पहुंचा दिया था। यदि मुहम्मद को सत्ता या प्रसिद्धि चाहिए होती तो वह मक्का के नेता होने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते। यदि वह धन की तलाश में होते तो वह एक साम्राज्य के किसी अन्य शक्तिशाली नेता के विपरीत, एक साधारण जीवन नहीं जीता होता, बमुश्किल किसी भी संपत्ति के साथ मरता। पैगंबर मुहम्मद के जीवन की सादगी और इस्लाम के संदेश को फैलाने की उनकी अटूट इच्छा पैगंबर के लिए उनके दावे की वैधता के मजबूत संकेत हैं।



फुटनोट:

[1] सहीह अल बुखारी

[2] पूर्वोक्त

[3] सहीह अल-बुखारी, इमाम अहमद।

[4] अल-सेरा अल-नबावेय्याह, इब्न हिशाम, खंड 1.

[5] पूर्वोक्त।

इस लेख के भाग

सभी भागो को एक साथ देखें

टिप्पणी करें

सर्वाधिक देखा गया

प्रतिदिन
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
कुल
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

संपादक की पसंद

लेख की सूची बनाएं

आपके अंतिम बार देखने के बाद से
यह सूची अभी खाली है।
सभी तिथि अनुसार
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)

सबसे लोकप्रिय

सर्वाधिक रेटिंग दिया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
सर्वाधिक ईमेल किया गया
सर्वाधिक प्रिंट किया गया
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
(और अधिक पढ़ें...)
इस पर सर्वाधिक टिप्पणी की गई

आपका पसंदीदा

आपकी पसंदीदा सूची खाली है। आप लेख टूल का उपयोग करके इस सूची में लेख डाल सकते हैं।

आपका इतिहास

आपकी इतिहास सूची खाली है।

View Desktop Version